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तिरुवनंतपुरम: पहले तीन चुनाव में निर्दलीय जीते, 2009 से थरूर जीत रहे; इस बार BJP से राजीव चंद्रशेखर की चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 15 Mar 2024 02:18 PM IST

सार

Seat Ka Samikaran: आगामी लोकसभा चुनावों से पहले केरल की तिरुवनंतपुरम सीट चर्चा में है। कांग्रेस नेता शशि थरूर यहां के मौजूदा सांसद हैं और उनके सामने भाजपा से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर होंगे। अमर उजाला की खास चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में जानते हैं यहां का सियासी इतिहास... 
 
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तिरुवनंतपुरम सीट का मुकाबला - फोटो : AMAR UJALA

2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान करना शुरू कर दिया है। अब तक जिन सीटों पर उम्मीदवारों का एलान हुआ है उनमें कुछ सीटों पर दिलचस्प मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है। ऐसी है एक सीट है केरल की तिरुवनंतपुरम। 

कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर यहां के मौजूदा सांसद हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर से शशि थरूर को तिरुवनंतपुरम सीट से टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने यहां से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को मैदान में उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। राजीव चंद्रशेखर अभी राज्यसभा सांसद हैं। राज्य की सत्ता पर काबिज वाम दलों की ओर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पन्नियन रवींद्रन तिरुवनंतपुरम सीट पर उम्मीदवार बनाए गए हैं। अमर उजाला के खास चुनावी कार्यक्रम 'सीट का समीकरण' में आज इसी तिरुवनंतपुरम सीट की बात करेंगे…



तिरुवनंतपुरम सीट का चुनावी इतिहास क्या रहा है? इस सीट पर कब किसे जीत मिली? कौन-कौन से दिग्गज यहां से लोकसभा पहुंचे? 2019 के चुनाव में थरूर की जीत कितनी बड़ी थी? मौजूदा सियासी समीकरण क्या कहता है? आइये इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

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तिरुवनंतपुरम सीट का मुकाबला - फोटो : AMAR UJALA
2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान करना शुरू कर दिया है। अब तक जिन सीटों पर उम्मीदवारों का एलान हुआ है उनमें कुछ सीटों पर दिलचस्प मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है। ऐसी है एक सीट है केरल की तिरुवनंतपुरम। 

कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर यहां के मौजूदा सांसद हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर से शशि थरूर को तिरुवनंतपुरम सीट से टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने यहां से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को मैदान में उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। राजीव चंद्रशेखर अभी राज्यसभा सांसद हैं। राज्य की सत्ता पर काबिज वाम दलों की ओर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पन्नियन रवींद्रन तिरुवनंतपुरम सीट पर उम्मीदवार बनाए गए हैं। अमर उजाला के खास चुनावी कार्यक्रम 'सीट का समीकरण' में आज इसी तिरुवनंतपुरम सीट की बात करेंगे…

तिरुवनंतपुरम सीट का चुनावी इतिहास क्या रहा है? इस सीट पर कब किसे जीत मिली? कौन-कौन से दिग्गज यहां से लोकसभा पहुंचे? 2019 के चुनाव में थरूर की जीत कितनी बड़ी थी? मौजूदा सियासी समीकरण क्या कहता है? आइये इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

तिरुवनंतपुरम सीट का मुकाबला - फोटो : AMAR UJALA
तिरुवनंतपुरम का इतिहास क्या रहा है?
केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं। इन्ही में से एक सीट है तिरुवनंतपुरम। यहां की सियासी जड़ें जानने से पहले क्षेत्र को जान लेना चाहिए। तिरुवनंतपुरम, या त्रिवेन्द्रम सबसे दक्षिणी जिला है। तिरुवनंतपुरम शहर केरल की राजधानी है। तिरुवनंतपुरम का मतलब पवित्र अनंत का शहर है। अनंत एक हजार सिर वाले ब्रह्मांडीय नाग हैं, जिनकी कुंडलियों पर भगवान महाविष्णु विराजमान हैं। इस धरा ने कोलंबस, वास्को डी गामा, मार्को पोलो, फाह्यान जैसे यात्रियों और खोजकर्ताओं की कल्पनाओं को जगाया। सात पहाड़ियों पर बसा तिरुवनंतपुरम आज एक विशाल महानगर बन गया है। इसके बावजूद शहर के अतीत का गौरव और आकर्षण बरकरार है। 

1951-52 आम चुनाव - फोटो : Election Commission of India
पहला ही चुनाव निर्दलीय ने जीता 
अब वापस आते हैं तिरुवनंतपुरम के सियासी इतिहास की तरफ। 1951-52 में पहले आम चुनाव में त्रिवेंद्रम में निर्दलीय को जीत मिली। निर्दलीय प्रत्याशी एनी मास्कारेन ने सोशलिस्ट पार्टी के टीके नारायण पिल्लई को 68,117 वोटों से हराया था। 

