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सीट का समीकरण: बीकापुर में रहा है सपा का दबदबा, पिछले दो चुनाव रहे भाजपा के नाम; ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास

Thu, 22 Oct 2026 05:16 AM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट 1962 के चुनाव में अस्तित्व में आई थी। यहां हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इस सीट पर अब तक कांग्रेस, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, भाजपा, सपा और बसपा के उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके हैं। आइए, इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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बीकापुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। भले ही मतदान में अभी समय हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल साफ दिखाई देने लगी है। राजनीतिक दल संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के सहारे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास।
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पहले जानते हैं बीकापुर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला अयोध्या है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- अयोध्या, बीकापुर, गोसाईंगंज, मिल्कीपुर और रुदौली शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम बीकापुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई थी। यहां साल 1962 में पहला चुनाव हुआ था। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। यहां के पहले चुनाव में अखंड प्रताप सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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बीकापुर विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ब्राह्मण, पासी, यादव और क्षत्रिय (ठाकुर) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 15% हैं। इसके बाद ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13% और पासी मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है, जबकि यादव मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 9% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में कुर्मी समाज के मतदाता करीब 8%, कोरी समुदाय लगभग 7%, निषाद मतदाता करीब 7% और वैश्य समुदाय लगभग 3% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।  

बीकापुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

बीकापुर सीट पर पहले तीन चुनाव में कांग्रेस जीती
बीकापुर विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1962 के चुनाव में कांग्रेस के अखंड प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय अवधेश प्रताप सिंह को 4,977 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अखंड प्रताप सिंह को 22,058 वोट, जबकि अवधेश प्रताप सिंह को 17,081 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1967: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस चुनाव में बीकापुर सीट पर कांग्रेस के आर. बी. द्विवेदी विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय एम. डी. ए. आर. साहिबा को 5,799 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आर. बी. द्विवेदी को 19,444 वोट, जबकि एम. डी. ए. आर. साहिबा को 13,645 वोट मिले।

1969: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
1969 के चुनाव में कांग्रेस की बीकापुर सीट पर मनवती देवी विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के राज बहादुर द्विवेदी को 8,347 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मनवती देवी को 22,069 वोट, जबकि राज बहादुर द्विवेदी को 13,722 वोट मिले।

1974: बीकापुर में पहली बार जीती भारतीय क्रांति दल
1974 के चुनाव  में बीकापुर सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सीताराम निषाद विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (INC) के हरि हर नाथ को 6,133 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सीताराम निषाद को 18,978 वोट, जबकि हरि हर नाथ को 12,845 वोट मिले।

आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: बीकापुर में पहली बार जीती जनता पार्टी
इस चुनाव में पहली बार जनता पार्टी ने बीकापुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के श्री राम द्विवेदी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सीताराम निषाद को 9,894 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्री राम द्विवेदी को 26,686 वोट, जबकि सीताराम निषाद को 16,792 वोट मिले।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980: कांग्रेस आई ने जीता चुनाव
इस चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के सीताराम निषाद विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के शेओ दुलम सिंह को 6,418 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सीताराम निषाद को 18,264 वोट, जबकि शेओ दुलम सिंह को 11,846 वोट मिले।

1985: कांग्रेस ने दोहराई जीत
1985 के चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के सीताराम निषाद ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने जनता पार्टी के श्री राम द्विवेदी को 8,157 वोटों के अंतर से हराया। सीताराम निषाद को 28,340 वोट, जबकि श्री राम द्विवेदी को 20,183 वोट मिले। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राजबली यादव 9,729 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1989:  निर्दलीय उम्मीदवार ने मारी बाजी
1985 के बाद 1989 के चुनाव हुए। इस चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। चुनाव में संत श्रीराम द्विवेदी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सीताराम निषाद को 11,186 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संत श्रीराम द्विवेदी को 46,612 वोट, जबकि सीताराम निषाद को 35,426 वोट मिले।

1991: पहली बार भाजपा जीती
इस चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के संत श्रीराम द्विवेदी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सीताराम निषाद को 3,557 वोटों के अंतर से हराया। संत श्रीराम द्विवेदी को 23,895 वोट, जबकि सीताराम निषाद को 20,338 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय आनंद सिंह 15,802 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1993: सपा ने जीता पहला चुनाव
इसके बाद राज्य में 1993 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के परशुराम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संत श्रीराम द्विवेदी को 7,100 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में परशुराम को 41,811 वोट, जबकि संत श्रीराम द्विवेदी को 34,711 वोट मिले।

1996: सपा ने दोहराई जीत
इसके बाद 1996 के चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सीताराम निषाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संत श्रीराम द्विवेदी को 13,892 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सीताराम निषाद को 52,850 वोट, जबकि संत श्रीराम द्विवेदी को 38,958 वोट मिले।

2002: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
वहीं 2002 के चुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सीताराम निषाद ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के जितेंद्र कुमार बबलू सिंह को 6,923 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सीताराम निषाद को 43,989 वोट, जबकि जितेंद्र कुमार बबलू सिंह को 37,066 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के अवधेश कुमार पांडेय 22,642 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007: बीकापुर विधानसभा सीट से पहली बार जीती बसपा
इन चुनावों के बाद 2007 के चुनाव हुए। इन चुनावों में पहली बार बीकापुर विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के जितेंद्र कुमार बबलू भैया विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सीताराम निषाद को 10,223 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जितेंद्र कुमार बबलू भैया को 52,424 वोट, जबकि सीताराम निषाद को 42,201 वोट मिले। वहीं, अपना दल की सरिता सिंह 39,573 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012 के चुनाव में सपा ने की वापसी
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के मित्रसेन यादव विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के फिरोज खान उर्फ गब्बर को 1,868 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मित्रसेन यादव को 55,232 वोट, जबकि फिरोज खान उर्फ गब्बर को 53,364 वोट मिले। वहीं, राष्ट्रीय लोक दल के मुन्ना सिंह चौहान 37,532 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2016 में हुआ उपचुनाव, सपा ने दोहराई जीत
साल 2012 के चुनाव के बाद बीकापुर सीट पर वर्ष 2016 में उपचुनाव हुआ था क्योंकि 2012 के चुनाव में इस सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते दिग्गज नेता मित्रसेन यादव का निधन हो गया था, जिससे यह सीट खाली हो गई थी। इस उपचुनाव में सपा ने उनके बेटे आनंद सेन यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था, जो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

2017: 1991 के बाद भाजपा ने की वापसी
इस चुनाव में 1991 के बाद बीकापुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने वापसी की। चुनाव में भाजपा की शोभा सिंह चौहान विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के आनंद सेन को 26,652 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शोभा सिंह चौहान को 94,074 वोट, जबकि आनंद सेन को 67,422 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जितेंद्र सिंह 49,690 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022 में भाजपा ने दोहराई जीत
इसके बाद 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस सीट पर जीत बरकरार रखी। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अमित सिंह चौहान विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के फिरोज खान को 5,560 वोटों के अंतर से हराया। अमित सिंह चौहान को 1,07,268 वोट, जबकि फिरोज खान को 1,01,708 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सुनील 21,385 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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