अनंत श्रीराम का बयान
पिछले हफ्ते कृष्णा जिले में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित एक सभा में अनंत श्रीराम ने आज के दौर के सिनेमा द्वारा हिंदू पौराणिक कथाओं को बिगड़ने पर अपनी नाराजगी जताई और ऐसी फिल्मों के बहिष्कार का आह्वान किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि उन्हें ऐसा क्यों बर्दाश्त करना चाहिए। खास उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने हिंदू देवताओं और प्रतीकों को गलत तरीके से पेश करने के लिए फिल्म निर्माताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब एक निर्देशक ने भगवान विष्णु के लिए एक शीर्षक 'ब्रह्मांड नायकुडु' को अस्वीकार कर दिया तो उन्होंने उसके साथ फिर कभी काम न करने की कसम खा ली।
कल्कि 2898 एडी पर अनंत की टिप्पणी
इसके बाद उन्होंने 'कल्कि 2898 एडी' का जिक्र किया और फिल्म की टीम पर कर्ण के किरदार को मानवीय बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'जब फिल्म निर्माताओं ने कर्ण को अर्जुन से बेहतर दिखाया और उसे बिगड़ किया तो हम हिंदू समाज के रूप में चुप रहने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? जब द्रौपदी का वध हुआ तो कर्ण ने क्या किया? मैं इस फिल्म उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति के रूप में शर्मिंदा हूं। हम अब और चुप नहीं रहने वाले हैं।' उन्होंने रामायण और भागवत पुराण पर स्वतंत्रता के साथ अपने हिसाब से काम करने वाले फिल्म निर्माताओं की भी आलोचना की।
वेणु उडुगुला ने दिया जवाब
अनंत के बयानों को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। कुछ लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री से होने के बावजूद अनंत श्रीराम का समर्थन किया तो कुछ ने उन पर सवाल उठाए। फिल्म निर्माता वेणु उडुगुला ने अनंत श्रीराम को याद दिलाया कि कल्कि 2898 एडी से पहले नंदमुरी तारक रामाराव (एनटीआर) ने भी पौराणिक कथाओं में कर्ण और अन्य कथित ग्रे पात्रों का मानवीय रूप दिया था।
नंदमुरी तारक रामाराव से जोड़ा मुद्दा
उन्होंने पोस्ट साझा कर लिखा, 'नमस्ते अनंत श्रीराम सर, कल्कि फिल्म की बात अलग है, तेलुगु सांस्कृतिक कथा में कर्ण के चरित्र को सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से पेश करने वाली पहली फिल्म 'दान वीरा सूरा कर्ण' थी। महान एनटीआर द्वारा इस फिल्म के माध्यम से कर्ण के व्यक्तित्व को लोगों के करीब लाया गया था।'