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Interview: खरगे बोले- नतीजों में दिखेगा सरकार के खिलाफ अंडर करंट, हम मोदी की विचारधारा और काम की शैली के खिलाफ

सार

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विनोद अग्निहोत्री से बातचीत के दौरान सरकार के खिलाफ अंडर करंट होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि आम जनता में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई और बेरोजगारी है। खरगे ने कहा कि 'मोदी की गारंटी' 2004 के स्लोगन 'शाइनिंग इंडिया' की तरह फ्लॉप होगी। पढ़िए पूरा साक्षात्कार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (साक्षात्कार के अंश) - फोटो : amar ujala graphics
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विस्तार
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भाजपा के अबकी बार, चार सौ पार के नारे और पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे दावा करते हैं कि लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है। खरगे का कहना है कि मोदी की गारंटी उसी तरह फ्लॉप होगी, जैसे 2004 में इंडिया शाइनिंग हुई थी। खरगे बेरोजगारी और महंगाई को दो सबसे बड़े मुद्दे बताते हैं और उम्मीद जताते हैं कि विपक्षी गठबंधन सत्ता में आएगा। सीटों की संख्या पर कांग्रेस अध्यक्ष कहते हैं कि मोदी सरकार को हटाने और विपक्षी गठबंधन की सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए, उतनी या उससे ज्यादा सीटें आएंगी। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने विनोद अग्निहोत्री से बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर खुलकर राय रखी।

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चुनावों के पहले चरण में मतदान में कमी की क्या वजह है?
खरगे का जवाब हो सकता है कि राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग को लोगों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए जितना प्रयास करना चाहिए वो नहीं किया। फिर भी इतनी गर्मी के बावजूद करीब 70 फीसदी मतदान हुआ तो यह अच्छी बात है।



क्या कम मतदान की वजह कोई बड़ा केंद्रीय मुद्दा न होना है?
हमने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के, युवाओं, नारी शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा समेत अनेक मुद्दे उठाए हैं। हमारे घोषणा पत्र में भी अनेक मुद्दों को रखा गया है। राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा और इसके पहले कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो पद यात्रा की, उसमें भी ये सारे मुद्दे उठाए गए। हम सीधे जनता के पास इन मुद्दों को ले गए। हमने समाज के हर वर्ग से मुलाकात की, संवाद किया।
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आम धारणा है कि विपक्ष अपने मुद्दों के प्रचार में कमजोर है?
लोकतंत्र में मुद्दों के प्रचार प्रसार में मीडिया की बड़ी भूमिका है, उसमें हमें जगह कम मिलती है। इससे लगता है कि जैसे हम कुछ कर ही नहीं रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम अपना गारंटी कार्ड, जिस पर मेरे और राहुल के हस्ताक्षर हैं, लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। इसमें सभी वर्गों के लिए पांच न्याय और 25 गारंटियां दी गई हैं, जिनमें युवाओं को साल भर की अप्रेंटिस और एक लाख रुपए देने, परिवार की मुखिया महिला को सालाना एक लाख रुपए देने, किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी, तीस लाख खाली सरकारी नौकरियों में भर्ती, अग्निवीर योजान समाप्त करना आदि शामिल हैं।

आपके मुताबिक इन चुनावों का सबसे बड़ा मुद्दा क्या है।
बेरोजगारी और महंगाई दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। पीएम मोदी ने जो वादे किए थे, वो नहीं निभाए। वह हमेशा असत्य बोलते रहे। हर साल दो करोड़ नौकरियां, विदेशों से काला धन लाकर हर एक को 15-15 लाख रुपए देने जैसी उनकी कई घोषणाएं झूठ साबित हुईं। हम उनसे पूछ रहे हैं, लेकिन उनके पास इनका जवाब नहीं है।

भाजपा कहती है कि उसने अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर बनवाने के अपने वादे पूरे किए हैं।
आस्था अच्छी बात है, लेकिन पेट भरना उससे भी पहले आता है। क्या मंदिर बनने से पहले लोग पूजा नहीं करते थे। लोग आस्थावान हैं और अपने घरों में भी पूजा की जगह बनाकर देव अर्चना करते हैं, लेकिन भाजपा लोगों की इस आस्था का राजनीतिक फायदा उठाती है।

