लोकसभा चुनाव में पिछली बार के मुकाबले भाजपा के खराब प्रदर्शन के लिए बड़े राज्यों में उसके मत प्रतिशत में आई गिरावट जिम्मेदार है। समूचे देश में पार्टी को 36.56 फीसदी मत हासिल हुए। पिछली बार के 37.30 के मुकाबले महज 0.74 फीसदी की कमी आने से उसे 63 सीटों का घाटा झेलना पड़ा। सबसे बड़ा घाटा उसे पांच बड़े राज्यों यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान ने दिया। इन राज्यों में कुल मिलाकर औसतन 5 फीसदी कम वोट मिलने का खामियाजा भाजपा को कुल 61 सीटें गंवाने के रूप में भुगतना पड़ा। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को इस बार 21.19 फीसदी वोट मिले जो पिछली बार 19.46 फीसदी थे। देखने में यह अंतर बेहद मामूली लगता हो लेकिन पार्टी की सीटों की संख्या बढ़ाने में इसने बड़ा योगदान दिया है।
80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश (यूपी) में भाजपा को पिछली बार 49.98 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार इसमें करीब साढ़े आठ फीसदी की गिरावट आ गई। पार्टी को 41.37 फीसदी वोट मिले और उसके सीटों की संख्या 26 घट गई। खास बात यह है कि पिछली बार 5 सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी को तब 18.11 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार उसे 33.59 फीसदी वोट के साथ 37 सीटें मिल गईं। यानी पार्टी के वोट शेयर में करीब 15 फीसदी का उछाल आया। राज्य में पिछली बार अपने दम पर चुनाव लड़ी कांग्रेस को तब सिर्फ 6.36 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार उसे सपा के साथ साझेदारी में कम सीटों पर लड़कर भी 9.46 फीसदी वोट मिले और पिछली बार से 5 सीटें ज्यादा मिलीं।
भाजपा को वोटों का दूसरा बड़ा झटका राजस्थान में लगा जहां उसे 2019 में 59.07 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार सिर्फ 49.24 फीसदी वोट मिले और उसके सीटों की संख्या 10 घट गई। उसके उलट कांग्रेस का वोट प्रतिशत पिछली बार के 34.24 के मुकाबले इस बार सिर्फ साढ़े तीन फीसदी बढ़ा मगर उसे 8 सीटें मिली जो पिछली बार शून्य थीं।
दो फीसदी की कमी के साथ मध्य प्रदेश में शून्य पर कांग्रेस
भाजपा को 240 की संख्या तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश का बहुत बड़ा हाथ है जहां उसने सभी 29 सीटें जीतीं। यहां पार्टी को पिछली बार 28 सीटें और 58 फीसदी वोट मिले थे। इस बार पार्टी को 59.27 फीसदी वोट मिले। वहीं कांग्रेस ने 2019 में 34.5 फीसदी वोट के साथ एक सीट जीती थी मगर इस बार उसे 32.44 फीसदी वोट मिले। पार्टी यहां से छिंदवाड़ा की वह सीट भी हार गई जो पिछले कई चुनावों से उसका गढ़ था।
सिर्फ 0.31 फीसदी वोटों ने कम कर दीं 13 सीटें
भाजपा को सीटों का दूसरा सबसे बड़ा झटका महाराष्ट्र में लगा जहां उसे इस बार 14 सीटें कम मिली हैं। कांग्रेस-एनसीपी(शरद)-शिवसेना(उद्धव) गठबंधन को 43.91% वोट मिले, जबकि भाजपा गठबंधन को 43.60%। सिर्फ 0.31% मतों के अंतर से कांग्रेस गठबंधन ने 30 सीटें जीत लीं, एनडीए 17 पर सिमट गया। यहां भाजपा का वोट प्रतिशत 1.66% कम हुआ है। 2019 में 27.84% वोट के साथ 23 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार 26.18% वोट और 9 सीटें मिलीं। कांग्रेस का वोट शेयर 16.41 फीसदी के मुकाबले सिर्फ आधा फीसदी बढ़कर 16.92 पहुंचा, मगर सीटों की संख्या एक से बढ़कर 13 पहुंच गई।
बंगाल में ढाई फीसदी वोटों से दीदी बनीं चैंपियन
भाजपा को बंगाल में 2019 में 40.7% वोट और 18 सीटें मिली थीं। इस बार 38.73% वोटों के साथ 12 सीटें मिलीं। वहीं, ममता बनर्जी के वोट ढाई फीसदी बढ़ गए, जबकि सीटें सात बढ़ीं। पिछली बार 43.3% के साथ उसे 22 सीटें मिलीं, जबकि इस बार 45.76% वोटों के साथ 29 सीटें मिलीं।
आठ फीसदी के उछाल से भी राजद को खास फायदा नहीं
बिहार में राजद को पिछली बार कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने पर 15.36% वोट और शून्य सीटें मिली थीं, जबकि इस बार कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में लड़ने पर 8 फीसदी ज्यादा 23.58% वोट के साथ चार सीटें मिलीं। वहीं, भाजपा का गठबंधन करीब-करीब पिछली बार की तरह ही था, लेकिन उसका वोट करीब तीन प्रतिशत गिर गया और सीटों की संख्या 17 से गिरकर 12 रह गईं। पार्टी को पिछली बार 23.58 जबकि इस बार 20.52 फीसदी वोट मिले।
पार्टियों को मिले मत प्रतिशत
| पार्टी |
2024 (%) |
2019 (%) |
| भाजपा |
36.56 |
37.30 |
| कांग्रेस |
21.19 |
19.46 |
| तृणमूल |
4.37 |
4.06 |
| सपा |
4.58 |
2.55 |
| बसपा |
2.04 |
3.62 |
| डीएमके |
1.82 |
2.34 |
| टीडीपी |
1.98 |
2.04 |
| वाईएसआरसीपी |
2.06 |
2.53 |
| जदयू |
1.25 |
1.45 |
| राजद |
1.57 |
1.08 |
| आप |
1.11 |
सभी राज्यों में नहीं लड़ा था चुनाव |
| शिवसेना-शिंदे |
1.15 |
पार्टी अस्तित्व में नहीं थी |
| शिवसेना उद्धव |
1.48 |
2.09 |
| एनसीपी-अजीत |
0.32 |
पार्टी अस्तित्व में नहीं थी |
| एनसीपी-शरद |
0.92 |
1.38 |
| नोटा |
0.99 |
1.06 |
| अन्य |
16.61 |
19.04 |