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Rahul Gandhi: 'देश में जाति जनगणना होगी', नागपुर में बरसे राहुल गांधी; आरएसएस-भाजपा को भी घेरा

Wed, 06 Nov 2024 02:55 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नागपुर

सार

Maharastra Vidhan Sabha Chunav 2024: राहुल ने कहा कि हम 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा की दीवार भी तोड़ देंगे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की ओर से तैयार किया गया संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
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Rahul Gandhi - फोटो : PTI
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विस्तार
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर देश में जाति जनगणना की पैरवी की है। उन्होंने नागपुर में बुधवार को कहा कि देश में जाति आधारित जनगणना होगी। इससे दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों और आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय का पता चल सकेगा। संविधान सम्मान सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना से सब कुछ साफ हो जाएगा। हर किसी को पता चल जाएगा कि उनके पास कितनी ताकत है और उनकी भूमिका क्या है।

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'50 प्रतिशत आरक्षण सीमा की दीवार भी तोड़ देंगे'
राहुल ने कहा कि हम 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा की दीवार भी तोड़ देंगे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की ओर से तैयार किया गया संविधान सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के लोग संविधान पर हमला करते हैं, तो वे सिर्फ इस किताब पर हमला नहीं कर रहे होते, वे भारत की आवाज पर हमला कर रहे होते हैं। हमारे संस्थान संविधान से बने हैं। अगर संविधान नहीं होगा, तो कोई चुनाव आयोग नहीं होगा। आरएसएस इस पर सीधे हमला नहीं कर सकता। अगर वे इसके खिलाफ आगे आकर लड़ेंगे, तो वे 5 मिनट में हार जाएंगे। 'विकास', 'प्रगति' और 'अर्थव्यवस्था', वे इन शब्दों के पीछे छिपकर हमला करने आते हैं।
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राहुल ने दावा किया कि अदाणी की कंपनी के प्रबंधन में आपको एक भी दलित, ओबीसी और आदिवासी नहीं मिलेगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आप सिर्फ 25 लोगों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ करते हैं, लेकिन जब मैं किसानों की कर्ज माफी की बात करता हूं तो मुझ पर हमला किया जाता है।

दीक्षाभूमि पर अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की
20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राहुल ने 'दीक्षाभूमि' का दौरा किया और भारत के संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंबेडकर ने 14 अक्तूबर, 1956 को दीक्षाभूमि पर अपने हजारों अनुयायियों, मुख्य रूप से दलितों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था।

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