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सीट का समीकरण: डुमरियागंज में बेहद कांटे की रही है लड़ाई, 2017 में महज 171 तो 2022 में 771 वोट से हुआ फैसला

Mon, 14 Sep 2026 04:20 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई। 1967 के विधानसभा चुनाव में यहां से जनसंघ ने जीत दर्ज की थी। पिछले चार चुनावों में डुमरियागंज के मतदाताओं ने चार अलग दलों को चुना है। 2017 में यहां से भाजपा की करीबी जीत के बाद 2022 में सपा ने सीट पर कब्जा जमाया।
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डुमरियागंज सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। भले ही मतदान में अभी समय हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल साफ दिखाई देने लगी है। राजनीतिक दल संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों के सहारे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास।

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पहले जानते हैं डुमरियागंज विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला सिद्धार्थनगर है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- शोहरतगढ़, कपिलवस्तु, बांसी, इटवा और डुमरियागंज शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम डुमरियागंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। डुमरियागंज विधानसभा सीट सबसे पहले 1967 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट से पहले विधायक जय दत्त सिंह बने थे, जिन्होंने जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी। 1967 से पहले इस क्षेत्र को 'डुमरियागंज उत्तर' और 'डुमरियागंज दक्षिण' जैसी अलग-अलग सीटों में विभाजित किया गया था। हालांकि परिसीमन के बाद इसे एक एकीकृत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बनाया गया।

डुमरियागंज विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
डुमरियागंज विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ब्राह्मण व भूमिहार और अनुसूचित जाति की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 31% हैं। इसके बाद ब्राह्मण व भूमिहार मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% है। अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 12% है, वहीं बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं। 

डुमरियागंज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
डुमरियागंज विधानसभा सीट के पहले यानी की 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में जय दत्त सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के जलील अब्बासी को 2,787 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जय दत्त सिंह को 28,196 वोट मिले, जबकि जलील अब्बासी को 25,409 वोट मिले।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1969: पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के जलील अब्बासी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के जय दत्त सिंह को 4,142 वोटों के अंतर से हराया।

1974: कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
1974 के विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से कांग्रेस के काजी जलील अब्बासी विजयी हुए। यह उनकी लगातार दूसरी जीत थी। उन्होंने भारतीय जनसंघ के अजय सिंह को 10,210 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में काजी जलील अब्बासी को 34,976 वोट मिले, जबकि अजय सिंह को 24,766 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

डुमरियागंज में पहली बार जीती जनता पार्टी
1977 के चुनाव में सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज विधानसभा सीट से पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में मलिक मोहम्मद कमाल यूसुफ विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जलील अब्बासी को 24,272 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में मलिक मोहम्मद कमाल यूसुफ को 45,324 वोट मिले, जबकि जलील अब्बासी को 21,052 वोट मिले।

1980 और 1985 का चुनाव
1980 के चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से जनता पार्टी (सेक्युलर) के कमाल यूसुफ विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (आई) के तौफीक अहमद को 14,260 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1985 के चुनाव में डुमरियागंज सीट से लोक दल (LKD) की तरफ से लड़ते हुए कमाल यूसुफ विजयी हुए। यह उनकी लगातार तीसरी जीत थी। इस बार भी उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के तौफीक अहमद को 18,827 वोटों के अंतर से हराया।

1989: डुमरियागंज में पहली बार जीती भाजपा
वहीं 1989 के विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के तौफीक अहमद को 3,015 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी को 41,511 वोट मिले, जबकि तौफीक अहमद को 38,496 वोट मिले।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में डुमरियागंज विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: भाजपा ने दोहराई जीत
1991 के विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के तौफीक अहमद को 1,562 वोटों के अंतर से हराया।

1993: भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
1992 के चुनाव में डुमरियागंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी  के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मलिक कमाल यूसुफ को 9,134 वोटों के अंतर से हराया।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1996: पहली बार जीती सपा
इस चुनाव में बाजी पलटी। इस बार डुमरियागंज विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में तौफीक अहमद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी को 7,017 वोटों के अंतर से हराया।

2002: सपा ने दोहराई जीत
वहीं 2002 के चुनाव में सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के मलिक कमाल यूसुफ विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी को 7,623 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मलिक कमाल यूसुफ को 44,404 वोट मिले, जबकि प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी को 36,781 वोट मिले। वहीं बसपा के अशोक कुमार सिंह 28,153 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2007: पहली बार जीती बसपा
इसके बाद 2007 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में तौफीक अहमद विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कमाल यूसुफ मलिक को 973 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में तौफीक अहमद को 32,626 वोट मिले, जबकि कमाल यूसुफ मलिक को 31,653 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के प्रेम प्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी 28,836 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2010 का उपचुनाव
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट पर वर्ष 2010 में उपचुनाव वहां के तत्कालीन विधायक तौफीक अहमद के असमय निधन के कारण हुआ था। तौफीक अहमद ने 2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीत हासिल की थी और विधायक बने थे। हालांकि, जनवरी 2010 में उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गई, जिसके चलते यहां जून 2010 में उपचुनाव कराना पड़ा।  जून 2010 में हुए इस उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने दिवंगत विधायक तौफीक अहमद की पत्नी खातून तौफीक को अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में खातून तौफीक ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रेम प्रकाश तिवारी को बड़े अंतर से पराजित किया और जीत दर्ज की।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012 में पीस पार्टी ने मारी बाजी
वहीं 2012 के चुनाव में सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज विधानसभा सीट से पीस पार्टी के कमाल यूसुफ मलिक विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सैयदा खातून को 1,589 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कमाल यूसुफ मलिक को 44,428 वोट मिले, जबकि सैयदा खातून को 42,839 वोट मिले। वहीं सपा के राम कुमार उर्फ चिनकू यादव 41,517 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। कामल यूसुफ की डुमरियागंज सीट पर ये पांचवीं जीत थी। यूसुफ इससे पहले 1977,1980 और 1985 में लगातार तीन बार और 2002 में चौथी बार जीत दर्ज कर चुके थे। 

1993 के बाद 2017 में भाजपा ने की वापसी
2017 के चुनाव में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज विधानसभा सीट पर भी देखने को मिला। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राघवेंद्र प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सैयदा खातून को 171 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राघवेंद्र प्रताप सिंह को 67,227 वोट मिले, जबकि सैयदा खातून को 67,056 वोट मिले। वहीं सपा के राम कुमार उर्फ चिनकू यादव 52,222 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

2022: सपा की वापसी हुई
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने वापसी की। चुनाव में  सपा की सैयदा खातून विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 771 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सैयदा खातून को 85,098 वोट मिले, जबकि राघवेंद्र प्रताप सिंह को 84,327 वोट मिले। वहीं बसपा के अशोक कुमार तिवारी 20,416 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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