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Ground Report Amroha : दोराहे पर मुस्लिम मतदाता, मनोविज्ञान को समझना सियासी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

चंद्रभान यादव,अमरोहा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 14 Apr 2024 06:17 AM IST

सार

अमरोहा का सियासी मिजाज अलग है। यहां की मिट्टी की तासीर ही अलग है। तभी तो यह कभी किसी का गढ़ नहीं बना। 1980 के बाद यहां लगातार दूसरी बार कोई नहीं जीता। ढोलक के लिए मशहूर अमरोहा की धरती सियासतदानों को अपनी थाप पर नचाती रही है। चुनावी रण फिर सज चुका है। मतदाता मुद्दों के प्रति जागरूक हैं। वे खुलकर अपनी बातें रख रहे हैं। पर, उनके मनोविज्ञान को समझना ही सियासी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। मुस्लिम मतदाता यहां निर्णायक होंगे। हालांकि, दो मुस्लिम प्रत्याशियों के होने से वे असमंजस में हैं।
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खालकपुर खुर्द... - फोटो : अमर उजाला

सदर विधानसभा क्षेत्र के कल्याणपुर जोया के पूर्व प्रधान संजीव सैनी कहते हैं, योगी-मोदी ने आवास, शौचालाय, अनाज, आयुष्मान योजना सहित ढेर सारी सुविधाएं दी हैं। इतना जरूर है कि भीषण गर्मी में मतदाताओं को बूथ तक ले जाना चुनौती है। उनके बगल में खड़े नेतराम सैनी कहते हैं, हम वोट तो भाजपा को देंगे। पर, यह भी कहना नहीं भूलते कि सांसद बनने के बाद कोई क्षेत्र में नहीं आता है। बुजुर्ग हरीराम सैनी कहते हैं, आसपास के गांवों के मुसलमान दानिश के पक्ष में लामबंद हैं। इसलिए सैनी बिरादरी खुलकर फूल के साथ है।


उम्मीदवारों को लेकर खूब चर्चा

आरटीओ कार्यालय के बगल में बावनखेड़ी मोहल्ला है। इसी मोहल्ले में रहने वाले विजय बहादुर सैनी दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस से बीटेक कर रहे हैं। वह कहते हैं, भाजपा के काम अच्छे हैं, लेकिन सरकारी नौकरी खत्म हो रही है। अग्निवीर जैसी योजना और संविदा से पदों को भरा जाना, युवाओं के लिए कई तरह के संकट लेकर आएगा। पंकज और संतोष सैनी भी हां में हां मिलाते हैं। हालांकि वे कहते हैं, भाजपा का मजबूत विकल्प नहीं है। विपक्ष के दोनों दलों के उम्मीदवारों की जनता में पकड़ कमजोर है।


मुद्दों पर बंटे हैं मतदाता

नगर पालिका चौराहे पर मिले व्यापारी शंकर कहते हैं, हम तो सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा के साथ हैं। यहीं के हृदय सैनी, कालिंदर सिंह और गोविंद सिंह महंगाई के मुद्दे पर भाजपा का विरोध करते हैं। पर, वे यह भी जोड़ते हैं, इस सबके बाद भी वोट भाजपा को ही देंगे। हरिओम कहते हैं, अभी आयुष्मान कार्ड से पत्नी का इलाज कराए हैं। वह सरकार की कई योजनाएं गिना ले जाते हैं। वहीं, मोबाइल शाॅप चलाने वाले जियाउद्दीन कहते हैं, अमरोहा में रोजगार का कोई साधन नहीं है। कताई मिल खत्म हो गई। बुनकरों का काम खत्म हो गया। सहकारी चीनी मिल बंद हो चुकी है। वह कहते हैं, हम दानिश के साथ हैं। यदि भाजपा को हाथी हराता दिखा, तो उसके साथ हो लेंगे।


विदेशी कंपनियां प्रदूषण बढ़ा रहीं, रोजगार नहीं देतीं

गजरौला में कई कंपनियां हैं। यहां के किराना कारोबारी राकेश सिंह कहते हैं, कंपनियों के प्रदूषण के कारण सुबह के वक्त आंखों में मिर्ची जैसा लगता है। उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए संदीप और हिसामुद्दीन कहते हैं, विदेशी कंपनियां यहां बढ़ रही हैं, जो स्थानीय लोगों को रोजगार नही देती हैं। पर, इस मुद्दे को कोई भी पार्टी नहीं उठा रही है।


आम एक्सपोर्ट केंद्र की दरकार

अमरोहा को आम उत्पादक जिले के रूप में भी पहचाना जाता है। हाजी मशरूख और रफीक बताते हैं कि यहां लंगड़ा, चौसा का उत्पादन होता है। पर, एक्सपोर्ट को लेकर कोई सुविधा नहीं है। एक्सपोर्ट केंद्र की कई बार मांग की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। 


हसनपुर में त्रिकोणीय लड़ाई

हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के बस स्टैंड के पास मिले अतुल कुमार अग्रवाल कहते हैं, रालोद के साथ आने का भाजपा को फायदा हुआ है। पार्टी के उम्मीदवार ने कोविड काल के दौरान समाजसेवा की है, इसका भी फायदा मिलेगा। 

  • नवाब सैफी कहते हैं, बसपा ने दानिश अली को सांसद बनाया, लेकिन उन्होंने धोखा दिया। कोई गिनाने लायक काम भी नहीं किया। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। हाजी मशरूख कहते हैं कि यहां के मुसलमान बसपा के साथ पहले भी थे और आगे भी रहेंगे। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल कहते हैं, योगी-मोदी सरकार में व्यापारियों को सुरक्षा मिली है। सचिन गुप्ता महिलाओं की सुरक्षा का जिक्र करते हैं।

ये हैं समर के योद्धा

  • कंवर सिंह तंवर : भाजपा से 2014 में सांसद बने थे। बेटा जिला पंचायत अध्यक्ष है। गुर्जर बिरादरी के हैं। गुर्जर, जाट, सैनी सहित अन्य जातियों को लामबंद करने में जुटे हैं।
  • कुंवर दानिश अली : बसपा से सांसद बने। अब कांग्रेस में आ गए हैं। अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों का सहारा। सपा और कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक के साथ ही मुस्लिमों को साधने में जुटे हैं।
  • डाॅ. मुजाहिद हुसैन : बसपा के परंपरागत वोटबैंक और मुसलमान वोटों का सहारा। दानिश से नाराज लोगों को भी गोलबंद करने में जुटे हैं।
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