Bihar Election 2025: बिहार में कुल 243 सीटों में से इनमें से 49 सीटें तिरहुत प्रमंडल के अंदर आती हैं। सीटों के लिहाज से ये बिहार का सबसे बड़ा प्रमंडल है। इसमें छह जिले आते हैं। प्रमंडल के जिलों में सबसे ज्यादा 12 सीटें पूर्वी चंपारण में आती हैं।
बिहार में विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीखें करीब आ चुकी है। अगले हफ्ते की 6 तारीख को पहले चरण का मतदान भी होगा। 11 नवंबर को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे। 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। बिहार की बात करें तो यह राज्य नौ प्रमंडलों में बंटा हुआ है। अमर उजाला की इस सीरीज में हम आपको बिहार हर प्रमंडल के पिछले चुनावी नतीजों के बारे में बता रहे हैं। आच तीसरी कड़ी में तिरहुत प्रमंडल के बारे में बताने जा रहे हैं। तिरहुत प्रमंडल में कुल छह जिले आते हैं। इसमें मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिला शामिल है।
तिरहुत प्रमंडल का सियासी समीकरण कैसा है? पिछले तीन चुनाव में यहां के नतीजे किसके पक्ष में रहे? 2020 किस दल को कितनी सीटों पर सफलता मिली थी? इस बार की चर्चित सीटें कौन सी हैं? आइये जानते हैं…
तिरहुत क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या है?
प्रदेश में 243 सीटों में से 49 सीटें तिरहुत प्रमंडल में आती हैं। इस क्षेत्र में 06 जिले आते हैं। सबसे ज्यादा 12 सीटें पूर्वी चंपारण जिले में है। इसके बाद मुजफ्फरपुर में 11, पश्चिमी चंपारण में नौ, वैशाली और सीतामढ़ी में आठ-आठ और शिवहर जिले में सिर्फ एक सीट आती है।
2020 में कैसे रहे थे नतीजे?
2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच में था। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं थीं। इनमें सबसे ज्यादा 74 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जदयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीट पर सफलता मिली थी। राज्य की 110 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं। 75 सीटें जीतकर राजद राज्य की सबसे बड़ा दल बना था। इसके साथ ही कांग्रेस को 19, वामदलों को 16 सीट पर जीत मिली थी। इनमें 12 सीटें भाकपा (माले) और दो-दो सीटें भाकपा और माकपा के खाते में गईं थी। अन्य दलों की बात करें तो एआईएमआईएम ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीट पर जीत मिली थी।
तिरहुत प्रमंडल में किसे मिली बढ़त?
2020 के चुनाव में भाजपा को तिरहुत में सबसे ज्यादा सीटें मिली थी। एनडीए ने 33 सीटों के साथ इस प्रमंडल पर प्रभुत्व कायम किया। महागठबंधन को यहां 16 सीटें ही मिल पाईं थी। दलवार आंकड़ों की बात करें तो एनडीए में शामिल भाजपा को 25, जदयू को छह और वीआईपी को दो सीट मिली थी। वहीं, महागठबंधन में राजद को 13 और कांग्रेस को दो वहीं एक सीट भाकपा (माले) के खाते में गई थी।
2015 में कैसे थे नतीजे?
प्रदेश में 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच में मुकाबला हुआ। इस चुनाव में महागठबंधन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी भी शामिल थी। जदयू के अलावा राजद और कांग्रेस ने साथ मिलकर यह चुनाव लड़ा। वहीं, एनडीए में भाजपा के साथ लोजपा, जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा शामिल थे।
इस चुनाव में महागठबंधन ने 178 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, एनडीए को 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वाम दलों के खाते में तीन सीटें गईं थी। दलवार आंकडे़ की बात करें तो राजद को सबसे ज्यादा 80 सीटें मिली थीं। जदयू के खाते में 71 और कांग्रेस को 27 सीटों पर सफलता मिली थी। एनडीए में सबसे ज्यादा 53 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। लोजपा और रालोसपा को दो-दो और हम को एक सीट जीतने में सफलता मिली थी। वाम दलों में तीनों सीटें भाकपा (माले) ने जीती थीं। बाकी चार सीटों रप निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे थे।
2015 में तिरहुत प्रमंडल में किसे मिली बढ़त?