पीएम मोदी और भाजपा कांग्रेस के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल न होने को मुद्दा बनाकर आपको राम विरोधी करार दे रहे हैं।
यह बिल्कुल झूठ बात है कि हमने अपनी पार्टी में किसी को भी अयोध्या जाने से रोका। हमारे अनेक लोग अयोध्या गए हैं और अब भी जा रहे हैं। मोदी जी बताएं कि क्या अयोध्या में कोई सर्वदलीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जैसे संसद में बिजिनेस एडवाइजरी कमेटी में सभी दलों के लोग बुलाए जाते हैं। मंदिर सिर्फ मोदी जी के चुनाव प्रचार या भाजपा के लिए नहीं है। वह सबके लिए है।

मल्लिकार्जुन खरगे (साक्षात्कार का अंश) - फोटो : amar ujala graphics
क्या विपक्षी इंडिया गठबंधन नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत नेता को सत्ता से हटा सकता है।
बिल्कुल हटा सकता है। मैं पूरा देश घूम रहा हूं और लोगों का मूड देख रहा हूं कि मोदी और भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए हमें जितनी संख्या चाहिए, उतनी हम ले आएंगे।

भाजपा कहती है कि विपक्ष सिर्फ मोदी को हटाने की बात करता है, उसका कोई विजन नहीं है।
हम मोदी जी के व्यक्तिगत खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा और कामकाज की शैली के खिलाफ हैं। वह जब सारे काम सिर्फ अपने नाम से करते हैं पार्टी या सरकार की नहीं मोदी की गारंटी देते हैं और हर बात का श्रेय सिर्फ खुद लेते हैं तो हम चुनाव में किसको हटाने की बात करेंगे। अगर हमें मोदी सरकार की नीतियों, जिनसे देश का नुकसान हो रहा है, को बदलना है तो हमें सरकार बनानी होगी और इसके लिए हम मोदी जी को हटाने की बात नहीं करेंगे तो किसको हटाने की बात करेंगे। जहां तक विजन की बात है तो हमारे न्याय पत्र में हमारा विजन है। जिसमें हमने नौजवानों, महिलाओं, किसानों, गरीबो, पिछड़ों, दलितों, वंचितों सबके लिए जो घोषणाएं की हैं। सत्ता में आने पर उन्हें लागू करेंगे। हम घोषणा करके भाग जाने वाले नहीं, उन पर अमल करने वाले लोग हैं।

पीएम मोदी के नाम से अगर सारे काम होते हैं, तो गलत क्या है। वह प्रधानमंत्री हैं।
हमने कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना में कांग्रेस की गारंटी की बात की, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मोदी की गारंटी की बात हो रही है। गारंटी पार्टी या सरकार की होती है, किसी व्यक्ति की नहीं। मोदी की गारंटी थी कि दो करोड़ रोजगार हर साल देंगे, 15 लाख रुपए सबके खाते में आएंगे, किसानों की आमदनी दोगुनी होगी। क्या ये सब हुआ। कहां गई मोदी की गारंटी। मोदी की गारंटी का मतलब है- विफलता की गारंटी।

क्या कांग्रेस मोदी की गारंटी से परेशान है?
कांग्रेस क्यों परेशान होगी। हमने तो बिना बोले, बिना हल्ला किए लोगों को गारंटी नहीं अधिकार दिए हैं। यूपीए सरकार में सोनिया गांधी अध्यक्ष थी, हमने न्यूनतम रोजगार गांरटी का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सूचना का अधिकार जैसे कानून बनाकर जनता को अधिकार संपन्न किया, लेकिन हमने ढिंढोरा नहीं पीटा और न ही ये सारे काम चुनावी प्रचार के लिए किए।

