अमिताभ बच्चन और टीनू आनंद
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उनकी सबसे बड़ी पहचान, कभी हार न मानने वाला समर्पण
'ये छोटी-छोटी घटनाएं ही दिखाती हैं कि अमिताभ में कितना जुनून और धैर्य था। अमिताभ की पहचान उनका समर्पण है। वो कभी हार नहीं मानते। मुश्किलें आएं या विरोध, हर बार वो मजबूती से निकलते। यही उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, असली इंसान बनाता है।'
वो दिन जब कंपनी दिवालिया हुई और उनका सबसे बड़ा डर
'मुझे लगता है, उनकी सबसे बड़ी चिंता वो दिन हैं जब उनकी कंपनी दिवालिया हो गई थी। वो दौर उनके लिए बहुत कठिन था। सिर्फ पैसों की वजह से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी। वह दिन वो कभी नहीं भूलना चाहते और नहीं चाहते कि जिंदगी में फिर कभी ऐसा हो। शायद यही वजह है कि वो हर वक्त खुद को पूरी तरह काम में लगा देते हैं।'
सुबह से रात तक काम करने की उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन
'वो सुबह सात बजे उठते हैं, कभी-कभी उससे भी पहले। रात बहुत देर तक काम करते हैं। जब बाकी लोग थक जाते हैं तब भी वो रुकते नहीं। स्क्रिप्ट पढ़ते हैं, डायलॉग रिहर्स करते हैं, हर सीन, हर इमोशन, हर शॉट पर ध्यान देते हैं। यही उनका तरीका है डर और असफलता से लड़ने का। उन्होंने उस डर और चिंता को ऊर्जा, जुनून और अनुशासन में बदल दिया है। यही हर युवा और हर व्यक्ति को सीखना चाहिए। ये सिर्फ काम नहीं है, यह उनका जीने का तरीका है।'
फिल्म के सेट पर क्रिएटिव मतभेद और समझदारी
'एक बार फिल्म के दौरान मेरी अमिताभ के साथ बड़ी बहस हुई। मैं लगभग फिल्म छोड़ने ही वाला था। डायलॉग को वो बोलना नहीं चाहते थे और मैंने कहा, 'ठीक है, मैं फिल्म छोड़ दूंगा।' और मैं चला गया। लेकिन उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, 'ठीक है, ठीक है, मैं जानता हूं तुम बहुत जिद्दी हो। मैं तुम्हारे डायलॉग बोल दूंगा।’
'इतने साल में कई छोटी लड़ाइयां हुईं, लेकिन मुझे खुशी है क्योंकि वो समझते हैं। मेरी जिद के पीछे मेरा काम के प्रति समर्पण है। मैं किसी को दखल नहीं देना चाहता और वो इसे समझते हैं। बहुत कम अभिनेता ऐसा समझते हैं, लेकिन अमिताभ समझते हैं। यही उनकी महानता है।'
एंग्री यंग मैन की छवि के पीछे असली अमिताभ
'असली अमिताभ कभी उस छवि में खोते नहीं। फिल्मों और जिंदगी में वो न तो एंग्री यंग मैन हैं और न ही एंग्री ओल्ड मैन। आदमी बदलता है। पहले वो गुस्सैल रोल करते थे, लेकिन आज वे अलग-अलग और बेहतरीन रोल करते हैं। यही वो हैं, बहुमुखी, समर्पित, हमेशा बेहतर।'
डर को ऊर्जा और जुनून में बदलने की उनकी कला
'उनकी ऊर्जा और मेहनत उनके डर और जुनून से आती है। वो डर कि सब कुछ खो सकता है, उन्हें रोकता नहीं बल्कि आगे बढ़ाता है। यही वजह है कि वो लगातार मजबूत और अद्भुत बने हुए हैं। हर युवा और हर व्यक्ति को इसे सीखना चाहिए। यही अमिताभ बच्चन हैं। थकने वाले नहीं, डरने वाले नहीं, अनुशासन और जुनून से भरे।'
83 साल की उम्र में भी असली ताकत सिर्फ स्टारडम में नहीं, मेहनत और जुनून में
'सच्चाई ये है कि 83 साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन हमें दिखाते हैं कि असली ताकत सिर्फ स्टारडम या वाहवाही से नहीं आती। असली ताकत आती है भूतपूर्व हार और डर को अपने जुनून और मेहनत में बदलने की क्षमता से।'