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Kerala: "हर बात पार्टी को बताना जरूरी नहीं", भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात पर बोले माकपा नेता जयराजन

Mon, 29 Apr 2024 03:39 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले दिनों सीपीआई (एम) के नेता ई पी जयराजन  भाजपा में शामिल होने, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि मुलाकात कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, जरूरी नहीं हर बात की जानकारी पार्टी को दी जाए।
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ई पी जयराजन - फोटो : facebook
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विस्तार
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केरल में इन दिनों सीपीआई (एम) के नेता ई पी जयराजन पर जमकर निशाना साधा जा रहा है। पिछले दिनों उनके भाजपा में शामिल होने की बातें चर्चा में थीं। वहीं अब उनकी भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि मुलाकात कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, जरूरी नहीं हर बात की जानकारी पार्टी को दी जाए।
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पिछले दिनों अलाप्पुझा से भाजपा उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन ने बताया था कि एक सीपीआई एम के नेता भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, इसके लिए वे कई लोगों की मदद ले रहे हैं। चुनाव से एक दिन पहले उन्होंने दावा किया कि वह नेता कोई और नहीं बल्कि ई पी जयराजन हैं। वहीं ई पी जयराजन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह उनसे कभी नहीं मिली थीं। शोभा सुरेंद्रन ने दावा किया था कि टीजी नंदकुमार उनके भाजपा में शामिल होने में मदद कर रहे हैं। और उन्होंने ही भाजपा नेता जावड़ेकर से उनकी मुलाकात करवाई थी।

वहीं सीपीआई (एम) नेता ने कहा कि उन्हें सुरेंद्रन पसंद नहीं। उन्होंने महिला नेता के भाषणों को "अजीब" बताया। उन्होंने पूछा कि "क्या मुझसे मिलने वाले सभी लोगों के बारे में पार्टी को सूचित करने की ज़रूरत है?  क्या कोई राजनीतिक चर्चा हुई?  एक व्यक्ति अभी आया और मुझसे मिला। क्या मुझे इसके बारे में पार्टी को सूचित करना चाहिए?"
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उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं से मिलना कोई गलत नहीं हैं, और पार्टी को सब कुछ बताना आवश्यक नहीं है। वही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी उन्हें सतर्क रहने की चेतावनी दी थी।


शीर्ष अदालत पहुंचे अन्नामलाई

अन्नामलाई मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने शीर्ष अदालत पहुंच चुके है, उन्हें एक मामले में समन जारी किया गया था, उच्च न्यायालम ने इस का खारिज करने से इंकार कर दिया था।

एक शिकायत कि अन्नामलाई ने एक यू-ट्यूब चैनल को साक्षात्कार दिया। जिसमें उन्होंने यह कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईसाई मिशनरी एनजीओ हिंदुओं को पटाखे फोड़ने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज कर रही हैं, यह हिंदु संस्कृति को नष्ट करने के लिए किया जा रहा है।

45 मिनट के उस साक्षात्कार का साढ़े छह मिनट का भाग अलग से भाजपा के सोशल मीडिया से शेयर किया गया था। इस शिकायत पर ट्रायल कोर्ट ने समन जारी किया था। समन को खारिज कराने के लिए अन्नामलाई ने हाई कोर्ट को दरवाजा खटखटाया था। जहां उनको कहा गया कि नफरत भरे भाषण से किसी व्यक्ति या समूह पर पर मानसिक तौर पर प्रभाव पड़ता है। इन पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर विचार किया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, बयानों से एनजीओ को हिंदू संस्कृति के खिलाफ काम करने के रूप में चित्रित करने के याचिकाकर्ता के विभाजनकारी इरादे का पता चलता है।
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