Nawab Malik: एनसीपी (अजित गुट) द्वारा नवाब मलिक को अपना उम्मीदवार बनाने के बाद महायुति के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। नामांकन की आखिरी तारीख 29 अक्तूबर को मलिक ने एनसीपी के उम्मीदवार के तौर पर मानखुर्द शिवाजी नगर सीट से नामांकन किया। आशीष शेलार समेत भाजपा के कई नेताओं ने मलिक की उम्मीदवारी का विरोध किया है।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। मंलवार (29 अक्तूबर) नामांकन की आखिरी तारीख रही। अंतिम दिन कई प्रमुख चेहरों ने अपना नामांकन दाखिल किया। इनमें राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक भी शामिल हैं। मलिक ने मंगलवार को मानखुर्द सीट से पर्चा भरा। पूर्व मंत्री मलिक ने एनसीपी (अजित गुट) के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया। नवाब मलिक के एनसीपी से नामांकन के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और हर ओर से बयानबाजी हो रही है। भाजपा ने एक बार फिर मलिक की उम्मीदवारी का विरोध किया है। मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा कि उनकी पार्टी नवाब मलिक का प्रचार नहीं करेगी। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मलिक को 'दाऊद का सहयोगी' कहा और चुटकी ली कि कैसे एक 'दाऊद का दोस्त' भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ रहा है।
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कई बार के विधायक नवाब मलिक एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। मलिक को प्रवर्तन निदेशालय ने फरवरी 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ उसके कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में वह जमानत पर बाहर आ गए और अब नाटकीय रूप से एनसीपी उम्मीदवारी के रूप में चुनाव मैदान में भी कूद गए हैं।
क्या है नवाब मलिक की कहानी?
वह अजित पवार वाली एनसीपी के नेता हैं। नवाब मलिक अभी मुंबई की अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह उद्धव ठाकरे वाली सरकार में अल्पसंख्यक विकास, औकाफ, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता मंत्री रहे हैं। नवाब मलिक गोंदिया और परभणी जिले के संरक्षक मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मुंबई अध्यक्ष और महाराष्ट्र के आवास मंत्री जैसे पदों पर भी रहे हैं।
नवाब मलिक, नेता, एनसीपी
- फोटो : X / @nawabmalikncp
यूपी से मुंबई आया परिवार और कबाड़ का व्यापार शुरू किया
20 जून 1959 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील के छोटे से धुसवा गांव में मलिक का जन्म हुआ। उनका परिवार 1970 में मुंबई चला गया। धुसवा के लोग बताते हैं कि उनके पिता मोहम्मद इस्लाम मलिक ने शुरू में दक्षिण मुंबई के डोंगरी में चिंदी का छोटा सा कारोबार शुरू किया था और बाद में वे कुर्ला चले गए। कुर्ला में मलिक ने अपने पिता को कबाड़ खरीदने-बेचने का व्यवसाय शुरू करने में मदद की। मलिक ने एक न्यूज एजेंसी से इस बारे में कहा, 'कबाड़ीवाला बनने में क्या गलत है? हम राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं, कचरे को संपदा में बदल रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है।'
नवाब मलिक ने मुंबई के नूर बाग म्युनिसिपल स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा हासिल की। बाद में अंजुमन इस्लाम हाई स्कूल, सीएसटी से अपनी हाई स्कूलिंग पूरी की। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा मुंबई के बुरहानी कॉलेज से हासिल की। तब से उन्होंने छात्र आंदोलन और युवा कांग्रेस के साथ भी काम किया।
राजनीतिक सफर कैसा रहा है?
