लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आज आ रहे हैं। कई हफ्तों से चल रही मतदान की प्रक्रिया खत्म होने के बाद नतीजों का दिन है। 4 जून को 543 में से 542 सीटों के नतीजे घोषित किए जा रहे हैं। गुजरात की सूरत सीट पर भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी।
इससे पहले सात चरणों में कराए गए लोकसभा चुनाव में कई मुद्दे सामने आए। कहीं बयानों ने मुद्दों को हवा दी और कहीं क्षेत्रों के हिसाब से प्रचार हुआ। अपनी रैलियों, सभाओं और रोड शो में इन मुद्दों को उठाकर तमाम पार्टियों ने मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश की है।
आइये जानते हैं कि किस चरण में क्या बयानबाजी हुई? किन मुद्दों को लेकर बयानबाजी हुई? कौन से मुद्दे हावी रहे? किस पार्टी ने क्या मुद्दे उठाए? इनका असर कितना हो सकता है?
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आज आ रहे हैं। कई हफ्तों से चल रही मतदान की प्रक्रिया खत्म होने के बाद नतीजों का दिन है। 4 जून को 543 में से 542 सीटों के नतीजे घोषित किए जा रहे हैं। गुजरात की सूरत सीट पर भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी।
इससे पहले सात चरणों में कराए गए लोकसभा चुनाव में कई मुद्दे सामने आए। कहीं बयानों ने मुद्दों को हवा दी और कहीं क्षेत्रों के हिसाब से प्रचार हुआ। अपनी रैलियों, सभाओं और रोड शो में इन मुद्दों को उठाकर तमाम पार्टियों ने मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश की है।
आइये जानते हैं कि किस चरण में क्या बयानबाजी हुई? किन मुद्दों को लेकर बयानबाजी हुई? कौन से मुद्दे हावी रहे? किस पार्टी ने क्या मुद्दे उठाए? इनका असर कितना हो सकता है?
चुनाव में बयानबाजी और मुद्दे
संविधान vs मंगलसूत्र: इस चुनाव में संविधान और उसके अंदर आरक्षण का प्रमुख मुद्दा दिखाई दिया। इसका कारण भाजपा द्वारा 400 पार (400 सीटें जीतने का दावा) की घोषणा और चुनाव के शुरुआत में कुछ नेताओं द्वारा की गई यह टिप्पणी थी कि इस चुनाव में 400 सीटें भाजपा को संविधान बदलने की शक्ति देंगी। इन बयानों के बाद विपक्षी नेता तुरंत लामबंद हो गए और इसे बड़ा मुद्दा बनाया। पूरे चुनाव के दौरान विपक्ष ने प्रचार किया कि भाजपा सत्ता में आई तो संविधान बदल देगी और आरक्षण खत्म कर देगी।
वहीं, भाजपा ने भी संविधान और आरक्षण के मुद्दे को अपने तरीके से उठाया। पहले चरण के मतदान के बाद 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है यदि देश में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हरेक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जाएगा। हमारी बहनों के पास सोना कितना है, मंगलसूत्र कितने हैं, उसकी जांच की जाएगी, उसका हिसाब लगाया जाएगा। आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा।' इसी दौरान पीएम ने मनमोहन सिंह के 'संपत्ति पर मुसलमानों के दावे' वाले बयान को भी उठाया।
विरासत टैक्स: पहले चरण के चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर विवाद हुआ तो दूसरे चरण के चुनाव से पहले इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने अमेरिका के विरासत कर की वकालत करके एक नई बहस छेड़ दी। दरअसल, पित्रोदा ने कहा था, 'अमेरिका में विरासत कर लगता है। अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर की संपत्ति है और जब वह मर जाता है तो वह केवल 45 फीसदी अपने बच्चों को दे सकता है। 55 फीसदी सरकार द्वारा ले लिया जाता है। यह एक दिलचस्प नियम है। ये जो निष्पक्ष कानून है मुझे अच्छा लगता है।'
पित्रोदा ने कहा था, 'यह एक नीतिगत मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी एक ऐसी नीति बनाएगी, जिसके माध्यम से धन का बांटना बेहतर होगा।' पित्रोदा के इस बयान को भाजपा ने हाथों हाथ लिया और पूरे चुनाव के दौरान प्रचार किया कि कांग्रेस जनता की कमाई का मुसलमानों में बंदरबांट करेगी।
कांग्रेस भी इस टिप्पणी के बाद बैकफुट पर आ गई और पार्टी ने पित्रोदा के विचारों से खुद को अलग करते हुए कहा है कि वे उनके अपने विचार हैं और पार्टी के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
मुस्लिम आरक्षण: विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का मुद्दा आम चुनावों में केंद्र में रहा है। तीसरे चरण के मतदान के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद ने मुसलमानों के लिए आरक्षण के विचार का समर्थन किया था। बयानबाजी यहीं नहीं रुकी कई और विपक्षी नेताओं ने मुस्लिम आरक्षण पर बात की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार ने दावा किया कि उन्होंने करीब 20 साल पहले महाराष्ट्र में मुसलमानों को आरक्षण दिया था। सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मुसलमानों को आरक्षण देने में कोई बुराई नहीं है। छठे दौर के मतदान से पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 2010 से 2024 के बीच पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने की घोषणा की। इसी दौरान ममता बनर्जी ने ‘पिछड़ी मुस्लिम जातियों’ के लिए आरक्षण जारी रखने की बात कही। उधर भाजपा ने मुसलमानों के लिए आरक्षण पर विपक्षी नेताओं की बयानबाजी को चुनावी मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों ने अपनी चुनावी रैलियों में आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में 'शरीयत' लागू करना चाहती है और मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए कोटा कम करना चाहती है। गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि मुस्लिम आरक्षण कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन दलों के एजेंडे में सबसे ऊपर है।