राहुल गांधी भाजपा की पहले 180 और अब 150 सीटों आने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की संभावित सीटें क्यों नहीं बता रहे? भाजपा तो 370 और 400 पार का नारा दे रही है।
मैं आंकड़ों पर नहीं जाता, लेकिन इतना दावे से कह सकता हूं कि हमारा अलायंस (INDIA) को मोदी सरकार को हटाने और अपनी सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए, उतनी या उससे ज्यादा सीटें आएंगी। रही चार सौ पार की बात तो मोदी और भाजपा ने चार सौ ही कहा है वरना वो तो 543 में छह सौ पार भी कह सकते हैं।

पीएम मोदी कहते हैं कि देश को कमजोर नहीं, मजबूत सरकार चाहिए, जो वही दे सकते हैं।
मजबूत या कमजोर नहीं, सरकार कैसे चलाई जाती है यह महत्वपूर्ण है। मजबूत सरकार का मतलब मनमानी करने वाली और तानाशाह सरकार नहीं है। आजादी के बाद जब 1947 में अंतरिम सरकार बनी तो उसमें पांच लोग तो बाहर के थे। तो क्या वो कमजोर सरकार थी और पंडित नेहरू ने उसे कितनी मजबूती से चलाया। मनमोहन सिंह ने दस साल गठबंधन सरकार चलाई और कई बड़े काम किए। पीएम मोदी की मजबूत सरकार ने नोटबंदी की, किसानों पर जुल्म किए, डीजल पेट्रोल, रसोई गैस आटा तेल सब मंहगा कर दिया। ऐसे मजबूत सरकार जनता को नहीं चाहिए, जो उसकी बात न सुनकर सिर्फ एक व्यक्ति की मनमानी से चले। ये तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि लोग ये सब सह रहे हैं और उठे नहीं, अगर उठ जाते तो पीएम मोदी बैठ जाते, लेकिन अब वोट से लोग अपना फैसला देंगे।

'मंदिर सबके लिए चुनाव प्रचार के लिए नहीं'

मल्लिकार्जुन खरगे (साक्षात्कार का अंश) - फोटो : amar ujala graphics
इंडिया गठबंधन जब पटना में बना था, तब जो माहौल बना था, वो आगे क्यों नहीं चल सका?
यह गलतफहमी है कि इंडि अलायंस पटना में बना। पटना में सिर्फ उसकी पहली बैठक हुई। अलायंस की सारी तैयारी दिल्ली में मेरे घर में हुई। यहीं गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं से एक-एक करके मैंने और राहुल ने बात शुरु की और सबको राजी किया। पटना में सिर्फ पहली बैठक हुई।

यानी नीतीश कुमार गठबंधन के सूत्रधार नहीं थे। उनके व जयंत चौधरी के एनडीए में जाने का कोई नुकसान हुआ कि नहीं।
जिसे भी श्रेय लेना है, वो लेता रहे। सच्चाई यही है कि गठबंधन की पहल कांग्रेस ने की और सबको इसके लिए राजी किया। हमारा पहला उद्देश्य था कि किस तरीके से भाजपा को हराया जा सकता है, उस पर काम होना चाहिए। सभी सहयोगी दलों ने मिलकर रास्ता निकाला और इंडिया गठबंधन बना। किसी एक व्यक्ति को इसका श्रेय नहीं है। सबने मिलकर इसे बनाया है। हमारी कोशिश रही कि कोई भी अलग न हो। हमने छोटे से छोटे दल का भी ध्यान रखा, लेकिन लोकतंत्र में आना जाना कोई नई बात नहीं है। जो चले गए उन पर क्या सोचना। हमने अब सीधे जनता से नाता जोड़ा है और हम महसूस कर रहे हैं कि लोगों को अपनी गलती का अहसास हो रहा है और सरकार के खिलाफ एक जबर्दस्त अंडर करंट है। लोग जाग्रत होकर उठ खड़े हुए हैं।

