मशहूर बॉलीवुड एक्टर अरशद वारसी
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सही कास्टिंग का असर
अरशद मानते हैं कि एक अच्छी फिल्म की आधी जीत उसकी कास्टिंग में होती है। वो कहते हैं, 'मेरे लिये अच्छी कास्टिंग आधा युद्ध जीतने के बराबर है। अगर सही अभिनेता को सही किरदार मिल जाये, तो फिल्म अपने आप बेहतर हो जाती है। इस फिल्म में जीतेंद्र (पंचायत फेम एक्टर) ने कमाल का काम किया है। इससे बेहतर कोई इसे नहीं निभा सकता था। सच कहूं तो मैं इस मौके के लिये बहुत आभारी हूं।'
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कॉमेडियन की छवि और गंभीर किरदार
किरदार पर बात करते हुए अरशद ने कहा, ‘कॉमेडी करने वाले अभिनेताओं के साथ यह दिक्कत यह होती है कि जब वो गंभीर किरदार करते हैं, तो लोग उन्हें मजाक में लेते हैं। दर्शकों को गंभीर किरदारों में कॉमेडियन छवि वाला अभिनेता हजम नहीं होता। कई कलाकारों के साथ ऐसा हुआ है, लेकिन खुशकिस्मती से मैंने यह दीवार तोड़ दी। शुरुआत में मैं भी थोड़ा डरा हुआ था कि लोग मुझे स्वीकार करेंगे या नहीं, पर 'शहर' फिल्म के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। अब मैं किसी भी तरह के रोल को लेकर सहज हूं।’
इंडस्ट्री और अनुभव की सच्चाई
अपने 27 साल के अनुभव पर अरशद बेबाकी से कहते हैं, 'इतने वर्षों में मैंने ये सीखा है कि आप कितना भी अच्छा काम कर लो, अगर फिल्म नहीं चलती तो कोई नहीं पूछता। लेकिन अगर फिल्म चल जाये, चाहे एक्टिंग औसत ही क्यों न हो, तो सब कुछ बदल जाता है।'
‘जॉली एलएलबी’ की सफलता पर वो मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘काफी वर्षों से इस इंडस्ट्री में हूं तो अब इन चीजों का मुझ पर असर नहीं होता। अब सफलता-असफलता से खासा फर्क नहीं पड़ता। इंडस्ट्री को भी पता है कि मैं कहीं जाने वाला नहीं हूं। आज नहीं तो कल एक हिट दे ही दूंगा।’