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सीट का समीकरण: कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट, फिर बसपा का रहा लंबा राज; 2022 में सपा ने पलटा पासा; जानें इतिहास

Wed, 30 Sep 2026 11:56 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

आजमगढ़ जिले की लालगंज विधानसभा सीट 1957 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई। लंबे वक्त तक ये सीट कांग्रेस का गढ़ रही। 1996 में यहां से पहली बार भाजपा को जीत मिली। बसपा लालगंज सीट पर पांच बार जीत दर्ज कर चुकी है। 2022 में यहां से सपा को जीत मिली थी। आइये जानते हैं लालगंज सीट का पूरा चुनावी इतिहास...
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लालगंज सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्मा जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात आजमगढ़ जिले की लालगंज विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं लालगंज विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें 403 विधानसभा सीटें आती हैं। इन्हीं में से एक जिला आजमगढ़ है। जिले में कुल दस विधानसभा सीटें हैं। इनमें- अतरौलिया, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, फूलपुर-पवई, दीदारगंज, लालगंज और मेहनगर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम लालगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे।
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लालगंज विधानसभा सीट का जातीय समीकरण क्या है?
विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में एससी, भूमिहार, पासी और क्षत्रिय आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी एससी (दलित) मतदाताओं की है, जो लगभग 24% हैं। इसके बाद भूमिहार, पासी और क्षत्रिय मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 12-12% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में मुस्लिम मतदाता लगभग 10%, यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मतदाता करीब 8-8% हैं। इसके अलावा चौहान मतदाता लगभग 4% हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। 

लालालंगज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
लालगंज विधानसभा सीट का अस्तित्व साल 1952 के पहले चुनाव से ही है। उस समय यह विधानसभा दो अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित थी- जिसमें से एक क्षेत्र 'लालगंज दक्षिण' और दूसरा क्षेत्र 'लालगंज उत्तर' था। 1952 के चुनाव में लालगंज दक्षिण से कांग्रेस के कालिका सिंह विजयी हुए थे। वहीं लालगंज उत्तर से निर्दलीय उम्मीदवार तेज बहादुर विधायक बने थे।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1957 का चुनाव
 साल 1957 में चुनाव के चुनाव में लालगंज एक द्विसदस्यीय विधानसभा थी, यानी यहां से दो विधायक चुने जाते थे। साल 1957 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के धनीराम और निर्दलीय उम्मीदवार तेज बहादुर चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 

कांग्रेस ने लगातार तीन चुनाव में दर्ज की जीत
1967, 1969 और 1974 के विधानसभा चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस के त्रिवेणी विजयी हुए। 1967 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के यू. एन. सिंह को 3,707 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1969 के चुनाव में उन्होंने भारतीय क्रांति दल के ईश दत्त को 1,902 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद राज्य में 1974 के चुनाव हुए। इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार तेज बहादुर को 2,970 वोटों के अंतर से हराया और विधानसभा पहुंचे।

 

1977: जनता पार्टी दर्ज की पहली जीत
इस चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनवा में ईश दत्त विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के त्रिवेणी को 5,798 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ईश दत्त को 28,618 वोट, जबकि त्रिवेणी को 22,820 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय तेज बहादुर 10,060 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

 

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980 का चुनाव
1980 के चुनाव की बात करें तो आजमगढ़ जिले की लालगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के त्रिवेणी विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के ईश दत्त को 7,104 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में त्रिवेणी को 23,693 वोट, जबकि ईश दत्त को 16,589 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय तेज बहादुर 10,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1982 में हुआ उपचुनाव
1980 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) के प्रत्याशी त्रिवेणी लालगंज सीट से विधायक चुने गए थे, लेकिन कार्यकाल के दौरान उनके आकस्मिक निधन के कारण यह सीट रिक्त हो गई, जिसके चलते वर्ष 1982 में इस सीट पर उप चुनाव कराना पड़ा। इस उप चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रवींद्र ने जीत दर्ज कर सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।

1985 और 1989 का चुनाव
1980 के बाद राज्य में 1985 और 1989 के चुनाव हुए। इन चुनावों में श्री प्रकाश विजयी हुए। 1985 के चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के रवींद्र को 13,415 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1989 के चुनाव में उन्होंने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने बसपा के सुखदेव को 9,973 वोटों के अंतर से हराया।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में लालगंज विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: पहली बार जीती बसपा
इस विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ जिले की लालगंज विधानसभा सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के सुखदेव राजभर विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के नरेंद्र को महज 24 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुखदेव राजभर को 25,966 वोट, जबकि नरेंद्र को 25,942 वोट मिले।

1993: सुखदेव ने दोहराई जीत
इस चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट से बसपा के सुखदेव एक बार फिर विजयी हुए। यह उनकी लगातार दूसरी जीत थी। उन्होंने भाजपा के नरेंद्र को 15,988 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुखदेव को 56,561 वोट, जबकि नरेंद्र को 40,573 वोट मिले।

1996: पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के नरेंद्र विजयी हुए। उन्होंने बसपा के सुखदेव राजभर को 6,071 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में नरेंद्र को 55,311 वोट, जबकि सुखदेव राजभर को 49,240 वोट मिले।

2002 और 2007 में बसपा ने जीता चुनाव
2002 के चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट से बसपा के सुखदेव राजभर विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के नरेंद्र सिंह को 1,748 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुखदेव राजभर को 53,700 वोट, जबकि नरेंद्र सिंह को 51,952 वोट मिले। वहीं, सपा के बिजेंद्र सिंह 34,872 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 2007 के चुनाव में बसपा की तरफ से चुनाव लड़ते हुए सुखदेव राजभर लगातार दूसरी बार विजयी हुए। चुनाव में उन्होंने भाजपा के नरेंद्र को 21,815 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुखदेव राजभर को 54,336 वोट, जबकि नरेंद्र को 32,521 वोट मिले। वहीं, सपा के भूपेंद्र 29,569 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012: पहली बार जीती सपा
इस चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के बेचई विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के हीरा लाल गौतम को 11,012 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बेचई को 64,746 वोट, जबकि हीरा लाल गौतम को 53,734 वोट मिले। वहीं, भाजपा की ज्ञानमती 27,181 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

2017: बसपा ने एक बार फिर वापसी की
इस चुनाव की बात करें तो आजमगढ़ की लालगंज विधानसभा सीट पर बसपा ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में बसपा के आजाद अरिमर्दन विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के दरोगा प्रसाद सरोज को 2,227 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आजाद अरिमर्दन को 72,715 वोट, जबकि दरोगा प्रसाद सरोज को 70,488 वोट मिले। वहीं, सपा के बेचई सरोज 54,196 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की लालगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के बेचई सरोज विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नीलम सोनकर को 14,733 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बेचई सरोज को 83,767 वोट, जबकि नीलम सोनकर को 69,034 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के आजाद अरिमर्दन 57,809 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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