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सीट का समीकरण: पिछले पांच में से दो-दो चुनाव रहे सपा-भाजपा के नाम, ऐसा है मिल्कीपुर सीट का चुनावी इतिहास

Thu, 29 Oct 2026 11:02 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

  • अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट साल 1967 में अस्तित्व में आई थी।
  • यहां कांग्रेस, भारतीय जनसंघ, भाकपा, भाजपा, सपा और बसपा के उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके हैं।
  • 2022 में यहां से सपा के अवधेश प्रसाद जीते थे। 2025 में हुए उपचुनाव में ये सीट भाजपा ने जीती। आइए इस सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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मिल्कीपुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।  ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास।
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अयोध्या की मिल्कीपुर सीट प्रदेश समेत पूरे देश में चर्चित है। इसकी मुख्य वजह इस सीट से सपा की तरफ से चुनाव में उतरे उनके प्रत्याशी अवधेश प्रसाद थे। यह सीट सबसे ज्यादा चर्चा में तब आई जब अवधेश प्रसाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या (फैजाबाद) सीट से सपा की तरफ से चुनाव लड़ते हुए जीत गए।  
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पहले जानते हैं मिल्कीपुर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला अयोध्या है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- अयोध्या, बीकापुर, गोसाईंगंज, मिल्कीपुर (SC) और रुदौली शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम मिल्कीपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट मूल रूप से साल 1967 में अस्तित्व में आई थी। यहां साल 1967 में पहला चुनाव हुआ था। यहां के पहले चुनाव में आर. लाल (रामलाल मिश्रा) विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी। तब यह समान्य सीट है। अब अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है।

मिल्कीपुर विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
मिल्कीपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, यादव, पासी, मुस्लिम और क्षत्रिय (ठाकुर) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 18% हैं। इसके बाद यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 16% और पासी मतदाताओं की आबादी लगभग 16% है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 9% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 7% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में दलित (पासी से इतर अन्य एससी) समाज के मतदाता करीब 7%, कोरी समुदाय लगभग 6%, चौरसिया समाज लगभग 5%, वैश्य मतदाता करीब 4%, पाल समाज लगभग 2% और मौर्य मतदाता करीब 1.5% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। 

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
मिल्कीपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

मिल्कीपुर सीट के पहले चुनाव में कांग्रेस जीती
अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1967 के चुनाव में कांग्रेस के आर. लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के टी. एच. नाथ को 2,563 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आर. लाल को 15,256 वोट, जबकि टी. एच. नाथ को 12,693 वोट मिले।

1969 में जीती भारतीय जनसंघ
इस चुनाव में भारतीय जनसंघ ने पहली बार मिल्कीपुर सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में बीजेएस के हरिनाथ तिवारी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बृज बासी लाल को 3,579 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिनाथ तिवारी को 12,780 वोट, जबकि बृज बासी लाल को 9,201 वोट मिले।

1974 के चुनाव में मिल्कीपुर में कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के धरम चंद्र ने जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनसंघ के शंकर नाथ त्रिपाठी को 14,949 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में धरम चंद्र को 29,557 वोट, जबकि शंकर नाथ त्रिपाठी को 14,608 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977 का चुनाव
इस चुनाव में पहली बार भाकपा के मित्रसेन यादव ने मिल्कीपुर सीट पर बड़ी जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 25,861 वोट मिले, जबकि जनता पार्टी के धर्म चंद्र को 11,252 वोट मिले। मित्रसेन ने 14,609 वोटों के अंतर से चुनाव जीता।

हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

1980: भाकपा ने दोहराई जीत
इसके बाद 1980 के चुनाव में भाकपा के मित्रसेन यादव ने लगातार दूसरी बार मिल्कीपुर सीट जीती। चुनाव में उन्हें कुल 29,208 वोट मिले, जबकि कांग्रेस (आई) के राम हेत सिंह को 23,383 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 5,825 वोट रहा।

1985: भाकपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
1985 के चुनाव में भाकपा के मित्रसेन यादव ने लगातार तीसरी बार मिल्कीपुर सीट पर जीत दर्ज की और जीत की हैट्रिक लगाई। चुनाव में उन्हें 40,231 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के हनुमान प्रसाद त्रिपाठी को 34,171 वोट मिले। मित्रसेन की जीत का अंतर 6,060 वोट रहा।

