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सीट का समीकरण: 2022 में यहां केशव मौर्य को हरा जायंट किलर बनीं सपा की पल्लवी, ऐसा है सिराथू का चुनावी इतिहास

Thu, 29 Oct 2026 05:50 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

  • कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई।
  • यहां कांग्रेस, जनता दल, बसपा, भाजपा और सपा के उम्मीदवार अलग-अलग चुनावों में जीत दर्ज कर चुके हैं।
  • 2022 में सपा की डॉ. पल्लवी पटेल ने भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य को 7,337 वोटों से हराया था।
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सिराथू सीट का समीकरण - फोटो : सिराथू सीट का समीकरण
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं होता, बल्कि हर नतीजे के पीछे एक बड़ी राजनीतिक कहानी छिपी होती है। कौशांबी की सिराथू विधानसभा सीट भी इसी सूची में आती है। सिराथू ने पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की सियासत के केंद्र में अपनी अलग जगह बना ली है। वजह है इस सीट पर हुए ऐसे चुनावी मुकाबले, जिनकी चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में हुई।

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सिराथू का नाम आते ही सबसे पहले 2022 का विधानसभा चुनाव याद आता है। मैदान में प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य थे और उनके सामने समाजवादी पार्टी के टिकट पर डॉ. पल्लवी पटेल थीं। नतीजे आए तो मुकाबले की तस्वीर ने सबको चौंका दिया। डॉ. पल्लवी पटेल ने केशव प्रसाद मौर्य को शिकस्त देकर इस सीट की सियासी कहानी में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इससे पहले 2012 में भी केशव प्रसाद मौर्य इसी सीट से चुनाव मैदान में उतर चुके थे और जीत भी दर्ज की थी।

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कौन हैं डॉ. पल्लवी पटेल?
डॉ. पल्लवी पटेल उत्तर प्रदेश की अपना दल (कमेरावादी) की उपाध्यक्ष हैं। उनके पिता डॉ. सोनेलाल पटेल 'अपना दल' के संस्थापक और उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग (विशेषकर कुर्मी समाज) के बड़े नेता थे। राजनीतिक परिदृश्य में वे 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे अधिक चर्चा में आईं, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर कौशांबी की सिराथू सीट से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पारिवारिक पृष्ठभूमि के लिहाज से केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल इनकी छोटी बहन हैं, हालांकि पिता के निधन के बाद राजनीतिक विरासत और विचारधारा की वजह से परिवार दो अलग-अलग दलों में विभाजित हो गया- जहां अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) का नेतृत्व करते हुए एनडीए के साथ हैं, वहीं पल्लवी पटेल अपनी मां कृष्णा पटेल के साथ अपना दल (कमेरावादी) के जरिए किसान, मजदूर और पिछड़े (कमेरा) वर्ग की राजनीति करती हैं। 

अब जानते हैं सिराथू सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला कौशांबी है। जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं- चायल, मंझनपुर और सिराथू। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट की बात करेंगे। कौशांबी जनपद की सिराथू विधानसभा सीट 1961 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों का हिस्सा थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1962 में हुआ था। यहां की पहले विधायक हेमवती नंदन बहुगुणा बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
सिराथू विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में दलित, पिछड़ी जाति और मुस्लिम समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी दलित और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की है, जो लगभग 29-29% हैं। इसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% है। अन्य प्रमुख वर्गों में ब्राह्मण समाज और वैश्य समुदाय के मतदाता करीब 6-6% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।  

सिराथू विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

1962: कांग्रेस के दबदबे की शुरुआत
सिराथू विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1962 के चुनाव में यूपी विधानसभा चुनाव में कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट (तत्कालीन इलाहाबाद जिले की सिराथू सीट) से कांग्रेस के हेमवती नंदन बहुगुणा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय जगत नारायण को 4,879 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में हेमवती नंदन बहुगुणा को 11,771 वोट, जबकि जगत नारायण को 6,892 वोट मिले।

1967: कांग्रेस ने दोहराई जीत
1967 के विधानसभा चुनाव में भी सिराथू सीट पर कांग्रेस ने दोबारा जीत दर्ज की। इस चुनाव में सिराथू विधानसभा सीट से कांग्रेस के एमपी तिवारी विजयी हुए। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के आर. चरण को 4,640 वोट के अंतर से हराया। चुनाव में एमपी तिवारी को 10,773 वोट, जबकि आर. चरण को 6,133 वोट मिले।

1969: सिराथू विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी जीती
1969 के चुनाव में सिराथू विधानसभा सीट पर पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में राम चरण विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मंगल प्रसाद को 6,455 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम चरण को 17,803 वोट, जबकि मंगल प्रसाद को 11,348 वोट मिले।

1974 में पहली बार सिराथू में भारतीय क्रांति दल जीता
इस चुनाव में सिराथू से भारतीय क्रांति दल के बैजनाथ कुशवाहा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम चंद्रन त्रिपाठी को 1,079 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बैजनाथ कुशवाहा को 11,557 वोट, जबकि राम चंद्रन त्रिपाठी को 10,478 वोट मिले।

आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977 में सिराथू में पहली बार जनता पार्टी जीती
इस चुनाव में यूपी विधानसभा चुनाव में कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बैजनाथ प्रसाद कुशवाहा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के फरीदुल हसन उस्मानी उर्फ अख्तर को 6,271 वोटों के अंतर से हराया। बैजनाथ प्रसाद कुशवाहा को 18,981 वोट, जबकि फरीदुल हसन उस्मानी उर्फ अख्तर को 12,710 वोट मिले।

हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

1980: कांग्रेस की हुई वापसी
1967 के बाद सिराथू विधानसभा सीट पर 1980 में कांग्रेस की वापसी हुई। इस चुनाव में कांग्रेस के जगदीश प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के शशि प्रकाश को 3,259 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर बार चुनाव में जीत दर्ज की। इस बार कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते हुए सिराथू विधानसभा सीट से पुरुषोत्तम लाल विजयी हुए। चुनाव में उन्होंने लोक दल के चौधरी चुन्नी लाल को 5,600 वोटों के अंतर से हराया।

1989: पहली बार जीती जनता दल
इस चुनाव में सिराथू विधानसभा सीट पर पहली बार जनता दल ने जीत हासिल की। चुनाव में जनता दल के राधे श्याम भारती विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के पुरुषोत्तम लाल को 10,472 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राधे श्याम भारतीय को 31,387 वोट, जबकि पुरुषोत्तम लाल को 20,915 वोट मिले।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में सिराथू विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1991: जनता दल ने दोहराई जीत
1991 के विधानसभा चुनाव में सिराथू विधानसभा सीट पर जनता दल ने एक बार फिर जीत दर्ज की। इस बार चुनाव में भागीरथी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के देशराज को 4,155 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भागीरथी को 20,792 वोट, जबकि देशराज को 16,637 वोट मिले।

1993: सिराथू में बहुजन समाज पार्टी के दबदबे की शुरुआत
1993 के चुनाव में सिराथू में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में बसपा के राम सजीवन निर्मल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रकाश चंद्र कैथवास को 8,610 वोटों से हराया। चुनाव में राम सजीवन निर्मल को 35,485 वोट, जबकि प्रकाश चंद्र कैथवास को 26,875 वोट मिले।

1996 के चुनाव में सिराथू से बसपा के मतेश चंद्र सोनकर विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राधेश्याम भारतीय को 8,232 वोटों से हराया। चुनाव में मतेश चंद्र सोनकर को 33,295 वोट, जबकि राधेश्याम भारतीय को 25,063 वोट मिले।

2002 के चुनाव में सिराथू से बसपा ने लगातार तीसरी और मतेश चंद्र सोनकर ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के शैलेंद्र कुमार को 3,809 वोटों से हराया। चुनाव में मतेश चंद्र सोनकर को 33,464 वोट, जबकि शैलेंद्र कुमार को 29,655 वोट मिले। वहीं, अपना दल के राम सजीवन निर्मल 18,780 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007 का चुनाव
इस चुनाव में सिराथू से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वाचस्पति विजयी हुए। यह लगातार चौथी बार था, जब बहुजन समाज पार्टी ने सिराथू विधानसभा सीट पर कब्जा किया। इस चुनाव में वाचस्पति ने समाजवादी पार्टी के मतेश चंद्र सोनकर को 21,998 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में वाचस्पति को 48,997 वोट, जबकि मतेश चंद्र सोनकर को 26,999 वोट मिले। वहीं, अपना दल के शीतला प्रसाद सोनकर 13,450 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2012: सिराथू सीट पर पहली बार जीती भाजपा  
2007 के बाद राज्य में 2012 के चुनाव हुए। इस चुनाव में सिराथू विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वर्तमान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आनंद मोहन को 9,863 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में केशव प्रसाद को 57,926 वोट, जबकि आनंद मोहन को 48,063 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के कैलाश चंद्र केसरवानी 32,309 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2014 के उपचुनाव में पहली बार जीती सपा
2012 के चुनाव के बाद सिराथू विधानसभा सीट पर 2014 में उपचुनाव हुआ। यह उपचुनाव 2012 में भाजपा के टिकट पर सिराथू से जीते केशव प्रसाद मौर्य के फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने और इस्तीफा देने के कारण हुआ था। 2014 के सिराथू विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के वाचस्पति विजयी हुए। इस सीट पर समाजवादी पार्टी की यह पहली जीत थी। चुनाव में वाचस्पति ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी संतोष सिंह पटेल को 24,522 वोटों के अंतर से हराया।

2017 के चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में भाजपा ने एक बार सिराथू विधानसभा सीट पर फिर से कब्जा किया। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शीतला प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के वाचस्पति को 26,203 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शीतला प्रसाद को 78,621 वोट, जबकि वाचस्पति को 52,418 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सईदुर्रब 43,782 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: सिराथू सीट से हारे केशव प्रसाद मौर्य
इसके बाद राज्य में 2022 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट पर बड़ा राजनितिक मौड़ आया। चुनाव में समाजवादी पार्टी की डॉ. पल्लवी पटेल विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के केशव प्रसाद मौर्य (उत्तर प्रदेश के मौजूदा उप मुख्यमंत्री) को 7,337 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पल्लवी पटेल को 1,06,278 वोट, जबकि केशव प्रसाद मौर्य को 98,941 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मुंसब अली 10,073 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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