'लीड एक्ट्रेस थी, पर मेरी नहीं चलती थी'
जीनत अमान ने दौर में इंडस्ट्री में काम करने के बारे में बात करते हुए बताया कि सेट पर ज्यादातर पुरुषों का ही बोलबाला होता था। अपने हेयरड्रेसर के अलावा, अक्सर वही एकमात्र महिला होती थीं। लीड एक्ट्रेस होने के बावजूद उन्होंने कहा कि अपने किरदारों को गढ़ने या उन्हें दिखाने के तरीके में उनकी बहुत कम चलती थी, क्योंकि ध्यान ज्यादातर उनके लुक पर ही रहता था। जीनत अमान के मुताबिक, किसी को भी मेरे दिमागी काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्हें तो बस इसमें दिलचस्पी थी कि ये गाएगी,, नाचेगी, दो डायलॉग बोलेगी, बारिश में भीगेगी।
ग्लोबल ट्रेंड्स ने स्टाइल पर असर डाला
जीनत ने अपने फैशन सेंस और इस बारे में भी बात की कि कैसे अमेरिका से भारत लौटने के बाद ग्लोबल ट्रेंड्स ने उनके स्टाइल पर असर डाला। उन्होंने कहा कि कॉस्ट्यूम डिजाइन का काम अक्सर भानु अथैया जैसे मशहूर डिजाइनरों के साथ मिलकर किया जाता था। हालांकि, उन्होंने बताया कि अक्सर उनके अपने सुझाव फिल्ममेकर्स की चाहत के मुकाबले ज्यादा संयमित होते थे। जीनत अमान ने इंडस्ट्री में असमान वेतन के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि इस अंतर की वजह पितृसत्तात्मक व्यवस्था में छिपी है।
असमान वेतन पर क्या बोलीं जीनत?
अभिनेत्री के मुताबिक, कमर्शियल सिनेमा में आर्थिक फैसले पारंपरिक रूप से पुरुषों के हाथ में रहे हैं। इससे जेंडर पे गैप की समस्या पैदा हुई है। अभिनेत्री ने कहा, 'सच कहूं तो, मुझे लगता है कि ज्यादातर आर्थिक ताकत पुरुषों के हाथ में है। पैसे-कौड़ी का काम पुरुष ही संभालते हैं और हमारा समाज आज भी पुरुष-प्रधान है। कमर्शियल सिनेमा भी इसी बात को ध्यान में रखकर फिल्में बनाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि इंडस्ट्री ने पिछले कुछ समय में थोड़ी तरक्की की है, लेकिन बदलाव बहुत धीरे-धीरे आया है।