पिछले चुनाव में कैसे थे एग्जिट पोल के नतीजे?
महाराष्ट्र: 21 सितंबर 2019 को चुनाव आयोग ने राज्य में विधानभा चुनावों का एलान किया। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला दो प्रमुख गठबंधनों के बीच था। पहला भाजपा और शिवसेना का गठबंधन जिसकी उस वक्त सरकार थी। वहीं, विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस और एनसीपी शामिल थे। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए 21 अक्तूबर, 2019 को वोट डाले गए। 24 अक्तूबर 2019 को मतगणना कराई गई थी।
मतदान के बाद तमाम न्यूज चैनलों और चुनाव सर्वे एजेंसियों ने एग्जिट पोल नतीजे में आसानी से भाजपा-शिवसेना की सरकार बनती दिखाया था। पांच प्रमुख एग्जिट पोल में सत्ताधारी भाजपा और शिवसेना को एकतरफा 193 से 223 सीटें जीतते हुए दिखाया गया था। वहीं विपक्षी गठबंधन ने विपक्षी गठबंधन (कांग्रेस और एनसीपी) को 50 से 90 के बीच सीटें दी थीं।
झारखंड: 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए पिछले चुनाव 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 तक हुए थे। ये चुनाव पांच चरणों में कराए गए थे जिसमें कुल 65.18 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। नतीजे 23 दिसंबर 2019 को घोषित किए गए। 2019 के अधिकतर एग्जिट पोल में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन को एनडीए के मुकाबले आगे दिखाया गया था। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का अनुमान जताया गया था। झारखंड में सत्ता में किसकी वापसी होगी, इसका अनुमान स्पष्ट नहीं था।
एग्जिट पोल्स के बाद नतीजे कैसे रहे?
महाराष्ट्र: जब नतीजे आए तो ज्यादातर एग्जिट पोल के अनुमान सटीक नहीं ठहरे। जहां अधिकतर अनुमानों में सत्ताधारी भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को 200 या इससे अधिक सीटें जीतते दिखाया गया था। वहीं, नतीजों में भाजपा और शिवसेना को बहुमत मिला। 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिलीं। वहीं, भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना को 56 सीटें आई थीं। इस तरह इस गठबंधन को कुल 161 सीटें मिलीं, जो बहुमत के आंकड़े 145 से काफी ज्यादा था। दूसरी ओर एनसीपी को 54 सीटें जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं।
विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना और भाजपा में ठन गई। विवाद इतना बढ़ा कि शिवसेना ने एनडीए से अलग होने का फैसला ले लिया। कई दिनों तक राज्य में उहापोह की स्थिति बनी रही। कुछ दिनों तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा रहा। बाद में भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के कुछ विधायकों के साथ तीन दिन तक सरकार चलाई, लेकिन बहुमत परीक्षण से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी गठजोड़ से हाथ मिलाया और महाविकास अघाड़ी के नाम से नई सरकार बनी। इस सरकार में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और करीब ढाई साल उनकी सरकार चली। 2022 में तत्कालीन मंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना के खिलाफ बगावत कर दी। शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने और अगले साल अजित पवार एनसीपी तोड़ महायुति सरकार में शामिल हो गए।
झारखंड: प्रदेश में 2019 के एग्जिट पोल्स काफी हद तक सही साबित हुए थे। 81 सदस्यीय विधानसभा में जब नतीजे सामने आए तो सत्ताधारी भाजपा को झटका लगा और वह 41 सीटों के जादुई आंकड़ों से पिछड़ गई। हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को सबसे ज्यादा 30 सीटें आईं। इसके बाद भाजपा को 25 सीटें मिलीं। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस के 16 विधायक, झाविमो के तीन और आजसू के दो विधायक जीते। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक जबकि राजद, भाकपा (माले) और एनसीपी के एक-एक विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। नतीजों से साफ था कि झामुमो के नेतृत्व वाला गठजोड़ बहुमत के आंकड़े के पार था।