झारखंड में विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर भी साफ हो गई है। शनिवार को राज्य की 81 विधानसभा सीटों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 56 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा नीत एनडीए 24 सीटों पर सिमट गया है। शनिवार के परिणामों में लोगों की नजरें क्षेत्रवार नतीजों पर भी रही। तमाम दलों ने क्षेत्र और इलाके के हिसाब से अपनी रणनीतियां बनाईं और इसके तहत चुनाव प्रचार भी किया था। नतीजों से साफ है कि किस क्षेत्र में किसकी मेहनत कितनी रंग लाई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गढ़ संथाल परगना में झामुमो ने बड़ी बढ़त बनाई है। झामुमो से चंपई सोरेन को पार्टी में लाना भाजपा के लिए कुछ खास साबित नहीं हुआ और कोल्हान में भाजपा को फिर झटका लगा है।
आइये जानते हैं कि झारखंड विधानसभा चुनाव में क्षेत्रवार नतीजे कैसे हैं? किस क्षेत्र में किसे ज्यादा सीटें आईं और किसे कहां झटका लगा? 2019 में झारखंड चुनाव में क्षेत्रवार नतीजे कैसे थे?
झारखंड में विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर भी साफ हो गई है। शनिवार को राज्य की 81 विधानसभा सीटों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 56 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा नीत एनडीए 24 सीटों पर सिमट गया है। शनिवार के परिणामों में लोगों की नजरें क्षेत्रवार नतीजों पर भी रही। तमाम दलों ने क्षेत्र और इलाके के हिसाब से अपनी रणनीतियां बनाईं और इसके तहत चुनाव प्रचार भी किया था। नतीजों से साफ है कि किस क्षेत्र में किसकी मेहनत कितनी रंग लाई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गढ़ संथाल परगना में झामुमो ने बड़ी बढ़त बनाई है। झामुमो से चंपई सोरेन को पार्टी में लाना भाजपा के लिए कुछ खास साबित नहीं हुआ और कोल्हान में भाजपा को फिर झटका लगा है।
आइये जानते हैं कि झारखंड विधानसभा चुनाव में क्षेत्रवार नतीजे कैसे हैं? किस क्षेत्र में किसे ज्यादा सीटें आईं और किसे कहां झटका लगा? 2019 में झारखंड चुनाव में क्षेत्रवार नतीजे कैसे थे?
झारखंड में कितने क्षेत्र हैं?
81 विधानसभा सीटों वाला झारखंड सियासी रूप से पांच संभागों में बंटा हुआ है। इन क्षेत्रों के आधार पर ही सत्ता के समीकरण बनते और बिगड़ते हैं। इनमें संथाल परगना, कोल्हान, पलामू, उत्तर छोटानागपुर और दक्षिण छोटानागपुर शामिल हैं। झारखंड में कुल 24 जिले हैं।
अब जानते हैं पूरे राज्य के नतीजे कैसे हैं?
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए पिछले चुनाव 13 नवंबर और 20 नवंबर को हुए थे। नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जा रहे हैं। हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा को सबसे ज्यादा 34 सीटें मिल रही हैं। इसके बाद भाजपा को 21 सीटें मिल रही हैं। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस की 16, राजद की 4 और भाकपा (माले) की 2 सीटों पर बढ़त है। इसके अलावा 1-1 सीट पर आजसू, जदयू, लोजपा (आर) और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा को बढ़त है।
राज्य में क्षेत्रवार नतीजे कैसे?
उत्तर छोटानागपुर: सीटों के लिहाज से उत्तर छोटानागपुर क्षेत्र सबसे अहम क्षेत्र है। राज्य की कुल विधानसभा सीटों में से करीब एक तिहाई पश्चिमी झारखंड से आती हैं। 81 में से 25 सीटें उत्तर छोटानागपुर क्षेत्र की हैं। ये सीटें बोकारो, चतरा, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा और रामगढ़ जिले की हैं। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी यहां भारतीय जनता पार्टी सभी दलों पर भारी रही। 2019 में उत्तर छोटानागपुर की कुल 25 सीटों में से भाजपा ने सबसे ज्यादा 11 सीटें जीती थीं और इस बार 1 सीट का फायदा हुआ है। कांग्रेस की 5 से घटकर 3 सीटें हो गई हैं। वहीं, आजसू को पिछली बार की तरह 1 सीट मिली है। अन्य को 4 सीट पर सफलता मिली है।
संथाल परगना: यह क्षेत्र दूसरे सबसे ज्यादा 18 विधायक चुनकर विधानसभा में भेजता है और यहीं से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आते हैं। संथाल परगना में देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज जिले आते हैं। 2019 की तरफ इस बार भी यहां झामुमो अपना गढ़ बरकरार रखने में सफल रही। संथाल परगना की 18 सीटों में से झामुमो ने सबसे ज्यादा 9 सीटें जीती थीं जो इस बार 11 हो गई है। वहीं भाजपा 4 सीट से घटकर 1 सीट पर आ गई है। इसके अलावा अन्य को 2 सीट मिली हैं।
दक्षिण छोटानागपुर: यह इलाका भी राजनीतिक नजरिए से पार्टियों का तय भाग्य करने में अहम भूमिका निभाता है। दक्षिण छोटानागपुर में 5 जिले आते हैं जिनमें गुमला, खूंटी, लोहरदगा, रांची और सिमडेगा शामिल हैं। 2019 के चुनाव में दक्षिण छोटानागपुर की कुल 15 सीटों में से भाजपा ने सर्वाधिक 5 सीटें जीती थीं जो इस बार 2 पर अटक गई। वहीं झामुमो और कांग्रेस ने 4-4 सीटें जीती थीं जो इस बार बढ़कर क्रमशः 7 और 6 हो गया है। इसके अलावा 1-1 सीट झाविमो और आजसू को मिली थी जो इस बार शून्य हैं।
कोल्हान: झारखंड का यह क्षेत्र चौथा बड़ा क्षेत्र हैं जहां से 14 विधायक चुनकर आते हैं। कोल्हान में पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां जिला और पश्चिमी सिंहभूम जिले आते हैं। कोल्हान से ही पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन आते हैं जो झामुमो छोड़ इस बार भाजपा में आए लेकिन भाजपा के लिए खास फायदा नहीं हुआ। 2019 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने यहां सफाया किया था। पिछले चुनाव में कोल्हान की कुल 14 सीटों में से झामुमो ने सर्वाधिक 11 सीटें जीती थीं जबकि इस बार 10 सीटें मिल रही हैं। भाजपा ने यहां खाता खोलते हुए 2 सीटें जीती हैं। कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थीं जबकि इस बार 1 सीटें मिल रही है।