'समझ सकती हूं एक परिवार में क्या-क्या बदलाव आते हैं'
निमरत कौर का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो हुआ वह बहुत ही दुखद था। उन्होंने वह मंजर करीब से देखा है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में निमरत ने कहा, 'पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसे हमने करीब से देखा। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। मैं एक शहीद की बेटी हूं और मैंने 1994 में कश्मीर में अपने पिता को खो दिया था। मैं अच्छी तरह समझ सकती हूं कि एक परिवार में क्या-क्या बदलाव आते हैं'।
बोलीं- 'आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए'
निमरत ने आगे कहा 'ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सरकार और सशस्त्र बलों ने कल रात पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर चलाया। मैं इस ऑपरेशन का पूरा समर्थन करती हूं। इस दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिंदगियां बर्बाद हो जाती हैं। शांतिपूर्वक तरीके से लोग जहां छुट्टियां मनाने गए, वहां ऐसी दुखद घटना हुई। हमारा एक ही मकसद है कि ऐसी दुखद घटनाएं न हों'।
1994 में कश्मीर में शहीद हुए निमरत के पिता
निमरत कौर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने आतंक के खिलाफ भारतीय सेना के एक्शन पर प्रतक्रिया देते हुए लिखा, 'हम हमारी सेना के साथ हैं। एक देश। एक मिशन। जय हिंद। आपरेशन सिंदूर'। बता दें कि निमरत कौर के पिता मेजर भूपिंदर सिंह थे। वे भारतीय सेना में अधिकारी थे और 1994 में कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।