क्या सरकार के खिलाफ अंडर करंट आपको दिख रहा है और कैसे?
बिल्कुल है। सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा है, जो अंडर करंट में बदल चुका है और इसका पता आपको उस दिन चलेगा जब चुनाव के नतीजे आएंगे। जैसा 2004 में भाजपा के साथ इंडिया शाईनिंग में हुआ था, वही 2024 में भाजपा के साथ वहीं मोदी की गारंटी में होने वाला है। इनकी गारंटी फ्लाप होने वाली है, क्योंकि उनकी गारंटी पर अब किसी को भरोसा नहीं रहा है। उनकी पिछली सब गारंटियां झूठी साबित हुई हैं। लोगों को हमारे ऊपर भरोसा है, हमने राज्यों में अपने वादे पूरे किए हैं।

'चुनावी बॉन्ड से अरबों रुपये लिए गए... बड़े-बड़े ठेके दिए गए'

मल्लिकार्जुन खरगे (फाइल) - फोटो : एएनआई
विपक्ष एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता है, लेकिन पीएम मोदी कहते हैं कि उनके खिलाफ सारे भ्रष्टाचारी एकजुट हो गए हैं?
पीएम मोदी कुछ भी कहें, लेकिन जनता देख रही है कि कुल 440 विधायकों को प्रलोभन देकर किसने राज्यों में सरकारें गिराईं। कैसे जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप खुद भाजपा ने लगाए और एजेंसियों ने मामले दर्ज किए। उन्हें भाजपा में लेकर पाक साफ करार दिया जाता है। भाजपा में आते ही उन्हें मंत्री, मुख्यमंत्री बनाया जाता है। राज्यसभा में भेजा जाता है। चुनाव में टिकट दिया जाता है। नेताओं को लालच देकर डरा धमका कर दल-बदल कराया जा रहा है। इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए अरबों रुपये लिए गए और बदले में बड़े-बड़े ठेके दिए गए, एजेंसियों से राहत दी गई। ये सब क्या है।

लेकिन इल्केटोरल बॉन्ड्स में तो कांग्रेस और दूसरे दलों को भी चंदा मिला है।
मैं मानता हूं कि हमें और दूसरे दलो को भी चंदा मिला है, लेकिन हमारे पास ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स नहीं है। हमने किसी को डरा धमका कर चंदा नहीं लिया है। अगर लिया होता तो अब तक अमित शाह हमको सीधा अंदर डाल देते। इन्होंने भ्रष्ट लोगों से पैसा लेकर उनकी मदद की है। शाह साहब के पास एक बड़ी लॉन्ड्री है, जिसमें एक बहुत बड़ी वाशिंग मशीन है, जिसमें आदमियों की धुलाई होती है। सारे भ्रष्ट उसमें जाते है और क्लीन होकर निकलते हैं।

सवाल दलित पीएम का नहीं, लोकतंत्र बचाने का

मल्लिकार्जुन खरगे (फाइल) - फोटो : एएनआई
कर्नाटक आपका गृह राज्य है, वहां लोकसभा चुनावों में कांग्रेस क्यों भाजपा से पिछड़ जाती है।
कर्नाटक में अभी तक त्रिकोणीय मुकाबला होता रहा है, जिससे भाजपा विरोधी सेक्युलर वोटों का कांग्रेस और जनता दल(एस) के बीच बंटवारे का लाभ भाजपा को मिल जाता था। अब जद(एस) ने भाजपा से समझौता करके तीन सीटों पर ही लड़ेगा। इसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा और इस बार हम ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतेंगे।

अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो क्या देश को एक दलित वंचित तबके से आया प्रधानमंत्री मिलेगा?
दलित वंचित का नहीं, बल्कि संविधान को लोकतंत्र को बचाने का प्रश्न बड़ा है। यह हमारा साझा मुद्दा है। अगर देश संविधान लोकतंत्र सही रहा तो कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है, दलित भी और दूसरा कोई भी। हमें पहले भाजपा को हराना है। कौन, क्या बनेगा? ये बाद में सहयोगी दल मिल कर तय कर लेंगे। जो तय करेंगे, वो सबको मंजूर होगा।

