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सीट का समीकरण: हंडिया में अब तक सिर्फ एक बार जीती भाजपा, बीते पांच में से तीन चुनाव सपा तो दो रहे बसपा के नाम

Tue, 20 Oct 2026 11:04 AM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

प्रयागराज की हंडिया विधानसभा सीट साल 1967 में अस्तित्व में आई थी। यहां के पहले चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद के चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस, जनता दल, बसपा, भाजपा और सपा सहित कई दलों ने समय-समय पर जीत हासिल की। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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हंडिया सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात प्रयागराज जिले की हंडिया विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं हंडिया विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला प्रयागराज है। जिले में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा, करछना, इलाहाबाद पश्चिम, इलाहाबाद उत्तर, इलाहाबाद दक्षिण, बारा और कोरांव शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम प्रयागराज जिले की हंडिया विधानसभा सीट की बात करेंगे। प्रयागराज जनपद की हंडिया विधानसभा सीट साल 1967 में अस्तित्व में आई थी। यहां पहला चुनाव साल 1967 में हुआ था। यहां के पहले विधायक अथई राम बने थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी। इससे पहले यह विधानसभा अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई थी।

इस विधानसभा सीट पर पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में हाकिम लाल बिंद विजयी हुए थे। उन्होंने सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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हंडिया विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

हंडिया के पहले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने मारी बाजी
हंडिया विधानसभा के पहले यानी कि 1967 के चुनाव में हंडिया विधानसभा सीट से निर्दलीय अथई राम (A. Ram) विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के आर.एल. शुक्ल (R.L. Shukul) को 454 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अथई राम को 16,806 वोट, जबकि आर.एल. शुक्ल को 16,352 वोट मिले।

हंडिया विधानसभा सीट पर हुई संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की एंट्री
वहीं 1969 के यूपी विधानसभा चुनाव में प्रयागराज की हंडिया विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) ने जीत दर्ज की। चुनाव में SSP के रजित राम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के अथई राम को 1,544 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रजित राम को 17,012 वोट, जबकि अथई राम को 15,468 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1974 के चुनाव में हंडिया में पहली बार जीती भारतीय क्रांति दल
इस चुनाव में हंडिया में पहली बार भारतीय क्रांति दल (BKD) ने जीत दर्ज की। चुनाव में BKD के अथई राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राजित राम पांडेय को 1,230 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अथई राम को 16,777 वोट, जबकि राजित राम पांडेय को 15,547 वोट मिले।

आपातकाल का समय 
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
आपातकाल खत्म होने के बाद राज्य में 1977 के चुनाव हुए। इन चुनावों में एक बार फिर सीट का समीकरण बदला। इस बार के चुनाव में जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ते हुए अथई राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी को 2,625 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अथई राम को 25,001 वोट, जबकि राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी को 22,376 वोट मिले।

हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

कांग्रेस में पड़ी फूट
इस बीच 1978 में कांग्रेस में फूट पड़ गई। इससे दो राजनीतिक गुट INC(U) और INC(I) सामने आए, जिन्हें क्रमशः इंडियन नेशनल कांग्रेस (अर्स) और इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) कहा जाता है। एक गुट का नेतृत्व देवराज अर्स कर रहे थे, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थीं। हालांकि, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाला मुख्य धड़ा बाद में आधिकारिक कांग्रेस बना।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
हंडिया में पहली बार जीती कांग्रेस
इस सबके बीच साल 1980 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार हंडिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस की जीत हुई। चुनाव में कांग्रेस (आई) के रानेंद्र त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के राम रेखा निशंक को 3,990 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रानेंद्र त्रिपाठी को 27,542 वोट, जबकि राम रेखा निशंक को 23,552 वोट मिले।

1980 के बाद 1985 के चुनाव हुए। इस चुनाव में हंडिया सीट पर जनता पार्टी ने वापसी की। चुनाव में हंडिया विधानसभा सीट से जनता पार्टी (JNP) के राकेश धर त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र त्रिपाठी को 14,212 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राकेश धर त्रिपाठी को 34,646 वोट, जबकि राजेंद्र त्रिपाठी को 20,434 वोट मिले।

हंडिया में जीती जनता दल
इसके बाद 1989 के चुनाव में पहली बार सीट पर जनता दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में हंडिया विधानसभा सीट से जनता दल के राकेश धर त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अमर बहादुर भारती को 20,049 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में राकेश धर त्रिपाठी को 47,639 वोट, जबकि अमर बहादुर भारती को 27,590 वोट मिले।

इस चुनाव के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में हंडिया विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

जनता दल ने दोहराई जीत
1991 के चुनाव में जनता दल ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में बृजभान यादव विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शीतला प्रसाद बिंद को 16,230 वोटों के अंतर से हराया।

1993: हंडिया से पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में हंडिया से पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के जोखू लाल यादव विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय राकेश धर त्रिपाठी को 29,777 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

हंड़िया सीट में भाजपा की हुई एंट्री
इसके बाद 1996 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के राकेश धर त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बेनी माधव बिंद को 8,695 वोटों के अंतर से हराया।

हंडिया सीट पर पहली बार जीती सपा
इन चुनावों के बाद राज्य में 2002 के चुनाव हुए। इन चुनावों में हंडिया से पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के महेश नारायण सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राकेश धर त्रिपाठी को 27,315 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में महेश नारायण सिंह को 73,074 वोट, जबकि राकेश धर त्रिपाठी को 45,759 वोट मिले।

बसपा की हुई वापसी
2007 के चुनाव की बात करें तो 1993 के बाद सीट पर बसपा ने वापसी की। चुनाव में प्रयागराज की हंडिया विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राकेश धर त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के महेश नारायण सिंह को 1,342 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राकेश धर त्रिपाठी को 62,151 वोट, जबकि महेश नारायण सिंह को 60,809 वोट मिले।

2012: सपा ने की वापसी
वहीं 2012 के चुनाव की बात करें तो चुनाव में सपा ने वापसी की। चुनाव में महेश नारायण सिंह विजयी हुए। उन्होंने प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के डॉ. राकेशधर त्रिपाठी को 45,379 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महेश नारायण सिंह को 88,475 वोट, जबकि डॉ. राकेशधर त्रिपाठी को 43,096 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के राममिलन यादव 31,930 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2013 में हुआ उपचुनाव
इसके बाद हंडिया विधानसभा सीट पर साल 2013 में उपचुनाव हुआ था। यह उपचुनाव तत्कालीन समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक महेश नारायण सिंह के निधन के कारण खाली हुई सीट पर हुआ था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत सिंह ने जीत दर्ज कर इस सीट को सपा के पास बरकरार रखा था।

2017: बसपा की लहर में सपा ने मारी बाजी
2013 के उपचुनाव के बाद हंड़िया में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में बसपा ने एक बार फिर इस सीट पर जीत दर्ज की। यहां से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के हाकिम लाल विजयी हुए। उन्होंने अपना दल (सोनेलाल) की प्रमिला त्रिपाठी को 8,526 वोटों के अंतर से हराया। हाकिम लाल को 72,446 वोट, जबकि प्रमिला त्रिपाठी को 63,920 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी की निधि यादव 55,403 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।  

2022: हंड़िया सीट पर सपा ने फिर की वापसी
इस चुनाव में हंडिया विधानसभा सीट पर सपा ने एक भार फिर वापसी की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के हाकिम लाल बिंद विजयी हुए। उन्होंने निषाद पार्टी के प्रशांत कुमार सिंह राहुल को 3,543 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाकिम लाल बिंद को 84,417 वोट, जबकि प्रशांत कुमार सिंह राहुल को 80,874 वोट मिले।
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