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एक सियासत ऐसी भी: रोहित पाटिल पिता की राजनीतिक विरासत संभालने को तैयार, बागी अजित पवार के खिलाफ बयान से इनकार

Thu, 31 Oct 2024 02:21 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

देश और महाराष्ट्र की राजनीति में मर्यादाएं कई बार तार-तार हुई हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम एक ऐसे बेटे से जुड़ा है, जिसने दिवंगत पिता के खिलाफ बयान देने और पार्टी से बगावत कर उपमुख्यमंत्री पद पाने वाले नेता के खिलाफ कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। मामला अजित पवार, आरआर पाटिल और पाटिल के बेटे रोहित से जुड़ा है।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में रोहित पाटिल और अजित पवार के भाग्य का फैसला होगा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधानसभा 2024 की सरगर्मियों के बीच राज्य के पूर्व गृह मंत्री आरआर पाटिल के बेटे रोहित पाटिल ने बड़ा बयान दिया। रोहित ने कहा कि वे एनसीपी नेता अजित पवार के खिलाफ कोई बयान नहीं देंगे। मामला अजित पवार की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दिवंगत गृह मंत्री पाटिल पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया था। दरअसल, गृह मंत्री रहने के दौरान आरआर पाटिल ने अजित पवार से जुड़े एक मामले में खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। यह मामला सिंचाई विभाग में कथित तौर पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले का था। रोहित ने इस संबंध में कहा कि जांच के आदेश इसलिए दिए गए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। 
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सिंचाई परियोजना में 70,000 करोड़ रुपये का कथित घोटाला
रोहित पाटिल ने कहा कि जब राज्य में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन (एमवीए सरकार) सत्ता में था, तब गृह मंत्री के रूप में उनके पिता ने जांच का आदेश देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किए होंगे। बता दें कि एमवीए सरकार के कार्यकाल में जल संसाधन विकास मंत्री रहे अजित पवार पर एक सिंचाई परियोजना में 70,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में संलिप्त होने का आरोप लगा था। रोहित पाटिल ने कहा, 'दादा (अजित पवार) एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने मेरे पिता के साथ काम किया था। वास्तव में, एमवीए सरकार के दौरान, हम 800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं ला सके और दादा ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। इसके लिए मैं उनका आभारी हूं। इसलिए मैं उनके खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोलूंगा।'

अजित ने फडणवीस को समर्थन दिया, दो दिन बाद जांच बंद
हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि जुलाई, 2020 में भाजपा को समर्थन देने वाले अजित पवार को क्लीन चिट मिल गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को समर्थन देने की घोषणा के केवल दो दिन बाद ही अजित से जुड़े इस मामले में महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले से संबंधित नौ मामले बंद कर दिए। हालांकि एसीबी ने यह भी स्पष्ट किया था कि अजित पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और भ्रष्टाचार के मामलों के बंद होने के बीच कोई संबंध नहीं है।
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एनसीपी के वयोवृद्ध नेता शरद पवार से करीबी
गौरतलब है कि आरआर पाटिल का साल 2015 में निधन हो गया था। साल 2022 में अजित पवार की बगावत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो फाड़ होने से पहले अजित और आरआर पाटिल को करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता था। यही नहीं दिवंगत नेता एनसीपी के वयोवृद्ध नेता शरद पवार के भी खास माने जाते थे।

रोहित पाटिल के पिता ने 57 साल की आयु में ली अंतिम सांस
महाराष्ट्र की राजनीति में आरआर पाटिल की छवि 'मिस्टर क्लीन' यानी बेदाग राजनेता की रही। समर्थकों के बीच आरआर आबा नाम से लोकप्रिय रहे पाटिल दलगत राजनीति से परे होने के कारण काफी लोकप्रिय भी रहे। महज 57 साल की आयु में अंतिम सांस लेने वाले पाटिल छह बार विधायक रहे। उन्होंने गृह मंत्रालय के अलावा ग्रामीण विकास विभाग और कुछ समय के लिए उपमुख्यमंत्री का पदभार भी संभाला।

पिता की राजनीतिक विरासत संभालने को तैयार
पाटिल का कार्यकाल इसलिए भी याद किया जाता है कि क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र में डांस बार पर प्रतिबंध लगाने, नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण नीति का मसौदा तैयार करने और विवाद मुक्त गांवों के लिए एक योजना तैयार की। उन्हें वैकल्पिक विवाद समाधान के लिए तंटामुक्त गांव (महात्मा गांधी तंटामुक्त गांव योजना) और संत गाडगेबाबा स्वच्छता अभियान शुरू करने का भी श्रेय दिया जाता है। तंटामुक्त योजना का मकसद ग्रामीण स्तर पर ही विवादों के निपटारे की प्रणाली तैयार करना था। उनके निधन के बाद पत्नी सुमन पाटिल ने सांगली जिले के तासगांव-कवठे महांकाल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इस बार उनके बेटे रोहित इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

मुंबई आतंकी हमलों के बाद इस्तीफा
बता दें कि आरआर पाटिल करीब 16 साल पहले हुए मुंबई आतंकी हमले के समय महाराष्ट्र के गृह मंत्री रहे थे। 26/11 आतंकी हमले के बाद उन्होंने दिसंबर, 2008 में इस्तीफा दे दिया था। आतंकी हमलों को पूरी तरह से खुफिया विफलता मानने से इनकार करने वाले पाटिल को आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। मुंह के कैंसर से पीड़ित रहे पाटिल के जीवन के अंतिम दिनों में उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, जिसके कारण फरवरी, 2025 में उनका निधन हो गया।
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