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सीट का समीकरण: पिछले तीन चुनाव में तीन अलग दलों को चुन चुका है महादेवा, ऐसा है बस्ती जिले की इस सीट का इतिहास

Fri, 11 Sep 2026 05:20 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

बस्ती जिले की महादेवा विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। छठी विधासनभा के लिए हुए परिसीमन में इसका अस्तित्व समाप्त हो गया।2008 के बाद फिर महादेवा नाम से अस्तित्व में आई। पिछले तीन चुनाव में इस सीट पर तीन अलग दलों ने जीत दर्ज की है।

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महादेवा सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बस्ती जिले की महादेवा विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।

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पहले जानते हैं महादेवा विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बस्ती है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- हर्रैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर और महादेवा शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम महादेवा विधानसभा सीट की बात करेंगे। महादेवा विधानसभा सीट का इतिहास थोड़ा अलग रहा है। दरअसल यह विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। उस समय बलदेव सिंह यहां के पहले विधायक बने थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। हालांकि 1977 से लेकर 2007 तक के चुनाव के दौरान ये सीट अस्तित्व में नहीं रही। 2008 के परिसीमन के बाद ये सीट एक बार फिर अस्तित्व में आई।

महादेवा विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
महादेवा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में अनुसूचित जाति (SC), कुर्मी और मुस्लिम आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी अनुसूचित जाति के मतदाताओं की है, जो लगभग 24% हैं। इसके बाद कुर्मी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और मुस्लिम मतदाताओं की करीब 11% है, जबकि यादव मतदाता लगभग 8% हैं। वहीं ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 6%, क्षत्रिय मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 5% और निषाद मतदाता करीब 4% हैं। जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य समाज से हैं।  

इन पार्टियों को मिली जीत - फोटो : अमर उजाला
महादेवा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: निर्दलीय ने मारी बाजी
1957 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार बलदेव सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के देवेंद्र प्रताप सिंह को महज 156 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बलदेव सिंह को 12,354 वोट मिले, जबकि देवेंद्र प्रताप सिंह को 12,198 वोट मिले।

1962: पहली बार कांग्रेस ने जीता चुनाव
इस चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विष्णु प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के बलदेव सिंह को 3,794 वोटों के अंतर से हराया।

पहली बार स्वतंत्र पार्टी ने दर्ज की जीत
1967 के चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट से स्वतंत्र पार्टी (SWA) के बी. लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जी. प्रसाद को 766 वोटों के अंतर से हराया।

1969: कांग्रेस की हुई वापसी
1969 के चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के गंगा प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) के गौरी प्रसाद को 5,689 वोटों के अंतर से हराया।

समाप्त हुई महादेवा सीट
1969 के चुनाव के बाद 1972 के परिसीमन में इस विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर दिया गया और इसका नाम बदलकर 'नगर पूर्व' कर दिया गया। इसके बाद 1974 से लेकर 2007 तक के चुनाव इसी नाम से लड़े गए। साल 2008 के नए परिसीमन के तहत 'नगर पूर्व' सीट को समाप्त कर दी गई। एक बार फिर  'महादेवा विधानसभा' सीट अस्तित्व में आई।  इसे अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दिया गया। नए स्वरूप में इस सीट पर पहला चुनाव 2012 में कराया गया।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012: सपा ने जीत चुनाव
2012 के विधानसभा चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के राम करन आर्य विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दूधराम को 19,259 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम करन आर्य को 83,202 वोट मिले, जबकि दूधराम को 63,943 वोट मिले। वहीं, तीसरे स्थान पर भाजपा की प्रत्याशी बीना राय रहीं, जिन्हें चुनाव में 10,816 वोट मिले।

2017: भाजपा ने जीता चुनाव
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर बस्ती की महादेवा विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी रवि कुमार सोनकर विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के दूधराम को 25,884 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रवि कुमार सोनकर को 82,429 वोट मिले, जबकि दूधराम को 56,545 वोट प्राप्त हुए। वहीं, तीसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के राम करन आर्य रहे, जिन्हें चुनाव में 47,914 वोट मिले।

2022: सुभासपा ने मारी बाजी
2022 के विधानसभा चुनाव में महादेवा विधानसभा सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के दूधराम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी  के रवि कुमार सोनकर को 5,495 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दूधराम को 83,350 वोट मिले, जबकि रवि कुमार सोनकर को 77,855 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी  के लक्ष्मी चंद्र खरवार 40,207 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
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