दिल्ली विधानसभा चुनाव के पूर्ण नतीजे कुछ ही देर में घोषित हो जाएंगे। इस चुनाव में सभी राजनीतिक दलों की निगाह बिजवासन विधानसभा सीट पर लगी रही, जो कि दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए कैलाश गहलोत इस सीट से आगे चल रहे हैं। वह पहले नजफगढ़ से विधायक थे। वहीं, इस सीट को नाक का मुद्दा बना चुकी आप के सुरेंद्र भारद्वाज और कांग्रेस ने देवेंद्र सहरावत को टिकट दिया है। देवेंद्र सहरावत भी पहले आप के नेता थे। लेकिन दिल्ली चुनाव से पहले वे कांग्रेस में शामिल हो गए।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में बिजवासन में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…
दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। इसके बाद दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। फिर दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था, जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।
इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।
दिल्ली चुनाव 2025
- फोटो : अमर उजाला
2008 में सीट पर भाजपा को जीत
2008 में यह सीट अस्तित्व में आई। यहां पहली बार हुए चुनावों में भाजपा को जीत मिली। इस सीट पर भाजपा ने सत प्रकाश राणा ने कांग्रेस के विजय सिंह लोचव को 2005 वोट से हराया।
2013 में भाजपा सत प्रकाश राणा दूसरी बार चुने गए
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबला करने के लिए कांग्रेस, भाजपा और पहली बार हाथ आजमा रही आम आदमी पार्टी भी थी। इस बार मुकाबला भाजपा और आप के बीच देखने को मिला। इस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। भाजपा के सत प्रकाश राणा ने आप के कर्नल देवेंद्र सहरावत को 2414 वोट से हरा दिया था। भाजपा को 35988 और आप को 33574 वोट मिले थे।
आप के कर्नल देवेंद्र सहरावत जीते
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।
इस चुनाव में बिजवासन सीट पर आप को जीत मिली। आप के कर्नल देवेंद्र सहरावत ने भाजपा के सत प्रकाश राणा को 19536 वोट से हरा दिया था। आप को 65006 और भाजपा को 45470 वोट मिले थे।
2020 आप के भूपिंदर सिंह जून की जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। इस सीट पर दूसरी बार भी आप ही ने जीत दर्ज की थी। आप के भूपिंदर सिंह जून ने भाजपा के सत प्रकाश राणा को केवल 753 वोट से हराया था।