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A K Hangal Death Anniversary: स्वतंत्रता सेनानी थे रहीम चचा, 50 की उम्र के बाद फिल्मी दुनिया में किया था आगाज

Mon, 26 Aug 2024 07:00 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

ए के हंगल के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने 50 साल की उम्र में फिल्म 'तीसरी कसम' से अपने करियर की शुरुआत की थी। इससे पहले तक वे स्टेज शो करते थे।
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ए के हंगल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रहीम चाचा! अगर आपने फिल्म 'शोले' देखी है तो रहीम चाचा से तो परिचित होंगे? और अगर सिनेमा में दिलचस्पी है तो 'शोले' आपने जरूर देखी होगी। इस फिल्म के तमाम डायलॉग और किरदार खूब लोकप्रिय हुए और आज तक हैं। इन्हीं में एक किरदार रहीम चाचा का था, जो एक्टर ए के हंगल ने अदा किया था। फिल्म में उनका डायलॉग- 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई '? खूब फेमस हुआ। आज उन्हीं ए के हंगल की डेथ एनिवर्सरी है। आइए जानते हैं उनके बारे में...

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शुरुआत से थी अभिनय में दिलचस्पी
अभिनेता का जन्म 01 फरवरी 1914 को मौजूदा पाकिस्तान के सियालकोट पंजाब में हुआ था। एके हंगल का पूरा नाम अवतार किशन हंगल था। उन्होंने पूरा बचपन पेशावर में बिताया। वह एक कश्मीरी पंडित परिवार से थे। एके हंगल ने अपनी पत्नी के निधन के बाद अपने बेटे की अकेले ही परवरिश की थी। हंगल साहब 18 वर्ष के थे, जब उन्होंने नाटकों में अभिनय करने की शुरुआत की थी। उन्होंने 1936 से 1965 तक स्टेज अभिनय भी किया था। ए के हंगल ने 50 की उम्र के बाद फिल्मों में काम करना शुरू किया था।

दर्जी के रूप में भी किया था काम
ए के हंगल ने अभिनय में अपने करियर की शुरुआत से पहले बतौर दर्जी भी काम किया।  उन्होंने यह पेशा किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि शौकिया तौर पर चुना था। इसका जिक्र एक्टर की आत्मकथा 'लाइफ एण्ड टाइम्स ऑफ ए.के. हंगल' में है। इसके मुताबिक ए के हंगल के पिता के एक करीबी मित्र ने उन्हें स्वतंत्र रूप से अपनी आजीविका चलाने के लिए दर्जी बनने का सुझाव दिया था। दर्जी का काम सीखने के लिए उन्हें खूब मेहनत करनी पड़ी थी, क्योंकि उन्हें एक बटन तक टांकना नहीं आता था। उन्होंने इंग्लैंड के प्रशिक्षित दर्जी से दर्जीगिरी सीखी थी।

स्वतंत्रता सेनानी थे अभिनेता
हिंदुस्तान के बंटवारे बाद 1949 में ए के हंगल मुंबई आ गए थे। एके हंगल एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे और उन्होंने साल 1929 से 1947 के बीच में देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। इसी दौरान उन्हें कराची की जेल में तीन साल बिताने पड़े थे। इसके बाद जब वह जेल से बाहर आए और उसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई शिफ्ट हो गए थे। उसके बाद उन्होंने अभिनय की शुरुआत की। उन्हें एक्टिंग का शुरू से ही शौक था।
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'तीसरी कसम' से शुरू किया था अभिनय
एके हंगल के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने 50 साल की उम्र में फिल्म 'तीसरी कसम' से अपने करियर की शुरुआत की थी। इससे पहले तक वे स्टेज शो करते थे। 50 साल से ज्यादा की उम्र होने के कारण उन्होंने बड़े बुजुर्ग के किरदार मिला करते थे, जिसमें उन्होंने अपने अभिनय से जान डाल दी थी। फिल्म 'शोले' के रहीम चाचा अपने अनूठे अंदाज और बेहतरीन अभिनय के लिए याद किए जाते हैं। एके हंगल की यादगार फिल्मों में 'नमक हराम', 'शोले', 'बावर्ची', 'छुपा रुस्तम', 'अभिमान', 'शौकीन' और 'गुड्डी' शामिल हैं। 
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200 से अधिक फिल्मों में किया था काम
एके हंगल ने चार दशक से अधिक के करियर में लगभग 225 फिल्मों में काम किया। आखिरी बार वह टीवी शो 'मधुबाला' में भी नजर आए थे। आखिरी वक्त में ए के हंगल की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था, जब उनके पास दवाई खरीदने तक के पैसे नहीं थे। तब कई सितारों ने उनकी मदद की थी।  अभिनेता ने 26 अगस्त 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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