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ऐश्वर्या राय: बॉबी देओल की पीठ पर चढ़ने में हिचकिचाईं, निर्देशक को दिया ऐसा जवाब; अपनी छवि को लेकर चिंतित थीं

सार

Aishwarya Rai 53rd Birthday: बॉलीवुड की ब्यूटी क्वीन कही जाने वाली अभिनेत्री ऐश्वर्या राय आज अपना 53वां जन्मदिन मना रही हैं। इस मौके पर पढ़ें उनसे जुड़ा खूबसूरत किस्सा…
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ऐश्वर्या राय का बर्थडे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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1994 में ऐश्वर्या राय बच्चन मिस वर्ल्ड बन चुकी थीं। चारों तरफ उनकी खूबसूरती के चर्चे थे और दुनिया उन्हें एक खास नजर से देख रही थी। इसके तीन साल बाद 1997 में जब उन्होंने फिल्म 'और प्यार हो गया' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा, तो उनके सामने चुनौती सिर्फ अभिनय करने की नहीं, बल्कि मिस वर्ल्ड की छवि से बाहर निकलकर किरदार में ढलने की भी थी।
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ऐश की डेब्यू फिल्म के निर्देशक राहुल रवैल को आज भी वह किस्सा याद है, जब बॉबी देओल की पीठ पर चढ़ने वाले एक सीन को लेकर ऐश्वर्या झिझक गई थीं। अमर उजाला से खास बातचीत में राहुल ने ऐश से जुड़े ऐसे ही कई दिलचस्प किस्से साझा किए। पढ़ें उनकी जुबानी…

फिल्म में कैसे कास्ट हुईं ऐश्वर्या? 
‘सच बात तो यह है कि इस फिल्म की कहानी का आइडिया मुझे रोमा मीरचंदानी ने दिया था और वहीं से इस प्रोजेक्ट की गाड़ी आगे बढ़ी। अगर आज कोई यह कहे कि मैं पहले से ही जानता था कि ऐश्वर्या बहुत बड़ी स्टार बनेगी, तो यह सरासर झूठ होगा। फिल्म इंडस्ट्री में आप किसी से मिलकर सिर्फ यह अंदाज लगा सकते हैं कि उसमें कितना दम है। कभी आपका वह आंकलन सही बैठता है, कभी गलत साबित हो जाता है। मैं ऐश्वर्या से तब मिला था जब वह मिस वर्ल्ड  का ताज अपने नाम कर चुकी थीं। उनसे मिलकर मुझे इतना जरूर समझ आ गया था कि इस लड़की में गजब का आत्मविश्वास है और यह एक्टिंग भी शानदार कर लेगी। बस फिर क्या था? तभी यह पक्का हो गया था कि इस फिल्म में बॉबी देओल के साथ लीड रोल में ऐश्वर्या ही होंगी।'
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'और प्यार हो गया' के एक सीन में ऐश और बाॅबी देओल - फोटो : अमर उजाला
किस सीन पर झिझकी ऐश? 
‘ऐश्वर्या जब सेट पर आईं, तो उनके सिर पर दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला यानी 'मिस वर्ल्ड' का ताज था। वह अपनी इस छवि को लेकर बेहद गंभीर थीं। मुझे सिंगापुर एयरपोर्ट वाला वो वाकया आज भी अच्छे से याद है। हम वहां एक रोमांटिक सीन शूट कर रहे थे, जिसमें उनके किरदार 'आशी' को एकदम बचकाने और नटखट अंदाज में भागकर बॉबी देओल की पीठ पर चढ़ना था।
सीन को समझाते ही ऐश्वर्या ने साफ मना कर दिया और मुझसे बोलीं - 'सर, मैं यह सीन नहीं कर सकती! लोग क्या कहेंगे? एक पूर्व मिस वर्ल्ड से कोई ऐसी बचकानी हरकत की उम्मीद थोड़ी करेगा।' लेकिन बात बस इतनी सी थी कि वो नई थीं और उस इमेज को लेकर थोड़ी कॉन्शियस थीं।’

