दिल्ली का सत्ता संग्राम बुधवार दिनभर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के इर्द-गिर्द घूमता रहा। भाजपा व आम आदमी पार्टी के बीच दिनभर जुबानी जंग चली। भाजपा की तरफ से मोर्चा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई में प्रदेश नेताओं से संभाला। वहीं, मुख्यमंत्री ने आप का नेतृत्व किया। दोनों तरफ की रणनीति अपनी तरकश से छोड़े गए भावनात्मक तीरों के सहारे वोटर को हक में लामबंद करने की रही। भाजपा ने कानून को हिंदू शरणार्थियों के साथ बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से भारत आए लोगों की पीड़ा से जोड़ा, जबकि आप ने इससे दिल्लीवालों की माताओं-बहनों की सुरक्षा के साथ रोजगार व नागरिक सुविधाओं पर पड़ने वाले दबाव की बात कही।
भाजपा का पलटवार
हिंदू शरणार्थियों का सीएम आवास के पास प्रदर्शन
पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर देश में आए हिंदू शरणार्थियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के पास बृहस्पतिवार को प्रदर्शन किया। चंदगीराम अखाड़े के पास प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। शरणार्थियों ने हाथों में बैनर व पोस्टर ले रखे थे। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से सीएए पर दिए बयान वापस लेने की मांग की। जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक लिया।
शरणार्थी कैंप के प्रमुख धर्मवीर सोलंकी ने कहा कि पाकिस्तान
में दूसरे कौम के नेता परेशान करते थे, यहां हिंदू नेता ही हिंदू शरणार्थियों के खिलाफ हैं। ऐसे में हिंदू शरणार्थी कहां जाएंगें। भारत ही उनकी आखिरी आस है। यही उनका असली घर है। केंद्र सरकार ने सीएए लागू करके यहां उन्हें नया जीवन दिया है, लेकिन दिल्ली सरकार आशियाना बनाने के बदले, उजाड़ रही है। केजरीवाल उनका दर्द नहीं समझते।
कांग्रेस ने संगठन मजबूत करने के लिए कीं नियुक्तियां
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को दो विभागों में नियुक्ति की। प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने प्रदेश कांग्रेस के ट्रेडर्स सेल और रजक (धोबी) समाज सेल के चेयरमैन की नियुक्ति की। उन्होंने दिल्ली राज्य ट्रेडर्स कांग्रेस का चेयरमैन अजय अरोड़ा व रजक (धोबी) समाज सेल का चेयरमैन मदन लाल को नियुक्त किया।
मतदाता बढ़े 20 गुना, लोकसभा सीटें तीन से हुईं सात
वर्ष 1952 के आम चुनाव में दिल्ली में 7,44,668 मतदाता थे। इसमें से करीब चार लाख लोगों ने प्रतिनिधियों को चुना। पहले आम चुनाव से लेकर अब तक दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 20 गुना बढ़ गई है। जनवरी 2014 की चुनाव आयोग की लिस्ट में 1,47,18,119 वोटर हैं। उधर, पहले चुनाव में दिल्ली में तीन संसदीय सीटें थीं। यहां से चार सांसद चुने जाते थे। इनमें से एक सीट से दो सांसदों का चुनाव होता था, लेकिन बाद में प्रकिया बदली और सीटों की संख्या सात हो गई।