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बचपन में पिता के दोस्त ने की गलत हरकत, वर्षों तक रहा इसका असर; खुद को ऐसे सुरक्षित रखती थीं अदिति गोवित्रिकर

Mon, 26 Jan 2026 10:01 AM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Aditi Govitrikar: अदिति गोवित्रिकर ने बताया है कि उनके साथ बचपन में किस तरह चीजें गलत हुईं। इनका असर उनकी बाकी जिंदगी पर पड़ा। उन्होंने बताया है कि सुरक्षा के लिए उन्होंने क्या किया?
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अदिति गोवित्रिकर - फोटो : इंस्टाग्राम@aditigovitrikar
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विस्तार
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अभिनेत्री अदिति गोवित्रिकर ने बहुत ही कम उम्र में बुरे अनुभवों का सामना करने के बारे में खुलकर बात की है। साल 2001 में मिसेज वर्ल्ड का टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला अदिति गोवित्रीकर ने बचपन के ट्रॉमा और कैसे उन पलों ने उनकी सोच और हिम्मत को आकार दिया, इस बारे में बात की।
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करीबी ने की हरकत
अदिति के मुताबिक उनके साथ सबसे बुरा अनुभव बड़े शहर मुंबई में नहीं, बल्कि पनवेल में हुआ। 51 साल की अदिति ने हॉटरफ्लाई को बताया, 'ईमानदारी से कहूं तो अगर आप मुझसे सुरक्षा के मामले में पूछें, तो मुझे असल में पनवेल में ज्यादा परेशान करने वाली घटनाओं का सामना करना पड़ा। मुझे वहां कुछ बुरे अनुभव हुए। उन्हें समझने में ही मुझे बहुत लंबा समय लगा। बड़े होने तक मैंने उनके बारे में बात नहीं की। मैं मुश्किल से छह या सात साल की थी। अपराधियों में से एक मेरे पिता का दोस्त था, जबकि दूसरी घटना में एक अनजान व्यक्ति था।'


कैसे खुद को सुरक्षित रखती थीं अभिनेत्री
पनवेल वैसे तो काफी सुरक्षित था लेकिन जब अदिति मुंबई गईं तो उन्हें उनके साथ हुए पुराने अनुभव याद आ रहे थे इसलिए वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं। उन्होंने कहा 'मैं 12वीं में क्लासेस के लिए दादर आती थी। उस समय, लोकल ट्रेन मेरे लिए विकल्प नहीं था, इसलिए मैं बस से सफर करती थी।' उन्होंने बताया कि सफर करते वक्त 'मेरे पास दोनों तरफ बड़े बैग होते थे। उनके अंदर, मैं किताबें रखती थी और उन्हें ढाल की तरह पकड़ती थी। यह मेरी सुरक्षा थी। अगर मुझे सीट मिल जाती थी, तो मैं दोनों तरफ एक-एक बैग रख देती थी ताकि कोई मुझे छू न सके।'


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15 साल के बाद बात की
कई महिलाओं की कही बात को दोहराते हुए, अदिति ने इस बात पर सहमति जताई कि दुर्व्यवहार अक्सर जाने-पहचाने लोगों से ही होता है। उन्होंने कहा 'हां, बिल्कुल। मेरे मामले में, एक घटना में परिवार का कोई जाना-पहचाना व्यक्ति शामिल था।' अदिति ने बताया कि इन अनुभवों के बारे में खुलकर बात करने में उन्हें करीब 15 साल लग गए। बातचीत अपने आप शुरू हुई जब दोस्तों ने अपनी कहानियां शेयर करना शुरू किया।

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