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LS Polls 2024: मायावती के राजनीतिक गुणा-गणित ने कहीं भाजपा तो कहीं उड़ाए सपा के होश; समझें सियासी समीकरण

सार

बसपा का 2014 में नतीजा निराशाजनक था। 2019 में उसके सपा-रालोद के साथ गठबंधन में 10 प्रत्याशी जीते थे। इस बार अकेले चुनाव लड़ रही है। वोट प्रतिशत के लिहाज से देखें, तो सबसे अधिक वोट भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास है। दूसरे नंबर पर इंडिया गठबंधन है। तीसरे नंबर पर बसपा है।
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मायावती - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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नाम के अनुरुप बसपा सुप्रीमो मायावती की माया निराली है। अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। भाजपा ने रायबरेली के प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। दिलचस्प है कि मायावती ने भी अमेठी और रायबरेली दोनों जगह प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। जौनपुर की लोकसभा सीट पर चलिए। भाजपा ने कृपाशंकर सिंह को उम्मीदवार बनाया। सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को। कुशवाहा पूर्व बसपाई हैं और मायावती ने उनकी मुसीबत बढ़ाने के लिए श्रीकला धनंजय सिंह को उम्मीदवार बना दिया, जबकि कभी तुर्रे में आकर ही बसपा का सांसद रहते हुए धनंजय सिंह के बयान ने मायावती को दुखी कर दिया था।

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जौनपुर में धनंजय सिंह का अपना वोटों का आधार हैं। उनकी पत्नी श्रीकला अपने पति धनंजय सिंह के भरोसे जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। अब बसपा से टिकट, झंडा मिल जाने के बाद मजबूती से मैदान में उतर गई हैं। वरिष्ठ पत्रकार श्याम नारायण पांडे कहते हैं कि इसमें दो बात तय हो गई है। पहली श्रीकला धनंजय सिंह चुनाव जीत सकती हैं। कदाचित चुनाव न जीतीं, तो वह भाजपा के मजबूत प्रत्याशी को हरा जरूर देंगी। दोनों में जो भी हो गया, वह पूर्व सांसद धनंजय सिंह के राजनीतिक रसूख को बनाए रखेगा। इस तरह से बसपा के रुख से कहीं इंडिया गठबंधन, तो कहीं भाजपा के चुनावी रणनीतिकार परेशान हैं।

मुस्लिम वोटों में सेंध लगा रही है बसपा
लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले तक कांग्रेस के रणनीतिकारों को उत्तर प्रदेश और देश के मुसलमान का एकमुश्त वोट मिलने की उम्मीद थी। उत्तर प्रदेश में सपा के साथ चुनावी गठबंधन के बाद दोनों दल इस इस वोट बैंक पर अपना दावा मजबूत समझ रहे थे। लेकिन मायावती ने समय देखकर बसपा के प्रत्याशियों की घोषणा की। सपा के एक बड़े नेता का भी कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छह से अधिक सीटों पर मायावती के उम्मीदवार ने आकर मुकाबले को त्रिकोणीय कर दिया है। सूत्र का कहना है कि इनमें से बसपा एक या दो सीट ही जीतेगी, लेकिन कई सीटों पर दूसरों का गणित खराब कर रही है। सहारनपुर से कांग्रेस इमरान मसूद चुनाव लड़ रहे हैं। अच्छा लड़ते, लेकिन बसपा के माजिद अली ने आकर लड़ाई को रोचक बना दिया। वहां मतदान भी हो गए। बिजनौर में भी बसपा का उम्मीदवार अच्छी फाइट दे रहा है। मेरठ में कल मतदान होना है। यहां भी समीकर बसपा के कारण पेंचीदा हो रहा है। मुरादाबाद में एसटी हसन का टिकट काटकर सपा ने रुचि वीरा को टिकट दिया। 
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बसपा ने इरफान सैनी को उम्मीदवार बना दिया। आजमगढ़ आ जाइए। कल तक भीम राजभर बसपा के उम्मीदवार थे। कल बसपा ने उन्हें सलेमपुर से उम्मीदवार बना दिया। सीट बदल दी। भीम आजमगढ़ में राजभर और बसपा का वोट पाते तो भाजपा के उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ की मुश्किल बढ़तीं। अब वह सलेमपुर चले गए, तो आजमगढ़ में चुनाव लड़ने वाले सपा के धर्मेंद्र यादव की मुश्किलें थोड़ा बढ़ गई हैं। बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतार दिया तो धर्मेंद्र यादव की सांसत थोड़ा और बढ़ेगी। गाजीपुर में उमेश सिंह बसपा प्रत्याशी हैं। कहीं न कहीं खेल बिगाड़ेंगे। भदोही में इरफान अहमद (बबलू) बसपा प्रयाशी होंगे। जाहिर है, यहां भी मुस्लिम मतों में सेंध लगेगी। फायदे में भाजपा रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों में अमरोहा, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर आंवला, पीलीभीत, बिजनौर महत्वपूर्ण हैं। यहां बसपा ने पेंच फंसा रखा है।

भाजपा के लिए चिंता का सबब हैं मायावती
बसपा ने बागपत सीट से गुर्जर प्रवीण बंसल को उम्मीदवार बनाया। प्रवीण बंसल जाट बाहुल सीट पर सपा के अमरपाल शर्मा को कड़ी टक्कर देंगे। इस तरह से राजकुमार सांगवान की लड़ाई थोड़ा आसान हो गई है। करीब 50 सीटों पर घोषित प्रत्याशियों में 11 मुस्लिम हैं, तो मिर्जापुर, अकबरपुर, उन्नाव से ब्राह्मण प्रत्याशी हैं। कैराना, मुजफ्फरनगर में भी भाजपा का खेल बिगाड़ रही है। फतेहपुर सीकरी, फैजाबाद, अलीगढ़, धौरहरा, बस्ती से बसपा के ब्राह्मण मैदान में हैं। कई सीटों पर यह भाजपा का गणित बिगाड़ सकते हैं। जौनपुर की सीट पर श्रीकला धनंजय सिंह की उम्मीदवारी भी भाजपा की जीत में रोड़े अटका सकती हैं। कन्नौज से भी अखिलेश यादव मैदान में हैं। वहां से बसपा ने मुसलमान प्रत्याशी उतारा है। इसका फायदा अखिलेश को मिलना तय है, क्योंकि अल्पसंख्यक प्रत्याशी का वोट अखिलेश को मिलेगा और उनके वोट कटने की संभावना कम रहेगी। भाजपा प्रत्याशी की मुसीबत बढ़ेगी।

गुणा-गणित में कितनी सीटें जीतेगी बसपा?
बसपा का 2014 में नतीजा निराशाजनक था। 2019 में उसके सपा-रालोद के साथ गठबंधन में 10 प्रत्याशी जीते थे। इस बार अकेले चुनाव लड़ रही है। वोट प्रतिशत के लिहाज से देखें, तो सबसे अधिक वोट भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास है। दूसरे नंबर पर इंडिया गठबंधन है। तीसरे नंबर पर बसपा है। 2014 में बसपा के चुनाव नतीजे और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वोट प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो बसपा का खाता खुलना थोड़ा मुश्किल सा है। लेकिन चुनाव में नतीजे उलटने-पलटने की दृष्टि से देखा जाए, तो बसपा के उम्मीदवार निर्णायक प्रभाव डाल सकते हैं। चुनावी विश्लेषकों ने भी इसे दूसरे तरीके से लिया है। उनका कहना है कि बसपा का ध्यान 2027 पर है। इस बार वह केवल सोशल इंजीनियरिंग के सहारे राजनीतिक खेल कर रही हैं।

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