इस बारे में दो बातें कही जाती हैं। एक तो शहर की पहचान मां पूरन देवी के मंदिर से है, जो बाहरी इलाके में स्थित है। इसी से पूर्णिया नाम पड़ा है। बताते हैं कि मुस्लिम शासक नवाब शौकत अली ने मंदिर के लिए जमीन दान की थी। दूसरी यह कि पूर्ण अरण्य यानी जंगलों के क्षेत्र का अपभ्रंश ही पूर्णिया है। यहां सौरा नदी के किनारे कालीबाड़ी सती मंदिर है जिसकी काफी मान्यता है।
जदयू छोड़कर आईं बीमा भारती
राजद नेता बीमा भारती हाल में जदयू से इस्तीफा देकर पार्टी में शामिल हुई हैं। इनके पति अवधेश मंडल पर कई आपराधिक केस चल रहे हैं। मंडल की छवि एक डॉन की है। वहीं, बीमा को जानवरों से प्यार है। वह अपने कुत्ते की अंतिम यात्रा निकालकर चर्चा में आई थीं।
मतदाता और मुद्दे
पूर्णिया शहर में पोस्टर और प्रचार में जदयू नेता संतोष कुशवाहा आगे नजर आते हैं। उनकी प्रचार गाड़ियों का काफिला शहर की धूल भरी सड़कों पर सबसे ज्यादा नजर आता है। प्रत्याशियों के बारे में जनता की राय अलग-अलग है। मक्का, आलू, धान, तंबाकू की फसल के लिए बाजार चाहिए, वहीं रंगीन दरियों का व्यापार गिरता जा रहा है। लोगों को सरकार से मदद की आस है। मां पूरन देवी मंदिर में फूल विक्रेता अनिल कुमार कहते हैं, मुकाबला जोरदार होगा। पप्पू यादव को बाहर के लोग अपराधी समझते हैं, पर उन्होंने गरीबों की बहुत मदद की है। वहीं, मनोज पासवान कहते हैं, लालू की पार्टी को कम मत समझिये, बीमा पुरानी नेता हैं। काली बाड़ी सती मंदिर में दर्शन करने आए प्रकाश कुमार दुबे कहते हैं, पप्पू जीत गए तो उनके चेले बहुत उत्पात मचाएंगे, पार्टी तो भाजपा ही ठीक है, पर उसने प्रत्याशी ही नहीं उतारा है। जदयू को यह सीट नहीं देनी चाहिए थी।
जातीय समीकरण
पूर्णिया में 21,94,980 मतदाता हैं। करीब 55 फीसदी हिंदू और 30 फीसदी मुस्लिम हैं। यादव वोटर करीब डेढ़ लाख हैं। पूर्णिया में छह विधानसभा सीटें हैं।
पूर्णिया : दो चुनावों का हाल
2019
- संतोष कुमार जदयू 6.33 लाख 54.85
- उदय सिंह कांग्रेस 3.69 लाख 32.02
2014
- संतोष कुमार जदयू 4.19 लाख 41.15
- उदय सिंह भाजपा 3.02 लाख 29.69