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सीट का समीकरण: बस्ती से एक-एक बार ही जीते भाजपा-सपा, पिछले दो चुनाव से इन्हीं में मुकाबला, ऐसा है इसका इतिहास

Mon, 14 Sep 2026 01:28 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

बस्ती विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। 2008 के परिसीमन के बाद इसका नाम बस्ती सदर कर दिया गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से सपा ने 1,779 के नजदीकी अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2017 में यह सी भाजपा के खाते में गई थी। 
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बस्ती सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बस्ती जिले की बस्ती सदर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।

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पहले जानते हैं बस्ती सदर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बस्ती है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- हर्रैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर और महादेवा शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम बस्ती सदर विधानसभा सीट की बात करेंगे। बस्ती विधानसभा सीट सबसे पहले 1957 में अस्तित्व में आई थी, हालांकि उस समय इस सीट का नाम केवल 'बस्ती' था। बाद में 2008 के परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर 'बस्ती सदर' कर दिया गया। बस्ती विधानसभा सीट से पहले विधायक उदय शंकर बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।

बस्ती सदर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण 
बस्ती सदर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, मुस्लिम और कुर्मी आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 17% हैं। इसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13% और कुर्मी मतदाताओं की करीब 11% है, जबकि यादव मतदाता लगभग 9% हैं। वहीं ठाकुर मतदाताओं की संख्या करीब 8%, वैश्य मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 5%, कायस्थ मतदाता करीब 4% और भूमिहार मतदाता लगभग 2% हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं। 

बस्ती विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
बस्ती विधानसभा के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के उदय शंकर विजयी हुए थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी जनतराई प्रसाद को 13,042 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में उदय शंकर को 22,143 वोट मिले, जबकि जनतराई प्रसाद को 9,101 वोट मिले।

1962: कांग्रेस ने दोहराई जीत
साल1962 के चुनाव में भी बस्ती विधानसभा सीट से कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र किशोरी विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनसंघ की निर्मल कुमारी को 6,349 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र किशोरी को 18,483 वोट मिले, जबकि निर्मल कुमारी को 12,134 वोट मिले।

1967: बस्ती में पहली बार जीती स्वतंत्र पार्टी
1967 के चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट पर पहली बार स्वतंत्र पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के एल. के. के. पाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की आर. के. देवी को 1,595 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में एल. के. के. पाल को 16,680 वोट मिले, जबकि आर. के. देवी को 15,085 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1969: कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में बस्ती विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में राजेंद्र किशोरी विजयी हुईं। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के काशी नाथ बहादुर पाल को 2,589 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजेंद्र किशोरी को 15,901 वोट मिले, जबकि काशी नाथ बहादुर पाल को 13,312 वोट मिले। राजेंद्र किशोरी बस्ती में ये दूसरी जीत थी। 

1974: कांग्रेस ने फिर दोहराई जीत
1969 के बाद राज्य में 1974 में चुनाव हुआ। इस चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट से कांग्रेस की श्यामा देवी विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के राजा राम को 9,710 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्यामा देवी को 25,296 वोट मिले, जबकि राजा राम को 15,586 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
1977 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी की जगदंबा प्रसाद सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की श्यामा देवी को 13,055 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदंबा प्रसाद सिंह को 36,181 वोट मिले, जबकि श्यामा देवी को 23,126 वोट मिले।

राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
 

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980 और 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने मारी बाजी
इसके बाद 1980 और 1985 के चुनाव हुए। 1980 के चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) की अलमेलू अम्मल विजयी हुईं। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के बाबू राम वर्मा को 6,363 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1985 के चुनाव में कांग्रेस की अलमेलू अम्मल लगातार दूसरी बार विजयी हुईं। उन्होंने लोक दल के राजमणि पांडेय को 3,596 वोटों के अंतर से हराया। 

1989 और 1991 के चुनाव में जनता दल का रहा दबदबा
वहीं 1989 और 1991 के चुनाव में इस सीट पर जनता दल का कब्जा रहा। 1989 के चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट से जनता दल के राजमणि पांडेय विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जगदंबिका पाल को 22,783 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1991 के चुनाव में बस्ती सीट से जनता दल के लक्ष्मेश्वर सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के विजय सेन सिंह को 2,601 वोटों के अंतर से हराया।  

1993: कांग्रेस की हुई वापसी
1993 के विधानसभा चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट से कांग्रेस के जगदंबिका पाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के विजय सेन सिंह को 5,345 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदंबिका पाल को 40,347 वोट मिले, जबकि विजय सेन सिंह को 35,002 वोट मिले।

1996 में ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस  (टी) जीती
वहीं 1996 के चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट से ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (टी) के जगदंबिका पाल विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के दयाराम चौधरी को 3,165 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदंबिका पाल को 51,862 वोट मिले, जबकि दयाराम चौधरी को 48,697 वोट मिले।

जगदंबिका पाल ने लगाई हैट्रिक जीत
इसके बाद साल 2002 के चुनाव हुए। इस चुनाव में जगदंबिका पाल ने जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जितेंद्र कुमार उर्फ नंदू चौधरी को 9,515 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदंबिका पाल को 42,079 वोट मिले, जबकि जितेंद्र कुमार उर्फ नंदू चौधरी को 32,564 वोट मिले।

2007: पहली बार जीती बहुजन समाज पार्टी
इस चुनाव में बस्ती विधानसभा सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के जीतेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जगदंबिका पाल को 9,780 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जीतेंद्र कुमार को 37,258 वोट मिले, जबकि जगदंबिका पाल को 27,478 वोट मिले।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2007 के चुनाव के बाद 2008 में हुए नए परिसीमन के तहत 'बस्ती' विधानसभा सीट का नाम बदलकर 'बस्ती सदर' कर दिया गया। बस्ती सदर के नाम से इस सीट पर पहला चुनाव 2012 में कराया गया।

2012 में बहुजन समाज पार्टी ने मारी बाजी
इस चुनाव में बस्ती सदर विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी के जीतेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अभिषेक पाल को 19,003 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जीतेंद्र कुमार को 53,011 वोट मिले, जबकि अभिषेक पाल को 34,008 वोट मिले। वहीं भाजपा के हरीश चंद्र उर्फ हरीश द्विवेदी चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 32,121 वोट मिले।

2017: भाजपा ने पहली बार जीता चुनाव
2017 के चुनाव में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर बस्ती की बस्ती सदर विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। चुनाव में पहली बार बस्ती सीट पर भारतीय जनता पार्टी के दयाराम चौधरी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के महेंद्र नाथ यादव को 42,594 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में दयाराम चौधरी को 92,697 वोट मिले, जबकि महेंद्र नाथ यादव को 50,103 वोट मिले। वहीं बसपा के जीतेंद्र कुमार उर्फ नंदू चौधरी 49,538 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2022: सपा ने जीती बस्ती विधानसभा सीट
इस चुनाव में बस्ती सदर विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा)ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के महेंद्र नाथ यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दयाराम चौधरी को 1,779 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में महेंद्र नाथ यादव को 86,029 वोट मिले, जबकि दयाराम चौधरी को 84,250 वोट मिले। वहीं, तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. आलोक रंजन वर्मा रहे, जिन्हें चुनाव में 36,429 वोट मिले।
 
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