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कितनी बदली झारखंड की सियासत: एक मुख्यमंत्री ने गिरफ्तारी से पहले छोड़ी कुर्सी, दूसरे ने इस्तीफे के बाद बदला दल

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 15 Oct 2024 04:09 PM IST

सार

Jharkhand: चुनाव आयोग ने आज झारखंड विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इस राज्य में पिछले पांच साल में दो चेहरों ने कुल तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ईडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद राज्य की सत्ता चंपई सोरेन को मिली। हालांकि, हेमंत के जेल से बाहर आने पर एक बार फिर उन्होंने सत्ता संभाली। वहीं सत्ता परिवर्तन से नाराज चंपई सोरेन विपक्षी भाजपा में शामिल हो गए।
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झारखंड विधानसभा - फोटो : AMAR UJALA

झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया। चुनाव आयोग ने साढ़े तीन बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। यहां 81 विधानसभा सीटों पर दो चरण में चुनाव होंगे। वोटिंग की तारीख 13 और 20 नवंबर को होगी। मतगणना 23 नवंबर को होगी। राज्य में अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सरकार है। इस सरकार में झामुमो के अलावा कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भाकपा (माले) भी शामिल हैं।

झारखंड का चुनावी कार्यक्रम
पहला चरण

  • अधिसूचना: 18 अक्तूबर
  • नामांकन की आखिरी तारीख: 25 अक्तूबर
  • नामांकन पत्रों की जांच: 28 अक्तूबर
  • नाम वापसी: 30 अक्तूबर
  • मतदान: 13 नवंबर
  • मतगणना: 23 नवंबर


दूसरा चरण

  • अधिसूचना: 22 अक्तूबर
  • नामांकन की आखिरी तारीख: 29 अक्तूबर
  • नामांकन पत्रों की जांच: 30 अक्तूबर
  • नाम वापसी: 1 नवंबर
  • मतदान: 20 नवंबर
  • मतगणना: 20 नवंबर


राज्य पिछले पांच साल में कई सियासी उठापटक का गवाह रहा है। जहां दो चेहरों ने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इनमें से एक को गिरफ्तारी होने पर कुर्सी छोड़नी पड़ी तो दूसरे ने कुर्सी से हटाए जाने के बाद दल बदल लिया। अब वो विपक्षी भाजपा के साथ हैं। इन तमाम घटनाक्रमों के केंद्र में भूमि घोटाला था। इसी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फंसे हुए हैं।  




आइये जानते हैं कि राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे रहे थे? चुनाव के बाद राज्य की राजनीति कितनी बदली? कहां-कहां उपचुनाव हुए? अभी कैसी स्थिति है? 
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झारखंड विधानसभा - फोटो : AMAR UJALA
झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया। चुनाव आयोग ने साढ़े तीन बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। यहां 81 विधानसभा सीटों पर दो चरण में चुनाव होंगे। वोटिंग की तारीख 13 और 20 नवंबर को होगी। मतगणना 23 नवंबर को होगी। राज्य में अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सरकार है। इस सरकार में झामुमो के अलावा कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भाकपा (माले) भी शामिल हैं।

झारखंड का चुनावी कार्यक्रम
पहला चरण
  • अधिसूचना: 18 अक्तूबर
  • नामांकन की आखिरी तारीख: 25 अक्तूबर
  • नामांकन पत्रों की जांच: 28 अक्तूबर
  • नाम वापसी: 30 अक्तूबर
  • मतदान: 13 नवंबर
  • मतगणना: 23 नवंबर

दूसरा चरण
  • अधिसूचना: 22 अक्तूबर
  • नामांकन की आखिरी तारीख: 29 अक्तूबर
  • नामांकन पत्रों की जांच: 30 अक्तूबर
  • नाम वापसी: 1 नवंबर
  • मतदान: 20 नवंबर
  • मतगणना: 20 नवंबर

राज्य पिछले पांच साल में कई सियासी उठापटक का गवाह रहा है। जहां दो चेहरों ने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इनमें से एक को गिरफ्तारी होने पर कुर्सी छोड़नी पड़ी तो दूसरे ने कुर्सी से हटाए जाने के बाद दल बदल लिया। अब वो विपक्षी भाजपा के साथ हैं। इन तमाम घटनाक्रमों के केंद्र में भूमि घोटाला था। इसी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फंसे हुए हैं।  



आइये जानते हैं कि राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे रहे थे? चुनाव के बाद राज्य की राजनीति कितनी बदली? कहां-कहां उपचुनाव हुए? अभी कैसी स्थिति है? 

