पहले आम चुनाव में जहां सभी पार्टियां जनसभाएं कर चुनाव प्रचार कर रही थीं, वहीं कम्युनिस्ट पार्टी अकेली ऐसी पार्टी थी, जिसको रेडियो पर प्रचार करने का मौका मिला था। आकाशवाणी पर नहीं, बल्कि रेडियो मॉस्को पर। यह रेडियो स्टेशन ताशकंद में अपने ट्रांसमीटर के जरिए इसका चुनाव प्रचार करता था।
आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि देश में चुनाव अभियान की शुरुआत नकली चुनाव के रूप में हुई थी। आम चुनाव से पहले सितंबर, 1951 में नकली चुनाव कराया गया। इसका मकसद देश के नागरिकों को चुनाव प्रक्रिया से परिचित कराना था। पहला आम चुनाव 25 अक्तूबर, 1951 से 21 फरवरी, 1952 तक आयोजित किया गया। 10 फरवरी, 1952 को नतीजे घोषित किए गए। पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में स्वतंत्र भारत की पहली सरकार बनी। पहली लोकसभा में रिकार्ड 677 दिन काम हुआ।
कांग्रेस ने जानवरों की पीठ पर लिखकर मांगे थे वोट
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जमाना ऐसा था कि जानवरों की पीठ पर वादे लिखकर भी वोट मांगा जाता था। बात पश्चिम बंगाल की हो रही है। पहले आम चुनाव में यहां के लोगों ने चुनाव प्रचार का अनोखा तरीका निकाला था। आवारा मवेशियों की पीठ पर लिखा होता था, कांग्रेस को वोट दीजिए।
कम्युनिस्ट पार्टी ने रेडियो पर किया प्रचार
पहले आम चुनाव में जहां सभी पार्टियां जनसभाएं कर चुनाव प्रचार कर रही थीं, वहीं कम्युनिस्ट पार्टी अकेली ऐसी पार्टी थी, जिसको रेडियो पर प्रचार करने का मौका मिला था। आकाशवाणी पर नहीं, बल्कि रेडियो मॉस्को पर। यह रेडियो स्टेशन ताशकंद में अपने ट्रांसमीटर के जरिए इसका चुनाव प्रचार करता था।