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सीट का समीकरण: सपा के गढ़ में 2017 में पहली बार खिला था कमल, कभी सीएम रहते गुन्नौर से विधायक बने थे मुलायम

Thu, 03 Sep 2026 02:20 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

संभल जिले की गुन्नौर विधानसभा सीट प्रदेश की चर्चित सीटों में रह चुकी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव दो बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था। पिछले तीन चुनावों की बात करें तो 2012 में यहां से सपा तो 2017 में भाजपा को जीत मिली थी। पिछले चुनाव में सपा ने दोबारा ये सीट भाजपा से छीन ली थी। 

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गुन्नौर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। भले ही मतदान में अभी समय हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल साफ दिखाई देने लगी है। राजनीतिक दल संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के सहारे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा जहां अपनी सरकार को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए नए समीकरण बनाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में अपनी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात संभल जिले की गुन्नौर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं संभल जिले की गुन्नौर सीट  के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन 75 जिलों में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं जिलों में से एक जिला संभल है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें असमौली, चंदौसी, गुन्नौर और संभल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम गुन्नौर विधानसभा सीट की बात करेंगे। गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र का गठन साल 1957 में हुआ और यहां पहला विधानसभा चुनाव 1957 में ही आयोजित किया गया था। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में विभाजित था। शुरुआती दशकों में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनसंघ और जनता पार्टी का प्रभाव रहा।

गुन्नौर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी यादव मतदाताओं की है, जो लगभग 45% हैं। इसके बाद मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 14% और जाटव मतदाताओं की संख्या लगभग 11% है। वहीं, वैश्य समाज के मतदाता करीब 5% हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं। इस क्षेत्र में यादव मतदाता सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

गुन्नौर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
गुन्नौर विधानसभा के पहले यानी कि1957 के विधानसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के जमुना सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के करण सिंह को 3,354 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जमुना सिंह को 14,361 वोट मिले, जबकि करण सिंह को 11,007 वोट मिले। वहीं 1952 के पहले चुनाव में करण सिंह गुन्नौर नॉर्थ (उत्तर) से विधायक चुने गए थे।

1962: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने दोहराई जीत
1962 के विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के जुगल किशोर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के करण सिंह को 583 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जुगल किशोर को 11,654 वोट मिले, जबकि करण सिंह को 11,071 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1967: गुन्नौर विधानसभा सीट पर पहली बार जीती कांग्रेस
1962 के बाद राज्य में 1967 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जुगल किशोर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) के राजपाल सिंह को 886 वोटों के अंतर से हराया।

1969: भारतीय जनसंघ ने कांग्रेस से छीनी सीट
इसके बाद 1969 के विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें भारतीय जनसंघ के ऋषिपाल सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के जुगल किशोर को महज 328 वोटों के अंतर से हराया।

1974: गुन्नौर में पहली बार जीती भारतीय क्रांति दल
वहीं 1974 के चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के जुगल किशोर विजयी हुए। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (खोबरागड़े) के ऋषिपाल सिंह को 19,831 वोटों के अंतर से हराया।

आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।

1977 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने मारी बाजी
इस के विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार शेओराज सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जुगल किशोर को 23,892 वोटों के अंतर से हराया।

हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

1979: उप-चुनाव में जीती जनता पार्टी
1977 के विधानसभा चुनाव के बाद आए क्षेत्रीय राजनीतिक बदलावों के बीच तत्कालीन विधायक शेओराज सिंह के निधन से यह सीट खाली हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप यहां उपचुनाव कराया गया, जिसमें जनता पार्टी की उम्मीदवार प्रेमवती विजयी रहीं।

1980 के विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर प्रेमवती विजयी हुईं। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर राजनारायण) के उम्मीदवार जुगल किशोर को 6,366 वोटों के अंतर से हराया।