झारखंड विधानसभा - फोटो : AMAR UJALA
पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे थे?
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए पिछले चुनाव 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 के बीच पांच चरणों में हुए थे। इसमें कुल 65.18 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। नतीजे 23 दिसंबर 2019 को घोषित किए गए। जब नतीजे सामने आए तो सत्ताधारी भाजपा को झटका लगा और वह 41 सीटों के जादुई आंकड़ों से पिछड़ गई। हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को सबसे ज्यादा 30 सीटें आईं। इसके बाद भाजपा को 25 सीटें मिलीं। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस के 16 विधायक, झाविमो के तीन और आजसू  के दो विधायक जीते। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक जबकि राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी के एक-एक विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। 

राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी
हार के बाद भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे रघुबर दास ने इस्तीफा दे दिया। झामुमो के नेतृत्व में राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी। इस सरकार में झामुमो को कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी का साथ मिला। इसके अलावा झाविमो प्रमुख और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी हेमंत सोरेन सरकार को अपनी पार्टी का समर्थन दे दिया। इसके बाद झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में किया अपनी पार्टी का विलय 
फरवरी 2020 में झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 'घर वापसी' करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। इसके अलावा उन्होंने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) का भाजपा में विलय भी कर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी का पार्टी में स्वागत किया। उसी समय झारखंड विकास मोर्चा से निकाले गए दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तीर्की कांग्रेस में शामिल हो गए। झारखंड कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी आरपीएन सिंह की मौजूदगी में दोनों विधायकों ने कांग्रेस का हाथ थामा था। बाबूलाल मरांडी इस वक्त झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। 

खनन पट्टा मामले में बढ़ीं हेमंत की मुश्किलें
हेमंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल काफी चुनौतियों वाला रहा। 2022 में चुनाव आयोग ने झारखंड के तब के राज्यपाल रमेश बैस को एक याचिका पर अपनी राय भेजी थी जिसमें मांग की गई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुद को एक खनन पट्टा देकर चुनावी कानून का उल्लंघन करने के लिए विधायक के रूप में अयोग्य ठहराया जाए। हालांकि, इस याचिका पर बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

चंपई सोरेन, हेमंत सोरेन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
गिरफ्तार हो गए हेमंत, इस्तीफा दिया तो चंपई को मिली कमान
हेमंत की मुश्किलें यहीं कम नहीं हुईं। 31 जनवरी 2024 को भूमि घोटाले के आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से ऐन पहले उन्होंने पद से त्यागपत्र दिया और राज्य की कमान शिबु सोरेन के करीबी माने जाने वाले चंपई सोरेन को मिली। हेमंत की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन झामुमो विधायक दल के नेता चुने गए। 2 फरवरी 2024 को उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इस पद पर पहुंचने वाले चंपई सातवें नेता थे। इसके साथ ही चंपई शिबु सोरेन और हेमंत सोरेन के बाद झामुमो के तीसरे नेता बन गए जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंचे।

4 जुलाई को हेमंत सोरेन तीसरी बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री - फोटो : AMAR UJALA
जेल से बाहर आए तो फिर हेमंत सोरेन ने संभाली झारखंड की सत्ता
पांच महीने से रांची की जेल में बंद हेमंत को 28 जून को बड़ी राहत मिल गई। झारखंड उच्च न्यायालय ने 8.36 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि सोरेन को जमीन के कब्जे से सीधे तौर पर जोड़ने का कोई सबूत नहीं है। इसके बाद झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और अदालत से राहत मिलने के बाद हेमंत ने चंपई की जगह ली।   

पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत मिलने के बाद एक बार फिर झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन की कवायद शुरू हो गई। तय हुआ कि अदालत से जमानत मिलने के बाद सोरेन ने राज्य की कमान संभालेंगे। इस बीच चंपई सोरेन ने 3 जुलाई को झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हेमंत सोरेन ने करीब पांच महीने बाद झारखंड की सत्ता फिर से संभाल ली। 4 जुलाई को हेमंत तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। वहीं 8 जुलाई को हेमंत सोरेन ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। नई सरकार में चंपई को कैबिनेट मंत्री के रूप में जल संसाधन, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली। 