2015 के चुनावों में तिरहुत प्रमंडल में भी महागठबंधन ने बढ़त बनाई थी। यहां भाजपा और राजद के बीच मुकाबला देखने को मिला। 49 सीटों में से महागठबंधन को 26 और एनडीए को 20 सीटें मिली थीं। दलवार आंकड़ों को समझे तो महागठबंधन में राजद को 17, जदयू को छह और कांग्रेस को तीन सीटें मिली थी। वहीं, एनडीए की बात करें तो भाजपा को 18 और लोजपा को दो सीटें मिली थी। बाकी तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे थे।
2010 में कैसे थे नतीजे?
2008 में परिसीमन के बाद यहां 2010 में पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में एकतरफा एनडीए को जीत मिली थी। एनडीए में जदयू और भाजपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था। वहीं राजद और लोजपा साथ थे। वहीं, कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में एनडीए को 243 में से 206 सीटों पर एकतरफा जीत मिली। राजद-लोजपा गठबंधन को महज 25 तो कांग्रेस को चार सीटों से संतोष करना पड़ा। बाकी सात सीटों में से छह निर्दलियों के खाते में गई थी। वहीं, चकाई सीट पर झामुमो के सुमित कुमार सिंह जीते थे। दलवार आंकड़ों की बात की जाए तो एनडीए की 206 सीटों में से 115 जदयू और 91 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। वहीं, राजद को 22 और लोजपा को 3 सीटों पर जीत मिली थी।
2010 में तिरहुत प्रमंंडल में किसे मिली बढ़त?
2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 45 और राजद गठबंधन को यहां केवल एक सीट राजद को मिली थी। वहीं कांग्रेस यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। एनडीए में दलवार आंकड़ों की बात करें तो भाजपा को 21 और जदयू को 24 सीटें मिली थीं। इसके अलावा निर्दलियों को तीन सीटें मिली थी।
इस चुनाव में तिरहुत प्रमंडल की कौन सीटें हैं चर्चा में?
तिरहुत प्रमंडल की सबसे चर्चित सीटों की बात करें तो इनमें राघोपुर, नौतन, बेतिया , शिवहर जैसी सीटें शामिल है। आइये इन सीटों के बारे में जानते हैं…
राघोपुर: इस प्रमंडल की सबसे चर्चित सीट राघोपुर है। यहां से पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव राजद के उम्मीदवार हैं। महागठबंधन ने इस बार तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है। तेजस्वी ने अपने चुनावी करियर की शुरुआत इसी सीट से की थी। 2015 और 2020 में वह इस सीट से जीत चके हैं। भाजपा ने यहां से पिछली बार के उम्मीदवार सतीश कुमार को टिकट दिया है। सतीश कुमार ने 2010 में जदयू के टिकट पर तेजस्वी यादव की मां और राजद की उम्मीदवार राबड़ी देवी को हराया था। जनसुराज ने चंचल कुमार को यहां मैदान में उतारा है।
बेतिया: बिहार की पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी यहां एक बार फिर मैदान में हैं। वह यहां से भाजपा के टिकट पर पांच बार चुनाव जीत चुकी हैं। इस बार भी भाजपा ने उन्हीं पर विश्वास जताया है। कांग्रेस ने उनके सामने वसी अहमद को टिकट दिया है। जनसुराज की बात करें तो यहां से अनिल कुमार सिंह को टिकट मिला है।
शिवहर: राजद ने इस बार यहां से नवनीत कुमार को टिकट दिया है। नवनीत के पिता और दादा यहां के पूर्व विधायक रहे हैं। नवनीत के पिता अजीत झा दो बार तो दादा रघुनाथ झा छह बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। जदयू ने यहां से श्वेता गुप्ता को मैदान में उतारा है। जनसुराज ने नीरज सिंह मैदन में है। 2020 में यहां से राजद के चेतन आनंद को जीत मिली थी।महुआ: लालू यादव के बडे़ बेटे तेज प्रताप यादव पांच साल बाद फिर अपनी बनाई पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। राजद ने यहां से मुकेश कुमार रौशन और जनसुराज से इंद्रजीत प्रधान को टिकट दिया है।
गायघाट: लोजपा सांसद वीणा देवी की बेटी कोमल सिंह मैदान में हैं। कोमल के पिता जदयू के एमएलसी हैं। जनसुराज ने अशोक कुमार सिंह और राजद ने निरंजन रॉय को मैदान में उतारा है।