निर्देशक राहुल रवैल - फोटो : अमर उजाला
लंदन में फैन का चौंकाने वाला कमेंट 
आज ऐश्वर्या की पहचान उनकी खूबसूरती और ग्लोबल स्टारडम से भी जुड़ी है। लेकिन जब वह आपके साथ अपनी पहली हिंदी फिल्म कर रही थीं, तब क्या आपको कभी लगा था कि उनकी खूबसूरती के चर्चे इतने होंगे कि अभिनय की बात पीछे छूट जाएगी?
इस पर राहुल रवैल कहते हैं, 'देखिए, यह बात मन में आई तो जरूर थी कि लोग उनकी खूबसूरती में ही उलझकर रह जाएंगे। लेकिन इसका असली अहसास मुझे तब हुआ, जब फिल्म रिलीज हुई और मैं लंदन में था। वहां एक परिवार मिला, जिसमें एक लड़का भी था। उसने मुझसे कहा, सर, मैंने आपकी फिल्म देखी। मुझे बहुत अच्छी लगी। मैंने उससे पूछा कि ऐश्वर्या कैसी लगीं? इस पर उसने कहा, वह बहुत सुंदर हैं, एक्टिंग भी अच्छी की है। लेकिन सच कहूं, वह मुझे अपनी बहन जैसी लगती हैं। वह मेरी गर्लफ्रेंड नहीं बन सकतीं।'
राहुल कहते हैं, 'उस लड़के की बात सुनकर मुझे उस दौर के फिल्मकारों की सोच याद आई। हमारे पापा और उस जमाने के बड़े फिल्ममेकर हमेशा कहते थे कि पर्दे पर हीरोइन में थोड़ी चुलबुली और नटखट अपील होनी चाहिए। ऐश्वर्या की खूबसूरती और उनकी शालीनता अपनी जगह थी, लेकिन दर्शक उनसे किस तरह जुड़ेंगे, यह भी एक अहम बात थी।'

ऐश्वर्या राय - फोटो : अमर उजाला
‘वह बस खूबसूरती और डांस तक सीमित नहीं’
अक्सर ऐश्वर्या की खूबसूरती और उनके डांस की चर्चा ज्यादा होती है। क्या आपको लगता है कि इस वजह से उनकी अभिनय क्षमता पर उतनी बात नहीं होती, जितनी होनी चाहिए?
इस सवाल के जवाब में राहुल रवैल कहते हैं, 'मैं इस सोच से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखता कि ऐश्वर्या की पहचान सिर्फ उनकी खूबसूरती या डांस तक सीमित है। ऐसा कहना उनके साथ नाइंसाफी होगी। वह बहुत अच्छी अभिनेत्री हैं, शानदार परफॉर्मर हैं और डांसर भी अच्छी हैं। उनकी कोई खास फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं थी, लेकिन उनकी सहजता और मेहनत गजब की थी।
मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जो इंसान अपनी बात अच्छी तरह रख सकता है, लोगों से सही ढंग से संवाद कर सकता है, उसमें एक अच्छा कलाकार बनने की भी संभावना होती है। ऐश्वर्या में यह खूबी थी। निर्देशक कोई जादूगर नहीं होता, जो कलाकार से कुछ भी करवा ले। कलाकार के अंदर बुनियादी खूबियां होनी चाहिए। निर्देशक तो बस उन्हें निखारने में मदद करता है।’

'करियर में समझदारी से फिल्में चुनीं' 
आगे रवैल ने कहा, ‘आज जब मैं संजय लीला भंसाली की 'हम दिल दे चुके सनम' या मणिरत्नम की 'पोन्नियिन सेल्वन' जैसी फिल्मों में ऐश्वर्या को देखता हूं तो उनकी एक्टिंग देखकर सचमुच बहुत गर्व महसूस होता है। सच कहूं तो मैंने कभी उनके पास दोबारा किसी नए प्रोजेक्ट के साथ जाने की कोशिश नहीं की और इसके पीछे कोई खास वजह नहीं थी। लेकिन साल 1997 में ही मुझे इस बात का पूरा अंदाजा हो गया था कि ये लड़की बहुत लंबी पारी खेलने वाली है, क्योंकि वह सेट पर हर बात को बहुत जल्दी और बहुत अच्छे से पकड़ती थी। उन्होंने हमेशा अपने करियर में बहुत समझदारी से सही फिल्में चुनी हैं और आज वो जहां भी हैं, अपनी मेहनत के दम पर हैं।
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ऐश्वर्या राय बच्चन - फोटो : इंस्टाग्राम@aishwaryaraibachchan_arb
'ग्लोबल स्टार बनीं पर व्यवहार नहीं बदला' 
आज ऐश्वर्या दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुकी हैं, लेकिन राहुल रवैल के मुताबिक, उनके व्यवहार में आज भी वही सादगी और तहजीब है। वह कहते हैं, 'नया कलाकार जब सेट पर आता है, तो उसे बहुत कुछ सीखना पड़ता है। ऐश्वर्या की सबसे अच्छी बात यह थी कि वह हर बात ध्यान से सुनती थीं और समझने की कोशिश करती थीं। उनके साथ कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने मेरी बात न मानी हो या निर्देशों को गंभीरता से न लिया हो।' 
अंत में राहुल ने कहा, 'आज इतने साल बीत चुके हैं। कई बार तो मुझे खुद अपने नाम याद नहीं रहते, लेकिन जब भी ऐश्वर्या मिलती हैं, तो उतने ही अदब और तहजीब से मिलती हैं। उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। मेरे लिए तो वह आज भी वही ऐश्वर्या हैं, जिन्होंने हमारे साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी।'
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