रंगभेद: इसके अलावा पित्रोदा ने नस्लीय टिप्पणी भी की थी जिसपर खूब बवाल मचा। तीसरे चरण के मतदान से पहले पित्रोदा ने भारत की विविधता पर बात करते हुए कहा था, भारत में पूर्व के लोग चीनी जैसे लगते हैं, तो दक्षिण में लोग अफ्रीकी लगते हैं। पश्चिम भारत के लोग अरबी जैसे लगते हैं। उत्तर भारतीय गोरे होते हैं। उनके इस बयान को भाजपा ने 'नस्लीय टिप्पणी' बताया। इस बयान के बाद सैम पित्रोदा को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ गया।
चुनाव में हावी रहे ये मुद्दे
राम मंदिर: इस पूरे चुनाव में राम मंदिर एक प्रमुख मुद्दा रहा है। एक तरफ भाजपा ने भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का श्रेय लेने की कोशिश की। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद लगातार भाजपा के नेता से लेकर मंत्री तक लगातार अयोध्या के दौरे कर रहे। भाजपा के नेता अलग-अलग इलाकों से श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए ले गए। इस मुद्दे का भाजपा को लाभ नहीं मिले इसकी पूरी कोशिश विपक्ष ने की। यही वजह है कई नेताओं ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठा दिया तो किसी नेता ने कह दिया कि अब अयोध्या जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटकर कुछ हजार में रह गई है। तीसरे चरण के मतदान के दिन सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर बेकार का है। उसका नक्शा सही नहीं है। वास्तु के लिहाज से सही नहीं बना है। ठीक इसी समय पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम मंदिर पर बयान देकर सनसनी मचा दी। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने करीबी नेताओं के साथ बैठक में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए एक ‘सुपरपावर कमीशन’ बनाने की बात कही थी। भाजपा ने इन बयानों को प्रचार के दौरान उठाया। खुद पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस राम मंदिर पर बाबरी ताला लगाना चाहती है।
विकास: सत्ताधारी भाजपा ने पिछले दस साल में हुए विकास के मुद्दे को भी पूरे चुनाव के दौरान जमकर उठाया है। बीते 10 साल में बिजली, सड़क, पानी से लेकर तकनीक तक के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को चुनाव के दौरान जमकर प्रचारित किया। वहीं, विपक्ष ने विकास के दावों को खोखला बताने के लिए महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाया।
परिवारवाद: चुनाव तारीखों की घोषणा से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच परिवारवाद के मुद्दे पर सियासी संग्राम छिड़ा गया था जो चुनावों में भी छाया रहा। एक तरफ भाजपा ने विपक्ष को परिवारवादी पार्टियों का गठबंधन बताया तो दूसरी ओर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी के परिवार पर सवाल उठा दिया। चुनाव से पहले राजद नेता लालू यादव ने पीएम मोदी को लेकर कहा था कि उनका कोई परिवार ही नहीं है। हालांकि, भाजपा ने इसे भी अपने पक्ष में करने के लिए ‘मोदी का परिवार’ नाम से सोशल मीडिया कैंपेन बना दिया।
भ्रष्टाचार: भाजपा विपक्ष को इस मुद्दे पर पूरे चुनाव के दौरान घेरती नजर आई। चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं के घरों पर छापे में मिली नोटो की गड्डियों का जिक्र खुद प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में करते रहे थे। वहीं, चुनाव के दौरान भी भ्रष्टाचार के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया। तीसरे दौर से मतदान से पहले झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव के घरेलू सहायक के पास से जब्त किए गए करोड़ों के धन को लेकर प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोला। इसी बीच आंध्र प्रदेश में एक चुनावी जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे इस बारे में कानूनी सलाह ले रहे हैं कि भ्रष्टाचार से लूटा हुआ धन गरीबों को वापस कैसे मिलेगा।
उधर विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि छापे सिर्फ विपक्ष के नेताओं पर पड़ते हैं। जो भ्रष्टाचारी भाजपा में शामिल हो जाता है उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। चुनाव के दौरान इस तरह के नेताओं के नाम विपक्ष की ओर से भी लगातार लिए गए। चौथे चरण की वोटिंग से पहले दिल्ली शराब नीति घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी तानाशाही कर रहे हैं और पूरे विपक्ष को जेल में डालना चाहते हैं।
बेरोजगारी: बेरोजगारी का मुद्दा भी विपक्ष ने चुनाव के दौरान जमकर उठाया। भर्ती परिक्षाओं में होने वाले पेपर लीक का मुद्दा भी चुनाव के दौरान विपक्ष द्वारा उठाया गया। इससे पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में 30 लाख सरकारी नौकरी का वादा कर दिया। वहीं, सत्ता पक्ष ने पेपर लीक के बाद सरकारों द्वारा की गई कार्रवाई और देशभर में बढ़ते स्टार्टअप को गिनाया।