उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास कई उतार-चढ़ाव और बदलावों का गवाह रहा है। यहां शुरुआती दौर में द्विसदस्यीय चुनाव हुए थे, जिसके बाद यह सीट कुछ समय के लिए समाप्त हो गई और 2012 के परिसीमन के बाद यह नए स्वरूप में वापस लौटी। आइए इस सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास।
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पहले जानते हैं मुरादाबाद जिले की सीटों के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मुरादाबाद है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- ठाकुरद्वारा, कांठ, बिलारी, मुरादाबाद शहर, मुरादाबाद ग्रामीण और कुंदरकी शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट की बात करेंगे। मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। बिलारी विधानसभा के पहले विधायक कांग्रेस के मही लाल और हर सहाय निर्वाचित हुए थे। क्योंकि उस समय यह सीट एक द्विसदस्यीय सीट थी। 1957 के चुनाव में भी यह सीट दो-सदस्यीय सीट थी और कांग्रेस के जगदीश नारायण तथा मही लाल ने यहां से जीत हासिल की। 1962 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के हेत राम विजयी हुए। इसके बाद यह निर्वाचन क्षेत्र समाप्त हो गया और परिसीमन के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में नए स्वरूप में फिर अस्तित्व में आया।
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मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां के कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 30% हैं। इसके बाद जाटव और अन्य अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के मतदाता करीब 24% हिस्सेदारी रखते हैं। वहीं, यादव समाज के मतदाता लगभग 11%, जाट मतदाता करीब 6%, ठाकुर मतदाता 4% और ब्राह्मण मतदाता लगभग 2% हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों के हैं।
बिलारी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरूआत
1952 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट दो-सदस्यीय निर्वाचन सीट थी। इस सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मही लाल और हर सहाय विजयी हुए थे। वहीं 1957 के विधानसभा चुनाव में भी मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट दो-सदस्यीय विधानसभा सीट थी। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के जगदीश नारायण और मही लाल दोनों विजयी हुए।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीता चुनाव
1962 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के हेत राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मही लाल को 1,874 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हेत राम को 13,319 वोट मिले, जबकि मही लाल को 11,445 वोट मिले।
1962 के बाद मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया था, जिसे 2008 के परिसीमन के बाद 2012 के चुनाव में यहां फिर से चुनाव हुए।
2012: सपा ने जीता चुनाव
इस चुनाव की बात करें तो बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के मोहम्मद इरफान विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के लखन सिंह सैनी को 1,540 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद इरफान को 55,694 वोट मिले, जबकि लखन सिंह सैनी को 54,154 वोट मिले।
2016 में हुआ उपचुनाव: सपा ने दोहराई जीत
2012 में विधायक बने मोहम्मद इरफान के निधन के बाद बिलारी विधानसभा सीट पर 2016 में उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में मोहम्मद फहीम ने सपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के सुरेश सैनी को 7,093 वोटों के अंतर से हराया।
2017: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के मोहम्मद फहीम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सुरेश सैनी को 13,441 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद फहीम को 85,682 वोट मिले, जबकि सुरेश सैनी को 72,241 वोट मिले।
2022: सपा ने मारा जीत का चौका
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के मोहम्मद फहीम इरफान लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के परमेश्वर लाल सैनी को 7,610 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद फहीम इरफान को 95,338 वोट मिले, जबकि परमेश्वर लाल सैनी को 87,728 वोट मिले। वहीं सपा अनिल कुमार 42,411 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।