उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात कौशांबी जिले की मंझनपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं मंझनपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला कौशांबी है। जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं- चायल, मंझनपुर और सिराथू। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम कौशांबी जिले की मंझनपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। मंझनपुर विधानसभा सीट का गठन 1974 के परिसीमन आयोग के बाद हुआ था। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1977 में हुआ था। यहां के पहले विधायक नत्थू राम शिक्षक बने थे। उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
इस विधानसभा सीट पर पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में इंद्रजीत सरोज विजयी हुए। उन्होंने सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी। ये मंझनपुर में सरोज की पांचवीं जीत थी।
मंझनपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
मंझनपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में दलित (पासी और धोबी समाज), पिछड़े वर्ग और सवर्ण समुदाय की आबादी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी दलित मतदाताओं की है, जो लगभग 21% हैं। दलित समुदाय के अंतर्गत ही पासी और धोबी समाज की हिस्सेदारी करीब 13-13% है।
पिछड़ी जातियों में मौर्य समाज के मतदाता लगभग 8%, जबकि यादव और पटेल समुदाय के मतदाता करीब 5-5% हैं। अन्य प्रमुख वर्गों में ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी लगभग 8% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों (जिसमें मुस्लिम व अन्य वर्ग शामिल हैं) से आते हैं।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
मंझनपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1977: जनता पार्टी ने जीता पहला चुनाव
मंझनपुर विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के नत्थू राम शिक्षक विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के छोटे लाल को 11,862 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में नत्थू राम शिक्षक को 25,228 वोट, जबकि छोटे लाल को 13,366 वोट मिले।
1980: कांग्रेस ने जीता पहला चुनाव
मंझनपुर में हुए दूसरे यानी कि 1980 के चुनाव में इस सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस (आई) के ईश्वर शरण विद्यार्थी विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के रामानंद भारतीय को 10,222 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ईश्वर शरण विद्यार्थी को 20,595 वोट, जबकि रामानंद भारतीय को 10,373 वोट मिले।
1985: कांग्रेस ने दोहराई जीत
1985 के चुनाव में मंझनपुर से कांग्रेस के ईश्वर शरण विद्यार्थी लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने लोक दल के रामानंद भारती को 15,526 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में ईश्वर शरण विद्यार्थी को 28,607 वोट, जबकि रामानंद भारती को 13,081 वोट मिले।
1989: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
वहीं 1989 के यूपी विधानसभा चुनाव में मंझनपुर से कांग्रेस के ईश्वर शरण विद्यार्थी ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने निर्दलीय शशि प्रकाश को 13,046 वोटों के अंतर से हराया। ईश्वर शरण विद्यार्थी को 25,509 वोट, जबकि शशि प्रकाश को 12,463 वोट मिले। इस चुनाव के बाद मंझनपुर सीट पर कांग्रेस फिर कभी नहीं जीती।
1991: मंझनपुर में पहली बार जीता जनता दल
1991 के यूपी विधानसभा चुनाव में कौशांबी जिले की मंझनपुर विधानसभा सीट पर पहली बार जनता दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में भगवंत प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के चौधरी चुन्नी लाल को 3,310 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भगवंत प्रसाद को 21,671 वोट, जबकि चौधरी चुन्नी लाल को 18,361 वोट मिले।
इन चुनावों के बाद मंझनपुर विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी का एकछत्र राज रहा। यहां साल 1996, 2002, 2007 और 2012 में बसपा के इंद्रजीत सरोज ने लगातार चार बार जीत दर्ज की। इस दौरान कई पार्टियों ने बसपा के इस किले को फतेह करने का प्रयास किया, लेकिन वे सभी असफल रहीं।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1996: पहली बार जीती बसपा
इस चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इंद्रजीत सरोज मंझनपुर विधानसभा सीट से विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वाचस्पति को 10,952 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रजीत सरोज को 42,279 वोट, जबकि वाचस्पति को 31,327 वोट मिले। वहीं, जनता दल के भगवत प्रसाद 22,188 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
बसपा ने दोहराई जीत
2002 के चुनाव में भी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इंद्रजीत सरोज ने मंझनपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शिव मोहन चौधरी को 4,213 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रजीत सरोज को 49,381 वोट, जबकि शिव मोहन चौधरी को 45,168 वोट मिले। वहीं, अपना दल के सुरेश चंद्र 9,968 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
बसपा-इंद्रजीत सरोज ने लगाई जीत की हैट्रिक
2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इंद्रजीत सरोज ने लगातार तीसरी बार मंझनपुर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के सुरेश पासी को 27,363 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रजीत सरोज को 57,899 वोट, जबकि सुरेश पासी को 30,536 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पुष्पा देवी 18,807 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
बसपा-इंद्रजीत सरोज ने लगाया जीत का चौका
2012 के चुनाव की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इंद्रजीत सरोज ने एक बार फिर मंझनपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के शिव मोहन चौधरी को 4,182 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रजीत सरोज को 91,000 वोट, जबकि शिव मोहन चौधरी को 86,818 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के महेंद्र कुमार 16,041 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2017: मंझनपुर में पहली बार जीती भाजपा
इसके बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर कौशांबी जिले की मंझनपुर विधानसभा सीट पर भी पड़ा। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लाल बहादुर विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इंद्रजीत सरोज को 4,160 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लाल बहादुर को 92,818 वोट, जबकि इंद्रजीत सरोज को 88,658 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के हेमंत कुमार टुन्नू 33,717 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने मारी बाजी
2022 यानी कि पिछले चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में मंझनपुर सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में इंद्रजीत सरोज विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के लाल बहादुर को 23,878 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रजीत सरोज को 1,21,506 वोट, जबकि लाल बहादुर को 97,628 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की नीतू कनौजिया 25,430 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।