भाजपा ही कह रही... चार सौ पार चाहिए, संविधान बदलना है

मल्लिकार्जुन खरगे (फाइल) - फोटो : एएनआई
विपक्ष के इस आरोप का कि अगर मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो संविधान बदल देंगे, का क्या आधार है?
भाजपा नेता ही बयान दे रहे हैं कि इसलिए चार सौ पार चाहिए कि संविधान बदलना है। ये शिगूफा छोड़कर भाजपा प्रतिक्रिया देख रही है। जब उसे लगा कि ये उल्टा पड़ रहा है तो फौरन खंडन आ जाता है। ये क्या बताता है कि इरादे नेक नहीं हैं। पहले बयान दिलवाओं, फिर कहो कि अगर डॉ. अंबेडकर भी आ जाएं तो संविधान नहीं बदला जा सकता। ये किसी प्रधानमंत्री को ऐसा कहना शोभा नहीं देता।

भाजपा कहती है कि उसके पास नरेंद्र मोदी जैसा लोकप्रिय नेता है, जबकि विपक्ष नेता विहीन है।
गठबंधन का मतलब है कि मिलकर चुनाव लड़ो और जीतने के बाद नेता चुन लो। भाजपा में सिर्फ मोदी जी अकेले नेता हैं। हमारे गठबंधन में अपने अपने दलों के सब नेता हैं। भाजपा में लोकतंत्र नहीं है। वहां सिर्फ मोदी जी की चलती है। वही सुहागन जो पिया मन भाए वाली बात है भाजपा में। हमारे यहां इंडिया गठबंधन में सब नेता मिल कर राय मशविरा करते हैं, कई बार हम अपनी बात मनवाने के लिए एक दूसरे से लड़ते भी हैं और फिर एक निष्कर्ष पर पहुंच कर सब उसे मानते हैं। यही लोकतांत्रिक तरीका है।
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क्या एक गारंटी देंगे कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो पांच साल चलेगी?
जरूर चलेगी। हमने चला कर दिखाया है। 2004 में और 2009 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में हमने गठबंधन सरकार बनाई और पांच-पांच साल चलाई। जब हम पहले दस साल चला चुके हैं तो अब क्यों नहीं। क्या सिर्फ एक व्यक्ति ही सब कुछ कर सकता है, उसके अलावा दुनिया में कोई दूसरा पैदा ही नहीं हुआ।

कांग्रेस उत्तर भारत समेत उन राज्यों जहां बहुत कमजोर है, में कैसे मजबूत होगी?
ये हमारी चिंता है, लेकिन हमारा पहला उद्देश्य संविधान और लोकतंत्र बचाना है और इसीलिए जहां हम कमजोर हैं, हमने गठबंधन किया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र में हमने सहयोगी दलों के साथ सीटों का बंटवारा किया और कई जगह कुछ त्याग भी किया है, लेकिन बड़े उद्देश्य के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। चुनावों के बाद कांग्रेस को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

कांग्रेस छोड़कर जाने वालों की तादाद क्यों बढ़ रही है?
भाजपा अगर इतनी ही मजबूत है तो कांग्रेस या दूसरे दलों से लोगों को क्यों तोड़ने में जुटी है। हकीकत है कि भाजपा कमजोर हो रही है और डर गई है। इसलिए वह लालच देकर डरा धमका कर उनको तोड़ रही है जो कमजोर लोग हैं। कांग्रेस में भी लोग आते हैं, लेकिन बिना किसी लालच या डर के। अपनी मर्जी से कांग्रेस के कार्यक्रमों और नीतियों से प्रभावित होकर कई महत्वपूर्ण लोग पार्टी में आए हैं, लेकिन कुछ अपवादों को छोडकर हम अपने समर्पित कार्यकर्ताओं की कीमत पर किसी को नहीं लेते हैं। कांग्रेस की अपनी कितनी सीटें आएंगी और उत्तर से या दक्षिण से कहां से ज्यादा सीटें जीतेंगे। मैं कोई आंकड़ा नहीं दूंगा भाजपा की तरह, लेकिन हम करीब 350 सीटों पर लड़ रहे हैं जिनमें अधिकतम सीटों पर कांग्रेस जीतेगी। हम देश के हर क्षेत्र से सीटें जीतेंगे। उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम हर तरफ कांग्रेस जीत दर्ज करेगी और इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी।
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