1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में भी त्रिवेंद्रम से निर्दलीय उम्मीदवार ईस्वर अय्यर ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के थानु पिल्लई को 10,944 मतों से शिकस्त दी। 1962 में भी निर्दलीय उतरे नटराज पिल्लई ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के कृष्णा पिल्लई के सामने 10,458 वोट से हरा दिया।

1967 में पहली बार किसी पार्टी के उम्मीदवार सांसद बने
अब बारी थी 1967 के लोकसभा चुनाव की। त्रिवेंद्रम में पहली बार किसी पार्टी के उम्मीदवार सांसद निर्वाचित हुए। इस चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की तरफ से उतरे पी. विश्वंभरण ने कांग्रेस उम्मीदवार जीसी पिल्लई को 4,478 वोट से मात दी। 1971 के लोकसभा चुनाव में फिर से निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार वीके कृष्णा मेनन ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के डी. दामोदरन को 24,127 मतों से हराया। 

आपातकाल के बाद हुए 1977 के चुनाव में त्रिवेंद्रम सीट से भाकपा को सफलता मिली। भाकपा उम्मीदवार एमएन  गोविंदन नायर ने भारतीय लोक दल के पी. विश्वंभरण को 69,822 वोट से शिकस्त दी। 

कांग्रेस पहली बार 1980 में जीती 
1980 के चुनाव में त्रिवेंद्रम से कांग्रेस ने पहली बार जीत का स्वाद चखा। पार्टी के प्रत्याशी ए. नीललोहितदासन नादर ने भाकपा के एमएन गोविंदन नायर को 1,07,057 वोटों से हराया। 

1984 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के ए. चार्ल्स ने लोक दल के नीललोहितदासन नादर को 53,438 वोट से मात दी। चार्ल्स 1989 में भी जीतने में सफल रहे। इस बार उन्होंने निर्दलीय ओएनवी कुरूप को 50,913 वोट से हराया। 1991 के चुनाव में चार्ल्स ने जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी ने भाकपा की ईजे विजयम्मा को 43,670 मतों से मात दी। 

1996 के चुनाव में कांग्रेस के ए. चार्ल्स को भाकपा प्रत्याशी केवी सुरेंद्रनाथ ने 20,802 वोट से हरा दिया। 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण को अपना उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाकपा के केवी सुरेंद्रनाथ को 15,398 वोटों से शिकस्त दी। 

1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से उतरे एडवोकेट वीएस शिवकुमार ने भाकपा के कनियापुरम रामचंद्रन को 14,485 वोट से हराया। 

2004 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल गई। तब भाकपा प्रत्याशी पीके वासुदेवन नायर ने कांग्रेस के वीएस शिवकुमार को 54,603 वोट से हरा दिया था।   

शशि थरूर - फोटो : शशि थरूर
यूएन में अहम जिम्मेदारियां निभाने वाले थरूर की एंट्री
अब बारी आती है 2009 के लोकसभा चुनाव की। इस चुनाव से पहले हुए परिसीमन के बाद त्रिवेंद्रम सीट का नाम तिरुवनंतपुरम हो गया। सीट के नाम के साथ चुनाव लड़ने वाले कुछ चेहरे भी नए थे। कांग्रेस ने इस बार यहां से शशि थरूर को टिकट दिया गया। थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में अपना लंबा करियर बिताया था। थरूर शीत युद्ध के बाद शांति बनाए रखने में अहम जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ यूएन महासचिव के वरिष्ठ सलाहकार, संचार और सार्वजनिक सूचना के लिए अवर महासचिव रहे। थरूर भारत लौटे और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम सीट से जीत दर्ज की। इस चुनाव में शशि थरूर ने भाकपा उम्मीदवार एडवोकेट पी. रामचंद्रन नायर को 99,998 मतों से हराया। उस चुनाव में भाजपा के पीके कृष्णा दास चौथे स्थान पर रहे थे।  

2014 में भाजपा ने कड़ा मुकाबला किया
2014 पहला चुनाव था जब भाजपा ने तिरुवनंतपुरम सीट पर अपनी उपस्थिति दिखाई। पार्टी के उम्मीदवार ओ. राजगोपाल ने शशि थरूर की खिलाफ कड़ा मुकाबला लड़ा लेकिन वह 15,470 वोटों से हार गए। थरूर तिरुवनंतपुरम से जीतकर एक बार फिर सांसद बने। 

शशि थरूर - फोटो : X/@ShashiTharoor
तिरुवनंतपुरम में ऐसे थे 2019 के नतीजे
2019 में इस सीट से पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर कांग्रेस के टिकट पर जीते। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार थरूर को 4,16,131 वोट मिले। थरूर को कुल 41.15% लोगों के वोट मिले। भाजपा एक बार फिर दूसरे नंबर पर रही। पार्टी के उम्मीदवार कुम्मानम राजशेखरन को 3,16,142 यानी 31.26% वोट मिले। इस तरह से 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता शशि थरूर 99,989 वोटों से चुनाव जीते।
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