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सीट का समीकरण: 2022 में यहां हैट्रिक लगाने से चूकी थी भाजपा, ऐसा है कैसरगंज विधानसभा का चुनावी इतिहास

Sat, 12 Sep 2026 06:07 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

बहराइच की कैसरगंज नाम से विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई।तब से अब तक अलग-अलग दलों का यहां दबदबा रहा है। बीते 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से सपा के आनंद कुमार यादव ने जीत दर्ज की थी।
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कैसरगंज सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म होता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बहराइच जिले की कैसरगंज विधानसभा सीट की होगी। आइए इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास जानते हैं।

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पहले जानते हैं कैसरगंज विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बहराइच है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बलहा, नानपारा, मटेरा, महसी, बहराइच, पयागपुर और कैसरगंज शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम कैसरगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। बहराइच जिले की कैसरगंज विधानसभा सीट वैसे तो राज्य के पहले आम चुनाव यानी साल 1952 से ही अस्तित्व में है, लेकिन उस समय यह क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। परिसीमन के बाद यह साल 1957 में 'कैसरगंज' के नाम से पूर्ण रूप से अस्तित्व में आई। यहां के पहले विधायक हुकुम सिंह बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी। पिछले यानी साल 2022 के चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के आनंद कुमार यादव विजयी हुए थे।

कैसरगंज विधानसभा चुनाव का इतिहास

1957: कैसरगंज में कांग्रेस की पहली जीत

बहराइच जिले की कैसरगंज विधानसभा सीट पर 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के हुकुम सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी अथर मेहदी को 11,874 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हुकूम सिंह को 23,393 वोट, जबकि अथर मेहदी को 11,519 वोट मिले।

1962: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस चुनाव में बहराइच जिले की कैसरगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस के हुकुम सिंह विसेन विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के जगन्नाथ सिंह को 2,357 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हुकुम सिंह विसेन को 18,451 वोट, जबकि जगन्नाथ सिंह को 16,094 वोट मिले।

1967: कैसरगंज में पहली बार जीती भारतीय जनसंघ
इस चुनाव में बहराइच की कैसरगंज विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की। चुनाव में डी. सिंह विजयी हुए। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के ए. एच. खान को 6,508 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में डी. सिंह को 21,195 वोट, जबकि ए. एच. खान को 14,687 वोट मिले।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1969: कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के भगवती सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के बाबू लाल वर्मा को 1,726 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भगवती सिंह को 22,784 वोट, जबकि बाबू लाल वर्मा को 21,058 वोट मिले।

1974: भारतीय जनसंघ ने की वापसी
1974 में कैसरगंज सीट से भारतीय जनसंघ ने वापसी की। चुनाव में बाबू लाल वर्मा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के भगवती सिंह को 9,083 वोटों से हराया। चुनाव में बाबू लाल वर्मा को 34,236 वोट, जबकि भगवती सिंह को 25,153 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के बाबू लाल वर्मा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के कुंवर बहादुर सिंह को 1,542 वोटों से हराया। चुनाव में बाबू लाल वर्मा को 27,043 वोट, जबकि कुंवर बहादुर सिंह को 25,501 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

1980 का चुनाव
इस चुनाव में कांग्रेस (आई) के सुंदर सिंह ने जीत दर्ज की। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के राम तेज यादव को 2,972 वोटों से हराया। चुनाव में सुंदर सिंह को 16,148 वोट, जबकि राम तेज यादव को 13,176 वोट मिले।

1985 में कांग्रेस ने फिर जीता चुनाव
इस चुनाव में कांग्रेस के एहतिशाम वली खान कैसरगंज से विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के सुखदराज सिंह को 15,781 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में एहतिशाम वली खान को 33,622 वोट, जबकि सुखदराज सिंह को 17,841 वोट मिले।

1989 के चुनाव में क्या रहा नतीजा?
इस चुनाव में लोकदल (बी) के राम तेज यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा की नीलम सिंह को महज 570 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम तेज यादव को 17,779 वोट, जबकि नीलम सिंह को 17,209 वोट मिले।

इन चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के चलते साल 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इस दौरान कैसरगंज सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: कैसरगंज में पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में कैसरगंज विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में रुद्रेंद्र विक्रम सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (JP) के राम तेज यादव को 5,496 वोटों से हराया। चुनाव में रुद्रेंद्र विक्रम सिंह को 38,360 वोट, जबकि राम तेज यादव को 32,864 वोट मिले।

1993: पहली बार कैसरगंज में जीती सपा
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में राम तेज यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के रुद्रेंद्र विक्रम सिंह को 11,261 वोटों से हराया। चुनाव में राम तेज यादव को 52,253 वोट, जबकि रुद्रेंद्र विक्रम सिंह को 40,992 वोट मिले।

1996: सपा ने दोहराई जीत
वहीं 1996 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के राम तेज यादव लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के मुकुट बिहारी वर्मा को महज 234 वोटों से हराया। चुनाव में राम तेज यादव को 37,189 वोट, जबकि मुकुट बिहारी वर्मा को 36,955 वोट मिले।

2002: भाजपा ने की वापसी
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर भाजपा ने वापसी की। चुनाव में भाजपा के मुकुट बिहारी वर्मा विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के गुलाम मोहम्मद को 3,714 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मुकुट बिहारी वर्मा को 39,355 वोट, जबकि गुलाम मोहम्मद को 35,641 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) के राम तेज यादव 22,998 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007: पहली बार जीती बसपा
इस चुनाव में एक बार फिर सीट का समीकरण बदला। यहां पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में गुलाम मोहम्मद खान ने जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के राम तेज यादव को 18,022 वोटों से हराया। चुनाव में गुलाम मोहम्मद खान को 38,911 वोट, जबकि राम तेज यादव को 20,889 वोट मिले। वहीं, भाजपा के मुकुट बिहारी वर्मा 20,016 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012: भाजपा ने फिर की वापसी
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर भाजपा ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में भाजपा के मुकुट बिहारी वर्मा ने दोबारा कैसरगंज सीट पर जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम तेज यादव को 6,968 वोटों से हराया। चुनाव में मुकुट बिहारी वर्मा को 45,262 वोट, जबकि राम तेज यादव को 38,294 वोट मिले। वहीं, BSP के खालिद खान 37,528 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017: लगातार दूसरी बार जीती भाजपा
इस चुनाव में यूपी की कैसरगंज सीट से भारतीय जनता पार्टी के मुकुट बिहारी वर्मा लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के खालिद खान को 27,363 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में मुकुट बिहारी वर्मा को 85,212 वोट, जबकि खालिद खान को 57,849 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के राम तेज यादव 54,117 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: करीबी मुकाबले में सपा ने भाजपा से जीती बाजी
इस चुनाव में कैसरगंज सीट पर 1996 के बाद सपा ने वापसी की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के आनंद कुमार यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के गौरव वर्मा को नजदीकी मुकाबले में 7,711 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आनंद कुमार यादव को 1,03,135 वोट, जबकि गौरव वर्मा को 95,424 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी  के बाकाउल्लाह 13,850 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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