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई - फोटो : AMAR UJALA
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई ने बदला पाला
हेमंत सोरेन के झारखंड की सत्ता संभालने के बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री चंपई के पाला बदलने की पटकथा शुरू हो गई। अटकलों का बाजार तब गर्म होने लगा जब अगस्त मध्म में झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता चंपई सोरेन का दिल्ली दौरा तय हुआ। कहा जाने लगा चंपई सोरेन कुछ झामुमो विधायकों के साथ भाजपा में शामिल होंगे। चंपई इस बात से खुश नहीं थे कि उन्हें शीर्ष पद से हटा दिया गया। खबरों में कहा गया कि 17 अगस्त की रात वे कोलकाता में थे, जहां उन्होंने बंगाल भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इसके अलावा, बताया गया कि चंपई झारखंड भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संपर्क में हैं।

चंपई ने 18 अगस्त को एक लंबा सोशल मीडिया पोस्ट लिखा जिससे तय हो गया कि वह झामुमो से अलग होंगे। चंपई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व पर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया था। चंपई ने कहा, 'लगातार अपमानजनक व्यवहार से भावुक हो कर मैंने सियासत में नए विकल्प को अपनाने का फैसला किया है।'

इन संकेतों के बाद चंपई ने अपने इलाकों के दौरे शुरू कर दिए और अपने लोगों और समर्थकों से मिलने लगे। इस बीच 26 अगस्त को चंपई नई दिल्ली पहुंचे जहां उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। एक हफ्ते में यह उनकी दूसरी दिल्ली यात्रा थी। इस बैठक के बाद भाजपा प्रदेश प्रभारी और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि चंपई सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। पूर्व सीएम चंपई सोरेन 30 अगस्त को रांची में आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे।

आखिरकार 28 अगस्त को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे को एक्स पर पोस्ट करते हुए चंपई सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से त्याग पत्र दिया। झारखंड के आदिवासियों, मूल वासियों, दलितों, पिछड़ों और आम लोगों के मुद्दों को लेकर हमारा संघर्ष जारी रहेगा। वहीं 30 अगस्त को राज्य के पूर्व सीएम चंपई सोरेन शुक्रवार को रांची में आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गए।  

 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन जीतीं - फोटो : ANI
कितनी सीटों पर उपचुनाव हुए?
नवंबर 2020 में झारखंड में दो सीटों बेरमो और दुमका के लिए उपचुनाव हुए थे। सत्ताधारी गठबंधन ने दोनों ही विधानसभा सीटें बरकरार रखते हुए सफलता पाई थी। बेरमो में कांग्रेस के अनूप सिंह ने भाजपा के योगेश्वर महतो को हराया था। वहीं, दुमका में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन ने भाजपा की लुईस मरांडी को शिकस्त दी थी। 

इसके बाद मई 2021 में मधुपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ था। इसमें झामुमो प्रत्याशी हफीजुल हसन अंसारी ने भाजपा के गंगा नारायण सिंह को पराजित किया था। झारखंड की मांडर विधानसभा सीट पर जून 2022 में उपचुनाव हुए थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी शिल्पी नेहा तिर्की जीती थीं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी गंगोत्री कुजूर को हराया था। 

पिछले साल मार्च में रामगढ़ सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आए थे। इसमें एनडीए की तरफ से आजसू पार्टी की प्रत्याशी सुनीता चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बजरंग महतो को हराया था। 

उपचुनाव गिरिडीह जिले की डुमरी विधानसभा सीट के लिए भी हुआ था। सितंबर 2023 में आए नतीजे में झामुमो उम्मीदवार बेबी देवी ने आजसू पार्टी की उम्मीदवार यशोदा देवी को हराकर जीत हासिल की थी। 

राज्य में अंतिम उपचुनाव गिरिडीह जिले की गांडेय विधानसभा सीट के लिए हुआ था। जून 2024 में लोकसभा चुनाव के साथ आए नतीजे में झामुमो उम्मीदवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने भाजपा के दिलीप कुमार वर्मा को पराजित किया था। यह उपचुनाव झामुमो विधायक सरफराज अहमद के इस्तीफे के कारण कराया गया था जो बाद में राज्यसभा सांसद बन गए। 

झारखंड विधानसभा - फोटो : ANI
अभी क्या है झारखंड विधानसभा की स्थिति? 
वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले महागठबंधन में 44 विधायकों का समर्थन है। इसमें झामुमो के 25 विधायक, कांग्रेस के 17, राजद और सीपीआई (एमएल) के एक-एक विधायक हैं।  

वहीं, दूसरी ओर राज्य की विपक्षी एनडीए के पास 30 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसमें भाजपा के 25 विधायक, आजसू के तीन, एक निर्दलीय और एक जदयू के विधायक शामिल हैं। इसके अलावा सात विधानसभा सीटें खाली हैं। 
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