जब मुकाबला हाईप्रोफाइल हो, तो बात जज कद्दावर प्रत्याशियों की ही होती है... मुद्दे कहीं पीछे चले जाते हैं। बिहार की सारण सीट पर कुछ ऐसा ही माहौल है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य और भाजपा नेता तथा केंद्र सरकार में मंत्री रहे 62 वर्षीय राजीव प्रताप रूडी आमने-सामने हैं। छपरा शहर के गली-चौराहों पर बात इन दोनों की तो होती है, पर मुद्दे कम सुनाई देते हैं। मजेदार यह कि दोनों प्रत्याशी भी एक-दूसरे पर ही ज्यादा वार करते हैं। मुद्दों की बात किसान, मजदूर, छात्र और हाशिये के लोग ही करते हैं। बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, महंगी चिकित्सा सुविधा सब मुद्दे हैं, पर गौण हैं। सारण का महत्व केवल लालू की बेटी के चुनाव लड़ने से ही नहीं है। यह जगह समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और भोजपुरी लोकगीतों के पितामह भिखारी ठाकुर की जन्मभूमि है।
लाने का श्रेय लालू प्रसाद यादव को जाता है। छपरा शहर में चंदन जूस कॉर्नर पर मौजूद चंदन कहते हैं कि मुकाबला तो कांटे का होगा, पर भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है। वहीं, मौजूद छात्र प्रीतम सिंह कहते हैं कि मोदी ने मंदिर बनवाया है, हमारा तो उन्हें समर्थन है। होटल मालिक वीरेश यादव कहते हैं, यहां बेला में रेलवे व्हील प्लांट लालू की देन है, उससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। यहां जो भी विकास है, उसमें लालू के योगदान को भुला नहीं सकते, हमें उनका कर्ज अदा करना है। वहीं, महिलाएं रोहिणी को देखने के लिए खासी उत्सुक रहती हैं।
वहीं, रूडी ने केंद्र में कौशल विकास राज्य मंत्री रहते हुए यहां कई कौशल विकास केंद्र खुलवाए। सड़कों का जाल बिछाया और दियारा इलाके में बिजली पहुंचवाई। पायलट लाइसेंस धारी रूडी इस क्षेत्र में खासे लोकप्रिय हैं। इसी वजह से वे चार बार सांसद बने और चार बार के ही सांसद लालू की बेटी को चुनौती पेश कर रहे हैं। पेशे से डॉक्टर रोहिणी के पति समरेश सिंगापुर में आईटी सेक्टर में हैं। 2002 में उनकी शादी हुई थी। रोहिणी सिंगापुर में पति के साथ ही रहती हैं, उनके एक बेटी और दो बेटे हैं।
पिछले दो चुनावों का हाल
| लोकसभा चुनाव 2019 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| राजीव प्रताप रूडी |
भाजपा |
52.99 |
| चंद्रिका राय |
राजद |
38.22 |
| लोकसभा चुनाव 2014 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| राजीव प्रताप रूडी |
भाजपा |
41.12 |
| राबड़ी देवी |
राजद |
36.38 |
यह लोगों को तय करना है कि उन्हें लालू का बिहार चाहिए या मोदी का भारत। लड़ाई मेरी और रोहिणी की नहीं है, मोदी के विकास और लालू के जंगलराज के बीच है। रोहिणी तो मुखौटा हैं, मेरी लड़ाई सीधे लालू प्रसाद यादव से है।
राजीव प्रताप रूडी, भाजपा प्रत्याशी
राजनीति से मेरा पूरा परिवार जुड़ा है। सारण की जनता से जो प्यार मिला है, उससे मैं अभिभूत हूं। तेज धूप में भी लोग मिलने आ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी ने यहां विकास के लिए कुछ नहीं किया है। मोदी अंकल ने सबको 15 लाख देने को कहा था, वे भी नही मिले।
रोहिणी आचार्य, राजद उम्मीदवार
किडनी और टिकट पर बवेला
इसे अजीब ही कहेंगे जो जिला विकास की दौड़ में इतना पिछड़ा है, वहां लालू की बेटी रोहिणी का अपने पिता को किडनी दान करना चर्चा का विषय है। जहां महागठबंधन के लोग इसे त्याग और पिता से लगाव बताते हैं, वहीं एनडीए के नेताओं ने यहां तक कहा कि लालू ने रोहिणी को किडनी की वजह से टिकट दिया। भाजपा नेता सम्राट चौधरी के इस बयान पर काफी बवाल भी मचा कि लालू ने किडनी लेकर बेटी को सीट दी।
मुद्दे और जातीय समीकरण
इस सीट से छपरा सहित छह विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं। इलाके में चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल है। जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर नहीं है। मढौरा चीनी मिल और मार्टन की फैक्टरी बंद पड़ी है, रोजगार नहीं है। इस सीट पर 17.95 लाख मतदाता हैं।
- छह विधानसभा क्षेत्र यहां से जुड़े हैं। इस सीट पर लगभग 25 फीसदी यादव और 23 फीसदी राजपूत मतदाता है। रूडी को टिकट मिलने की वजह उनका राजपूत होना भी है। दस फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। यानी यादव और मुस्लिम मिलकर वोट करें तो भाजपा की राह आसान नहीं होगी।
2009 में अस्तित्व में आई सीट
सारण लोकसभा क्षेत्र 2009 में अस्तित्व में आई। पहले इसे छपरा सीट के नाम से जाना जाता था। छपरा से 1957 में प्रसपा के राजेंद्र सिंह पहले सांसद बने थे। 1962, 67 और 71 में कांग्रेस के रामशेखर जीते। 1977 में जनता पार्टी से लालू यहां से पहली बार जीते। 1980 में जनता पार्टी के सत्यदेव और 84 में रामबहादुर सांसद बने।
- 1989 में जनता दल से लालू फिर जीते। 90 और 91 में लालबाबू जनता दल के टिकट पर जीते। 1996 में भाजपा के लिए राजीव प्रताप रूडी ने पहली बार सीट जीती। 98 में राजद के हीरा लाल जीते, तो 99 में फिर रूडी जीते। 2004 में राजद से लालू जीते। 2009 में सीट सारण के नाम से जानी जाने लगी। लालू सांसद बने। 2014 और 19 में जीत रूडी को मिली। 2014 में उन्होंने राबड़ी देवी और 2019 में लालू के समधी चंद्रिका राय को हराया।
सारंगा और शरण से बना सारण
गंगा, गंडक व घाघरा नदियों से घिरा यह क्षेत्र बेहद उपजाऊ है। महाजनपद काल में कोसल का हिस्सा था। सारण को वन और हिरणों की वजह से जाना जाता था। सारंगा या अरण्या का अपभ्रंश सारण है, सारंगा का अर्थ है हिरणों का वन। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जनक अलेक्जेंडर कनिंघम ने लिखा है कि सम्म्राट अशोक ने बौद्ध स्तूप में मौजूद धर्म स्तंभों को शरण नाम दिया था जो सारण हो गया।