नवाब मलिक की राजनीतिक यात्रा 1979 में शुरू हुई, जब उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय की फीस वृद्धि के खिलाफ शहर भर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। उन्होंने मेनका गांधी द्वारा अपने पति संजय गांधी की मृत्यु के बाद शुरू की गई पार्टी 'संजय विचार मंच' के साथ राजनीति में प्रवेश किया।
मलिक ने पहली बार 1984 में कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय गुरुदास कामत के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह बड़े अंतर से हार गए थे। बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने कुछ समय तक कांग्रेस के साथ भी काम किया। मलिक उपचुनाव जीतकर विधायक बने और इसके बाद 1999 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार में उन्हें राज्य मंत्री का पद दिया गया।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी के साथ अनबन के बाद मलिक पार्टी छोड़कर शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए और राज्यमंत्री और बाद में कैबिनेट मंत्री बने। जुलाई 2004 में वे विशेष सहायता और तकनीकी शिक्षा के लिए राज्य मंत्री बने।
विवादों से भी रहा नाता, जेल तक गए
2005 में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मलिक पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और उन्हें चार अन्य मंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। मलिक ने अपने विरुद्ध सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और एनसीपी के लिए काम करना जारी रखा। धीरे-धीरे उन्हें पवार परिवार सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं का विश्वास प्राप्त हुआ।
पिछले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर वह अणुशक्ति नगर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। 2019 में जब शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस महाविकास अघाड़ी ने सत्ता संभाली, तो मलिक को कैबिनेट में जगह मिली। सरकार में उन्हें अल्पसंख्यक विकास, औकाफ, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
हालांकि, उन्हें एनसीपी नेता को तब झटका लगा जब उनके दामाद समीर खान को एनसीबी ने पकड़ लिया और आखिरकार आठ महीने से अधिक समय के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। उनकी मुश्किलें यहीं कम नहीं हुईं। मलिक को 2022 में एनआईए द्वारा दाऊद और उसके साथियों छोटा शकील और टाइगर मेमन के खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस साल जुलाई में उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत दी गई। एनसीपी में टूट के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट ने उन्हें अपने पाले में ले लिया।
एनसीपी प्रमुख अजित पवार और एनसीपी नेता नवाब मलिक
- फोटो : ANI
नाटकीय रूप में एनसीपी से भरा पर्चा
अजित पवार की पार्टी एनसीपी मलिक को इस बार भी विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहती थी। हालांकि, शुरू से ही एनसीपी की सहयोगी भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मलिक की उम्मीदवारी का विरोध किया। मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार ने एक टीवी चैनल से कहा कि उनकी पार्टी नवाब मलिक की उम्मीदवारी के खिलाफ है। शेलार ने कहा, 'हम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े किसी व्यक्ति को टिकट देना स्वीकार नहीं करेंगे।'
इसके बाद नवाब मलिक की अणुशक्ति नगर सीट से एनसीपी ने उनकी बेटी सना मलिक को उम्मीदवार बना दिया। इस बीच, नामांकन के अंतिम दिन (29 अक्तूबर) को नवाब मलिक ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) के उम्मीदवार के तौर पर मानखुर्द शिवाजी नगर सीट से पर्चा भर दिया। नामांकन के बाद नवाब मलिक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, 'मंगलवार को मैंने एनसीपी उम्मीदवार के तौर पर मानखुर्द शिवाजी नगर विधानसभा सीट से नामांकन किया। मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी पर्चा दाखिल किया था। लेकिन पार्टी ने एबी फॉर्म भेजा और हमने इसे मंगलवार दोपहर 2.55 बजे जमा कर दिया और अब मैं एनसीपी का आधिकारिक उम्मीदवार हूं।'
एनसीपी नेता ने मलिक उन पर भरोसा जताने के लिए एनसीपी नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'मैं उपमुख्यमंत्री अजित पवार, एनसीपी नेता और राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और एनसीपी नेता सुनील तटकरे का बहुत आभारी हूं। उन्हें मुझ पर चुनाव जीतने के लिए भरोसा है।'
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने इस सीट पर शिवसेना के सुरेश कृष्ण पाटिल को 'आधिकारिक' उम्मीदवार बताया है।