पूर्णिया की हवा में इन दिनों कुछ अलग ही गूंज है, एक ऐसी गूंज, जो मिट्टी की सोंधी महक के साथ राजनीति की सरगर्मी को भी समेटे हुए है। खेतों में झूमती बालियां अब सिर्फ फसल नहीं, बल्कि बदलाव के बीज भी उगा रही हैं। गली-कूचों में चर्चा है, चाय की दुकानों पर बहस है, चौपालों पर उम्मीदें हैं, हर ओर वही सवाल गूंज रहा है, "इस बार किसके हाथ लगेगी सत्ता की चाबी?" जब अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ पूर्णिया की धरती पर पहुंचा, तो लगा जैसे लोकतंत्र की लहर यहां के हर दिल में उठ खड़ी हुई हो, जहां उम्मीदें, चिंताएं और उत्साह एक साथ बह रहे हैं, और हर चेहरा भविष्य की नई कहानी लिखने को तैयार है।
पूर्णिया के स्थानीय निवासी रुपेश कुमार ने कहा कि इस बार वे रोजगार और पलायन के मुद्दे पर वोट देंगे। उन्होंने कहा, "हम महागठबंधन को वोट देंगे, क्योंकि एनडीए में एससी-एसटी वर्ग को पर्याप्त सीटें नहीं मिल रही हैं। हमें उम्मीद है कि तेजस्वी यादव इन वर्गों को ज्यादा भागीदारी देंगे।" वहीं बिट्टू राणा ने कहा, "मैं पहली बार वोट दे रहा हूं। मेरा ध्यान अस्पतालों की सुविधा पर है। वहां इलाज की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। मैं किसी जातिवादी पार्टी को वोट नहीं देना चाहता, इसलिए इस बार महागठबंधन को वोट दूंगा।"
नवीन कुमार पासवान ने कहा, "अब हमें चिराग पासवान पसंद नहीं आ रहे हैं। वे पासवान समाज की समस्याओं का हल नहीं निकाल पा रहे हैं। वे अपने पिता रामविलास पासवान जैसे नहीं हैं। इसी कारण हम इस बार महागठबंधन को वोट देंगे। बिहार में अभी भी हत्या और अपराध की घटनाएं हो रही हैं।"
नीतीश शुक्ला ने कहा, “हम उसी को वोट देंगे जो युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देगा। इस बार युवा जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “2005 की समस्याएं अलग थीं और आज की चुनौतियां अलग हैं। अब शिक्षा का स्तर बढ़ा है, इसलिए नौकरी की मांग भी ज़्यादा हो गई है। मौजूदा सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा यहां की सड़कों और कनेक्टिविटी में भी काफी सुधार हुआ है।”
कुमुद पासवान ने कहा, "यहां लोग जदयू को समर्थन दे रहे हैं। आरजेडी के समय में यहां अपराध बहुत ज्यादा था, लेकिन अब हालात काफी बेहतर हैं। पहले यहां आना-जाना मुश्किल होता था, अब ऐसा नहीं है। पहले यहां मेडिकल कॉलेज नहीं था, लेकिन अब बन गया है। पहले यूनिवर्सिटी भी नहीं थी, अब वह भी खुल गई है।"