फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Surat: सूरत में भाजपा की जीत कांग्रेस-आप के लिए कितना बड़ा झटका, आखिर BJP की रणनीति भांपने में कहां हुई चूक?

सार

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गुजरात में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। यदि दोनों पार्टियां बेहतर तालमेल से मैदान में उतरते, तो वे भाजपा के सामने बेहतर चुनौती पेश कर सकते हैं।
विज्ञापन
Mukesh Dalal - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सूरत लोकसभा सीट पर भाजपा को निर्विरोध जीत मिलने से कांग्रेस-गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। हालांकि, सियासी गलियारों में इस प्रकरण कड़ी आलोचना हो रही है और इसकी तुलना चंडीगढ़ मेयर चुनाव से की जा रही है। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। कहा जा रहा है कि 'मिशन सूरत' में भाजपा के निशाने पर कांग्रेस से ज्यादा अरविंद केजरीवाल थे, जिन्होंने सूरत में अपनी जबरदस्त पकड़ बनाकर भगवा दल को परेशान कर दिया था। यदि केजरीवाल सूरत में अपनी जड़ें जमाने में कामयाब हो जाते, तो वे भविष्य में भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकते थे। इसके अलावा जिस तरह आम आदमी पार्टी के नेता भाजपा में शामिल होते गए, उससे भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी को झटका लगा।

विज्ञापन


दरअसल, आम आदमी पार्टी ने सूरत नगर निगम के चुनाव में 27 सीटों पर शानदार जीत हासिल कर ली थी। बाद में हुए गुजरात विधानसभा के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी पांच सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। पार्टी ने 13 फीसदी का शानदार वोट शेयर भी हासिल किया था। उसे जामनगर, भावनगर के इलाकों में अच्छी सफलता मिली थी। सूरत में भी उसने वराछा, करंज और कतारगाम विधानसभा क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अच्छी संख्या में वोट हासिल किए थे। 

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गुजरात में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। यदि दोनों पार्टियां बेहतर तालमेल से मैदान में उतरते, तो वे भाजपा के सामने बेहतर चुनौती पेश कर सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने जिस तरह सुनीता केजरीवाल को आगे रखकर अपनी चालें चलनी शुरू की हैं, पार्टी को उसका भी लाभ मिल सकता है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस लोकसभा चुनाव में भी भाजपा का इस सीट पर जीतना लगभग तय था, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठजोड़ भाजपा के लिए खतरे का संकेत दे सकता था।
विज्ञापन


सौराष्ट्र और पूरे देश को संदेश देने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषक यजुवेंद्र दुबे ने अमर उजाला को बताया कि पिछले चुनाव में सौराष्ट्र क्षेत्र में भाजपा को कुछ टक्कर मिली थी। सौराष्ट्र के ज्यादातर लोग कामकाज और रोजगार के लिए सूरत शहर का ही रुख करते हैं। इसलिए सूरत में बड़ी जीत हासिल कर भाजपा इन प्रवासियों के माध्यम से पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र को एक संदेश देना चाहती है। साथ ही, सूरत से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के लोगों को भी एक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र ने उत्तर भारत में भाजपा की जीत के दरवाजे खोले थे। इस बार भी यहां से उसी तरह का संदेश देने की रणनीति भाजपा अपना रही है।

हर लोकसभा में पांच लाख वोटों के अंतर से जीत का लक्ष्य
गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने राज्य की सभी 26 लोकसभा सीटों पर पांच-पांच लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वे हर दिन पांच से दस सभाएं कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे गुजरात से बड़ी जीत हासिल कर पूरे देश में बड़ा संदेश देना चाहते हैं। इसके लिए उनकी टीम दिनरात एक करने में जुट गई है। 

लिंबायत विधानसभा सीट से विधायक संगीता पाटिल ने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने स्वयं अपनी नवसारी लोकसभा सीट अपने समर्थकों-विधायकों के भरोसे छोड़ दिया है। लेकिन उनकी लोकसभा सीट से हर विधायक ने अपने-अपने क्षेत्र से एक-एक लाख वोटों के अंतर से उन्हें जीत दिलाने की रणनीति अपनाई है। इसके लिए वे लोग लगातार परिश्रम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवसारी से सीआर पाटिल एक बार फिर देश में सबसे बड़ी लोकसभा जीत हासिल करने का रिकॉर्ड बना सकते हैं। पिछले चुनाव में 6.89 लाख वोटों के अंतर से उन्होंने सबसे बड़ी जीत हासिल करने में सफलता पाई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें