बुरे वक्त में आपके साथ कौन खड़ा रहा?
मेरे लिए सबसे बड़ी मिसाल विजय वर्मा हैं। हुड़दंग फिल्म में हम साथ थे। जब मेरे पापा बीमार थे, तो वही एक स्टार थे जिन्होंने मुझसे बात की, मुझे वित्तीय मदद दी। आज तक उन्होंने उस बारे में कभी बात नहीं की। मैं कहता हूं, भाई, आपने मदद की थी। तो हंसकर टाल देते हैं। वो समय बहुत कठिन था। मैं गांव में था, कोविड का माहौल था, पापा कैंसर से जूझ रहे थे। मैंने कभी उनसे मदद मांगी भी नहीं। लेकिन उन्होंने खुद आगे बढ़कर कहा, पापा का ध्यान रखना, अपनी चिंता मत करना।' उनका वो साथ मैं कभी नहीं भूल सकता। इसके अलावा जॉन सर भी थे। उन्होंने पापा की रिपोर्ट्स मंगवाईं, इलाज कराने की कोशिश की। लेकिन जब तक बात पहुंची, देर हो चुकी थी। उस वक्त उनका कहना था, 'मुंबई ले आओ, मैं दिखवा देता हूं।' लेकिन पापा ने खुद कहा कि अब हिम्मत नहीं है जाने की। ऐसे में ये लोग सिर्फ को-स्टार नहीं रहे, बल्कि परिवार जैसे लगे।