लोकसभा चुनाव के सात चरणों के मतदान के बाद नतीजे आने लगे हैं। सातवें चरण के मतदान के बाद जारी एग्जिट पोल अनुमाल गाए गए थे कि भाजपा नीत एनडीए लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। मंगलवार को जारी रुझानों में एनडीए और इंडी गठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला दिख रह है। हालांकि, एनडीए ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस चुनाव में भाजपा को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से बड़ी उम्मीदें थीं। जहां ओडिशा में भाजपा 19 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं महाराष्ट्र में केवल 11 सीटों पर आगे चल रही है। बंगाल में भाजपा को एक बार निराशा ही मिली। बंगाल की 42 सीटों पर भाजपा केवल 12 सीटों पर ही आगे चल रही है।
भाजपा के लिए ये तीनों राज्य इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि बंगाल और ओडिशा में भाजपा कभी सबसे बड़ी पार्टी नहीं बन पाई है। महाराष्ट्र में भाजपा अकेले सरकार नहीं बना पाई। यहां गठबंधन की सरकार में है, जिसमें भाजपा के अलावा शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए ये तीन राज्य भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीट, बंगाल में 42 और ओडिशा में 21 लोकसभा सीटें हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन राज्यों के चुनावी नतीजे क्या कह रहे हैं...
पहले 2019 के नतीजे और इस बार के मुद्दे जान लीजिए...
लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने 22, जबकि भाजपा ने 18 सीटें जीती थीं। इससे पहले तक भाजपा बंगाल में इतनी सीटें जीतने में कभी भी कामयाब नहीं हो पाई थी। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के पहले की अपेक्षा और सीटें जीतने की उम्मीद है। भाजपा के पास बंगाल में तीन अहम मुद्दे हैं, जिसे लेकर पार्टी विपक्ष पर हावी हो रही है। ये तीन मुद्दे संदेशखाली हिंसा, शिक्षा भर्ती घोटाला और ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द करना शामिल हैं।
जहां एक तरफ संदेशखाली में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को उजागर किया, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने भाजपा से जुड़े वीडियो जारी कर इस मामले को अलग दिशा में मोड़ दिया था। इस वीडियो में भाजपा नेता को यह कहते हुए सुना गया था, उन्होंने महिलाओं को प्रदर्शन करने के लिए पैसे दिए थे।
इसके अलावा राज्य में 2010 से जारी ओबीसी प्रमाण पत्र को रद्द कर कोलकाता हाई कोर्ट ने एक फैसला लिया है। इसके विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के इस फैसले को मामने से इनकार कर दिया। बंगाल में भाजपा के लिए एनआरसी एक बड़ी चुनौती है, जिसका राज्य सरकार से लेकर विपक्ष भी विरोध कर रहा है।
महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों पर 2019 में भाजपा ने 23, शिवसेना ने 18 सीटें और राकांपा ने चार सीटें जीती थीं। महाराष्ट्र में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती किसान आंदोलन और मराठा आरक्षण है। जहां एक तरफ किसानों से कई बार बात करने के बावजूद उनकी मांगों को पूरा करने में राज्य सरकार असमर्थ रही। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने लगातार ये मुद्दा उठाकर भाजपा को घेरा। मराठा आरक्षण को लेकर भी चुप्पी साधने के कारण विपक्ष यहां राज्य सरकार पर हावी हो सकता है। इसके अलावा शिवसेना और राकांपा में विभाजन भी महाराष्ट्र में एक बड़ा मुद्दा है।
ओडिशा में भाजपा ने बिजू जनता दल के साथ गठबंधन करने की कोशिश की, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया। भाजपा ने यहां मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के स्वास्थ्य पर सवाल उठाकर एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार भाजपा को ओडिशा में बाहरी पार्टी कहकर बुलाती है, जबकि भाजपा का मानना है कि दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले बीजद नेता वीके पांडियन ओडिशा में नवीन पटनायक की जगह ले सकते हैं।
क्या है इस बार का हाल?
बंगाल की 42 सीटों में से टीएमसी 29 सीटों पर और भाजपा 12 सीटों पर आगे चल रही है।
महाराष्ट्र की 48 सीटों में से भाजपा 11 पर, जबकि कांग्रेस 12 सीटों पर आगे है। वहीं शिवसेना सात और राकांपा एक सीट पर आगे चल रही है।
ओडिशा की 21 सीटों में से भाजपा 19, जबकि बीजद एक और कांग्रेस एक सीटों पर आगे चल रही है।
तीनों राज्यों के मुख्य चेहरें
बंगाल: तापस पाल, अभिजीत गंगोपाध्याय, अभिजीत बनर्जी, महुआ मोइत्रा
महाराष्ट्र: श्रीकांत शिंदे, सुप्रिया सुले, सुनेत्रा पवार,
ओडिशा: धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव, वीके पांडियन, प्रताप सारंगी