24 जून को अमर उजाला के वैचारिक कार्यक्रम संवाद का आयोजन देहरादून में किया गया है। इस दौरान उत्तराखंड के विकास से लेकर देश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा जारी है। 'सतत विकास' की थीम पर किए गए इस खास आयोजन में खेल, राजनीति, अध्यात्म और मनोरंजन से जुड़ी दिग्गज हस्तियां शामिल हुई हैं।
आप लोगों का मूड बदल देते हैं। जब अपना मूड खराब होता है तो कैसे बेहतर बनाते हैं?
प्रवीन: जब आप क्रिएटिव लोगाें से घिरे होते हैं तो आपका मूड कभी ऑफ ही नहीं होता। इस फील्ड में खुशमिजाज लोग ही मिलते हैं। हमारे अंदर एंटरटेनमेंट के लिए कीड़ा हमेशा से था। सोशल मीडिया हमारे लिए काफी कुछ नया लेकर आया। अब हम वीडियो बनाकर लोगों को एंटरटेन करते हैं।
आज कल बच्चों से भी गलत तरह की रील बनवाई जा रही है। आपको क्या यह सही लगता है?
प्रवीन: ये बात यहां मौजूद किसी को सही नहीं लगेगी पर इंटरनेट की होड़ में यह चल रहा है। मां बाप पागल हो गए हैं कि किसी का बच्चा ये कर रहा है तो मेरा भी करे। पर वो यह नहीं समझ पा रहे कि इसका मनोवैज्ञानिक असर बच्चों पर कितना बुरा हाेगा।
कई कॉमेडियन ऐसा कंटेंट भी क्रिएट कर रहे हैं जो विवादों में आ जाता है। जानना चाहती हूं कि ऐसी स्क्रिप्ट बनाई जाती है या गलती से ऐसा होता है?
प्रवीन: कई बार फ्लो फ्लो में लोग ऐसा कह जाते हैं जो स्क्रिप्ट के बाहर होता है। वहीं बातें कई बार वायरल हो जाती हैं और फिर दिक्कत हो जाती है। बाकी मैं ये मानता हूं कि आपकी खुद की मोरल वैल्यू होनी चाहिए। समय रैना ने एक दिन एक बात कही थी जो मुझे बहुत पसंद हैं। समय ने कहा था- 'मैं खराब हूं। कल अगर मैं कुछ अच्छा कर दूं तो लोग कहेंगे समय ने क्या करत दिया? पर अगर कोई गलती कर दूं तो ट्रोलर्स की लाइन लग जाती है। बाकी सबकी अपनी अपनी पसंद होती है। मैं साफ-सुथरी काॅमेडी पर यकीन करता हूं।'
राघव: मैं आपकी बात से सहमत हूं प्रवीन भाई। ठीक है समझता हूं कि जिम्मेदारी है लोगों को हंसाना पर आप शुरू से ही यह तय कर लो कि आपको अपना कंटेंट कैसा रखना है। बाकी कोई आप पर कुछ थोप नहीं सकता। इसे करना ना करना आपकी अपनी जिम्मेदारी है।
जब लाखों लोग आपको फाॅलो कर रहे हैं तो क्या बतौर कंटेंट क्रिएटर यह आपकी जिम्मेदारी नहीं कि आप क्या पेश कर रहे हैं?
अंकुर: वो आपकी अपनी ऑडियंस पर निर्भर करता है। अगर आपकी ऑडियंस ही वैसी है तो आप वैसा ही कंटेंट देंगे। कई बड़े कंटेंट क्रिएटर्स शुरुआत से यही काम कर रहे हैं। मैं तय करके आया था कि मेरे पैरेंट्स को यह नहीं पसंद तो मैं यह नहीं करूंगा। हमारी अपनी पसंद है और वो उनकी पसंद है। इंटरनेट पर आपको कोई शरीफ नहीं मिलेग। चाहे रील पर ना सही तो वो रियल लाइफ में गाली बकता ही है।
आप बैक बेंचर भी रहे हैं और सेल्समैन भी रहे। आपको जीवन में इतना कॉन्फिडेंस कहां से आया?
प्रवीन: मेरे कॉन्फिडेंस की शुरुआत तब हई थी जब मैं क्रॉकरी बेचा करता था। बतौर सेल्समैन जब मैंने हर तरह के लोगों से बात की तो मेरी घबराहट खत्म हो गई। हां भूलने की परेशानी मुझे काफी है। एक कार्यक्रम में मैं एक महीने पहले ही पहुंच गया था। वहां कोई तैयारी नहीं थी तो देखकर चौंक गया। यह कार्यक्रम भी 24 जून को होना था पर मैंने दोस्तों को 21 जून बता रखा था। खैर ये बाते सुधार रहा हूं अपनी।
आप तीनों के किसी वीडियो में आया सबसे बुरा कमेंट क्या था?
अंकुर: मैं तो डिलीट कर देता हूं। उससे मेरी मानसिक स्थिति ठीक रहती है। वैसे तो हम अच्छा कंटेंट डालते है तो गालियां कम ही मिलती हैं।