1989: कांग्रेस ने की वापसी
इसके बाद राज्य में साल 1989 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के बृज भूषण मणि त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मित्रसेन को 6,044 वोटों के अंतर से हराया।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1991: पहली बार जीती भाजपा
इसके बाद राज्य में 1991 के चुनाव हुए। इसमें भाजपा ने पहली बार अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के मथुरा प्रसाद तिवारी उर्फ बद्री प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कमलासन पांडेय को 415 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मथुरा प्रसाद तिवारी को 27,594 वोट, जबकि कमलासन पांडेय को 27,179 वोट मिले।

1993: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने की वापसी
1993 के यूपी विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मिल्कीपुर सीट पर वापसी की। चुनाव में मित्रसेन यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के मथुरा प्रसाद तिवारी उर्फ बद्री तिवारी को 775 वोटों के अंतर से हराया।

1996: मिल्कीपुर में पहली बार जीती सपा
इसके बाद राज्य में 1996 के चुनाव हुए। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पहली बार मिल्कीपुर सीट को अपने नाम किया। चुनाव में सपा के मित्रसेन यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के बृज भूषण मणि त्रिपाठी को 6,162 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मित्रसेन यादव को 56,054 वोट, जबकि बृज भूषण मणि त्रिपाठी को 49,892 वोट मिले।

ाद1998 में हुआ उपचुनाव
1996 के चुनाव के बाद साल 1998 में मिल्कीपुर के तत्कालीन विधायक मित्रसेन यादव ने फैजाबाद लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा और सांसद चुन लिए गए। लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने मिल्कीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराना पड़ा। इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के रामचंद्र यादव ने जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डॉ. बृजभूषण मणि त्रिपाठी को हराया।

2002: सपा ने फिर दर्ज की जीत
2002 के चुनाव में मिल्कीपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के आनंद सेन यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दिनेश प्रताप सिंह को 3,086 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आनंद सेन को 54,545 वोट, जबकि दिनेश प्रताप सिंह को 51,459 वोट मिले।

2004 का उपचुनाव
साल 2002 के चुनाव के बाद साल 2004 में इस सीट उपचुनाव हुआ। राजनीतिक निष्ठा बदलने के कारण यहां उपचुनाव की नौबत आई। मिल्कीपुर से तत्कालीन सपा विधायक आनंद सेन यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम लिया था और अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के रामचंद्र यादव ने एक बार फिर जीत दर्ज की। उन्होंने अपनी ही पार्टी के बागी प्रत्याशी और बसपा के उम्मीदवार आनंद सेन यादव को भारी मतों से हराया।

2007: पहली बार जीती बसपा
इस चुनाव के बाद राज्य में 2007 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने मिल्कीपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के आनंद सेन विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राम चंद्र यादव को 9,379 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आनंद सेन को 60,515 वोट, जबकि राम चंद्र यादव को 51,136 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मथुरा प्रसाद तिवारी 14,767 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

मिल्कीपुर से 2012 का चुनाव जीते अवधेश प्रसाद 
इस चुनाव में मिल्कीपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इस बार यहां सपा ने वापसी की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी  के पवन कुमार को 34,237 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में अवधेश प्रसाद को 73,803 वोट, जबकि पवन कुमार को 39,566 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रामू प्रियदर्शी 32,972 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1991 के बाद 2017 में भाजपा की हुई वापसी
इस चुनाव के बाद 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में 1991 के बाद भाजपा ने वापसी की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बाबा गोरखनाथ विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद को 28,336 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बाबा गोरखनाथ को 86,960 वोट, जबकि अवधेश प्रसाद को 58,684 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के रामगोपाल कोरी 46,027 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2022 में फिर जीती सपा
पिछले यानी कि 2022 के चुनाव में सपा ने एक बार फिर वापसी करते हुए भाजपा को हराया। चुनाव में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के बाबा गोरखनाथ को 13,338 वोटों के अंतर से हराया। अवधेश प्रसाद को 1,03,905 वोट, जबकि बाबा गोरखनाथ को 90,567 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मीरा देवी 14,427 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। बतादें कि  अवधेश प्रसाद की यह मिल्कीपुर सीट पर दूसरी जीत थी। उन्होंने इससे पहले 2012 में भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 

2025 का उपचुनाव
साल 2022 के बाद 2025 में इस सीट पर उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में मिल्कीपुर सीट से सपा के अवधेश प्रसाद विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फैजाबाद (अयोध्या) सीट से सांसद का चुनाव जीता। सांसद बनने के बाद अवधेश प्रसाद ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। इस वजह से फरवरी 2025 में मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव आयोजित किया गया। इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चंद्रभानु पासवान ने जीत हासिल की। उन्होंने सपा प्रत्याशी (अवधेश प्रसाद के बेटे) अजीत प्रसाद को 61,710 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराकर यह सीट सपा के कब्जे से छीन ली। 
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