दिग्गज संगीतकार एआर रहमान इन दिनों इंस्ट्री में सांप्रदायिकता बढ़ने के अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। उनके बयान पर लोगों की राय दो खेमों में बंटी है। कुछ लोग उनका समर्थन कर रहे हैं और तो कुछ लोग उन पर निशाना साध रहे हैं। इस बीच अब एआर रहमान ने संयुक्त अरब अमीरात में कॉन्सर्ट किया। इस कॉन्सर्ट में रहमान ने ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे गीत गाए। अब रहमान का ये कॉन्सर्ट और उनकी परफॉर्मेंस चर्चाओं में बनी हुई है। इस बीच फिल्ममेकर शेखर कपूर ने भी रहमान के इस कॉन्सर्ट पर प्रतिक्रिया दी है।
शेखर कपूर ने की पोस्ट
एआर रहमान के संयुक्त अरब अमीरात में हुए कॉन्सर्ट के कई वीडियोज अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं। रहमान के इस कॉन्सर्ट में ‘बैंडिट क्वीन’ और ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी फिल्मों के निर्देशक शेखर कपूर भी शामिल हुए। इसको लेकर शेखर कपूर ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट भी शेयर की। इस पोस्ट में शेखर कपूर ने लिखा, ‘कल रात अबू धाबी के एतिहाद एरीना में एआर रहमान का कितना शानदार कॉन्सर्ट था। हॉल खचाखच भरा हुआ था। 20,000 लोग रहमान के खूबसूरत और भावपूर्ण गानों पर झूम रहे थे, गा रहे थे, नाच रहे थे और यहां तक कि रो भी रहे थे।’
यूजर्स ने शेयर किए वीडियो
शेखर कपूर के अलावा कई और यूजर्स ने भी एआर रहमान के कॉन्सर्ट के वीडियोज साझा किए हैं। साथ ही ये भी बताया कि उन्होंने वहां 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' गाया। एक यूजर ने रहमान के मंच पर ‘वंदे मातरम’ और ‘मां तुझे सलाम’ गाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया है। इसके साथ ही लिखा, ‘मुझे उम्मीद थी कि एआर रहमान आज रात अपने आलोचकों को जवाब देंगे और उन्होंने ऐसा किया। उनका 2024 का अबू धाबी कॉन्सर्ट छैया छैया के साथ समाप्त हुआ था और जब उन्होंने आज रात लगभग 4 घंटे बाद इसे गाया तो मुझे लगा कि यही उनका आखिरी गाना है शो का। लेकिन उन्होंने कहा रुकिए एक आखिरी गाना और फिर उन्होंने और पूरे स्टेडियम ने ‘वंदे मातरम’ गाया।’ एक अन्य प्रशंसक ने रहमान के प्रदर्शन का एक वीडियो पोस्ट किया। इससे पता चला कि उन्होंने मणिरत्नम की फिल्म 'आयुथा एझुथु' के अपने प्रसिद्ध गीत 'जन गण मन' से परफॉर्मेंस की शुरुआत की थी।
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इस वजह से विवादों में आए थे रहमान
एआर रहमान तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में इंडस्ट्री में सांप्रदायिकता और छावा फिल्म को लेकर बात की। उन्होंने कहा था, ‘पिछले आठ वर्षों में शायद क्योंकि सत्ता में बदलाव आया है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है। लेकिन यह मेरे सामने स्पष्ट रूप से नहीं दिखता।’ उन्होंने विभाजनकारी मुद्दों का फायदा उठाने के लिए छावा की आलोचना भी की।