अनुराग कश्यप
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कॉलेज के दौरान नुक्कड़ नाटक से जुड़े
गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की। ग्रेजुएशन के दौरान अनुराग नुक्कड़ नाटक से जुड़ गए और कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्होंने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिल्में देखीं। इस दौरान 10 दिनों में उन्होंने 55 फिल्में देख डालीं और विटोरियो डी सिका की ‘बाइसिकल थीव्स’ ने उन्हें काफी प्रभावित किया।
5 हजार रुपए लेकर पहुंचे मुंबई
साल 1993 में अनुराग कश्यप जेब में 5 हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंच गए और काम की तलाश में भटकने लगे। हालांकि, उन्हें इतनी जल्दी काम नहीं मिला और उनके पैसे भी खत्म हो गए। इसके बाद उन्होंने कई महीने सड़कों पर, फुटपाथ पर और सिग्नल पर सोकर बिताए। फिर वह पृथ्वी थिएटर में काम पाने में कामयाब रहे, लेकिन उनका पहला नाटक अधूरा रह गया क्योंकि निर्देशक की मृत्यु हो गई। हालांकि, इस दौरान वो मनोज बाजपेयी, तिग्मांशु धूलिया और अनुभव सिन्हा जैसे लोगों के संपर्क में आए और धीरे-धीरे इनसे दोस्ती शुरू हुई।
श्रीराम राघवन और हंसल मेहता के लिए लिखीं कहानी, लेकिन नहीं हो सकी रिलीज
1995 में एक परिचित ने अनुराग का परिचय शिवम नायर से कराया। जिस दिन वे मिले कश्यप ने नायर के घर पर ‘टैक्सी ड्राइवर’ देखी और इस फिल्म ने उन्हें कुछ लिखने के लिए प्रेरित किया। उस वक्त श्रीराम राघवन, श्रीधर राघवन और शिव सुब्रमण्यम की टीम दो प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थी, जिनमें से एक सीरियल किलर ऑटो शंकर के जीवन पर आधारित एक शॉर्ट टीवी सीरीज ‘ऑटो नारायण’ थी। दूसरी अनुराग कश्यप द्वारा लिखित एक फिल्म थी। ‘ऑटो नारायण’ में देरी हुई क्योंकि सुब्रमण्यम द्वारा लिखी गई स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। इसके बाद अनुराग ने इस स्क्रिप्ट को फिर से लिखा और उन्हें इसका क्रेडिट भी मिला। लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद 1997 में उन्होंने हंसल मेहता की पहली फिल्म ‘जयते’ की स्क्रिप्ट लिखी, जो सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाई। इसके अलावा टीवी श्रृंखला ‘कभी-कभी’ के एपिसोड भी लिखे।