'आमिर खान: सिनेमा का जादूगर' फिल्म फेस्टिवल का ऐलान किया गया है। यह फेस्टिवल आमिर खान के भारतीय सिनेमा में दिए गए अनमोल योगदान को सेलिब्रेट करने के लिए मनाया जा रहा है। इस मौके पर आमिर खान ने कहा मेरे सबसे बुरे वक्त में भी मेरे पास 'नहीं' कहने की हिम्मत थी। इसलिए मैं अब तक इस तरह से व्यवहार करता हूं। अगर मैंने उस दिन समझौता कर लिया होता तो मेरा पूरा करियर समझौता करते हुए ही बीतता।
पर्दे के पीछे से आमिर सुनते थे कहानियां
आमिर के मुताबिक 'मुझे जिंदगी के सबसे बुरे वक्त में महेश भट्ट की एक फिल्म मिली। लेकिन मुझे वह फिल्म पसंद नहीं आई। मैंने हिम्मत करके महेश भट्ट को यह बात बताई। मुझे कहानियां सुनना बहुत पसंद था। जब मैं 5 साल का था तो जब कोई मेरे पिता को कहानियां, कॉन्सेप्ट या स्क्रिप्ट सुनाने आता था, तो मैं पर्दों के पीछे छिप जाता था और कहानियां सुनता था।'
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आमिर खान
- फोटो : इंस्टाग्राम@aamirkhanproductions
आमिर के पिता कहानियों पर लेते थे मशवरा
आमिर खान ने बताया कि 'मेरे पिता को भी एहसास हो गया था कि मैं पीछे छिप जाता हूं, उन्होंने मुझे सामने बैठाया और कुछ सालों बाद मेरे पिता पूछते थे कि क्या हुआ। कुछ सालों बाद उनकी मां कहती थीं कि फलां दिन कहानी सुनने के लिए फ्री हो जाना। मैंने कभी फिल्मों को एक्टर के तौर पर नहीं सोचा। मैं फिल्मों को इस तरह सुनता था कि वे फिल्म के तौर पर कैसी होंगी।'
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आमिर खान को लेकर मनाया जाएगा जश्न
दरअसल 'आमिर खान: सिनेमा का जादूगर' नाम के फेस्टिवल के तहत आमिर खान की सबसे हिट फिल्मों को फिर से बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा। इसके तहत आमिर खान की यादगार फिल्मों का जश्न मनाया जाएगा।
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