1985: गुन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की हुई वापसी
1985 के विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार पुष्पा देवी विजयी हुईं। उन्होंने जनता पार्टी के नवरंगी सिंह को 2,271 वोटों के अंतर से हराया।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1989: कांग्रेस ने दोहराई जीत
वहीं 1989 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की पुष्पा देवी विजयी हुईं। उन्होंने जनता दल (JD) के रामखिलाड़ी को 6,846 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पुष्पा देवी को 17,628 वोट मिले, जबकि रामखिलाड़ी को 10,782 वोट मिले।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में गुन्नौर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991 में पहली बार जीता जनता दल
इस विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) के रामखिलाड़ी विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी की प्रेमवती को 7,783 वोटों के अंतर से हराया।

1993: गुन्नौर में पहली बार जीती सपा
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के रामखिलाड़ी को 3,817 वोटों के अंतर से हराया।

1996: गुन्नोर सीट पर जनता दल की हुई वापसी
वहीं, 1996 के विधानसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर जनता दल के रामखिलाड़ी विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अजीत कुमार को 20,247 वोटों के भारी अंतर से हराया।

1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की गुन्नौर विधानसभा सीट पर जनता दल (यूनाइटेड) के अजीत कुमार उर्फ अज्जू यादव विजयी हुए। उन्होंने सपा के रामखिलाड़ी को 5,181 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अजीत कुमार को 46,998 वोट मिले, जबकि रामखिलाड़ी को 41,817 वोट मिले।

2004 में हुआ उपचुनाव मुलायम सिंह यादव को मिली जीत
2002 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से जनता दल (यूनाइटेड) के अजीत कुमार (उर्फ राजू यादव) चुनाव जीते थे। अगस्त 2003 में मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उस समय वे संसद सदस्य थे और मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उनका 6 महीने के भीतर उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य बनना अनिवार्य था।  इसके चलते मुलायम सिंह यादव के लिए तत्कालीन विधायक अजीत कुमार ने गुन्नौर सीट से अपना इस्तीफा दे दिया। सीट खाली होने के कारण यहां जनवरी 2004 में उप-चुनाव कराया गया। इस उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने जीत हासिल की। उन्होंने रिकॉर्ड वोटों के अंतर से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को हराया था।  

2007: सपा मुखिया दूसरी बार जीते 
इस विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की गुन्नौर विधानसभा सीट पर उस वक्त समाजवादी पार्टी के प्रमुख  मुलायम सिंह यादव विजयी हुए। उन्होंने बसपा के आरिफ अली को 31,647 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मुलायम सिंह यादव को 54,696 वोट मिले, जबकि आरिफ अली को 23,049 वोटों से संतोष करना पड़ा।

2007 का उपचुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव दो सीटों गुन्नौर और भोंगांव से चुनाव लड़े और दोनों से जीत गए। एक व्यक्ति दो विधानसभा सीटों पर एक साथ विधायक नहीं रह सकता, इसलिए उन्होंने गुन्नौर सीट बरकरार रखी, लेकिन बाद में उन्होंने गुन्नौर सीट से त्यागपत्र दे दिया। इसके चलते यहां उपचुनाव हुए। चुनाव में  समाजवादी पार्टी के प्रदीप कुमार (उर्फ गुड्डू यादव) विजयी हुए।  
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012: सपा ने लगातार चौथी बार जीती गुन्नौर सीट
2012 के विधानसभा चुनाव में संभल जिले की गुन्नौर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामखिलाड़ी सिंह यादव विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अजीत उर्फ राजू यादव को 46,658 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में सपा के रामखिलाड़ी सिंह को 1,07,378 वोट मिले, जबकि अजीत यादव को 60,720 वोट मिले।

2017: गुन्नौर सीट पर पहली बार जीती भाजपा
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में गुन्नौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अजीत कुमार उर्फ राजू यादव विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के रामखिलाड़ी सिंह को 11,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अजीत कुमार उर्फ राजू यादव को 1,07,344 वोट मिले, जबकि रामखिलाड़ी सिंह को 95,958 वोट मिले।

2022 के चुनाव में सपा ने की वापसी
इस विधानसभा चुनाव में संभल जिले की गुन्नौर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के रामखिलाड़ी सिंह यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अजीत कुमार उर्फ राजू यादव को 29,529 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामखिलाड़ी सिंह यादव को 1,23,969 वोट मिले, जबकि अजीत कुमार उर्फ राजू यादव को 94,440 वोट मिले।
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