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Assam Phase 1 Election: परिसीमन के बाद बना नया लोकसभा क्षेत्र बना काजीरंगा, जोरहाट सीट पर रहेगी सबकी नजर

एन. अर्जुन, गुवाहाटी Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 11 Apr 2024 11:39 AM IST

सार

Election 2024: पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में असम में सबसे सबसे ज्यादा 14 लोकसभा सीटें हैं। 2019 में भाजपा ने यहां से 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार असम में परिसीमन के बाद कलियाबोर सीट खत्म हो गई जबकि उसकी जगह नई सीट काजीरंगा बनी है। 
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असम लोकसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला


इन सीटों पर एक नजर

डिब्रूगढ़:

सोनोवाल और लुरिनज्योति के बीच है सीधी टक्कर डिब्रूगढ़ सीट: यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। 1952 से 1999 तक यह कांग्रेस के पास रही है. लेकिन 2004 में पहली बार इस सीट पर अगप के उम्मीदवार सर्बानंद सोनोवाल ने यह सीट कांग्रेस से छीनी। हांलाकि 2009 में कांग्रेस ने फिर से इसे छीन लिया। 2014 में यहां से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। यहां से भाजपा के रामेश्वर तेली निवर्तमान सांसद हैं, दो चाय जनजाति से संबंध रखते हैं। इस बार उनका विरोध होने पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को मैदान में उतारा है। जबकि उनके सामने हैं, एजेपी (असम जातीय परिषद और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त ) लुरिनज्याति गोगोई। आम आदमी पार्टी ने डिब्रूगढ़ से चाय जनजाति के नेता मनोज धनोवार को मैदान में उतारा है। कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए 48 साल के मनोज हालांकि राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि डिब्रूगढ़ सीट पर मुक़ाबला सर्बानंद और लुरिनज्याति के बीच होने की उम्मीद है।


2019 लोकसभा चुनाव परिणाम:- रामेश्वर तेली भाजपा    659,583          पबन सिंह घटोवार कांग्रेस    295,017

2014 लोकसभा चुनाव परिणाम:- रामेश्वर तेली भाजपा    494, 364          पबन सिंह घटोवार कांग्रेस    309,017



जोरहाट: दो आहोम नेताओं के बीच से सीधा मुकाबला 

यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। इस बार असम की यह हॉट सीट है। सबसे अधिक अगर किसी सीट पर नजर है, तो इस बार इस सीट पर सबकी नजर रहेगी। क्योंकि यहां से इस बार कांग्रेस ने अपने युुवा नेता गौरव गोगोई को उतारा है। भले ही यह सीट 1952 से 2009 तक अगर तीन बार को छो़ड़ दें तो इस सीट पर यह कांग्रेस के पास रही है। लेकिन पिछले दो बार से इस बर भाजपा का कब्जा रहा है। इस सीट पर असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई भी सांसद रहे। सबसे लंबे समय तक रहे, विजोय कृष्ण हांडिक यहां के सांसद रहे। वे 1991 से 2014 तक यहां से सांसद रहे। 2014 में उनको भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा ने हराया। भाजपा ने 2019 में यहां से तपन कुमार गोगोई को उतारा, फिलहाल वे यहां से सांसद हैं। इस बार फिर से भाजपा ने तपन कुमार गोगोई पर भरोसा जताया है। उनकी सीधी टक्कर कांग्रेस के गौरव गोगोई से होगा। इस बार इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। देखना यह दिलचस्प होगा कि यहां से इस बार जनता किसे लोकसभा भेजती है।


लोकसभा चुनाव 2019 तपन कुमार गोगोई       भाजपा    543,288 51.35 प्रतिशत                 सुशांत बरगोहाईं    कांग्रेस    460,635 43.54 प्रतिशत

लोकसभा चुनाव 2014 कामाख्या प्रसाद तासा  भाजपा    456,420 48.99 प्रतिशत                  बिजोय कृष्ण हांडिक    कांग्रेस    354,000 38.00 प्रतिशत 
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भाजपा का पलड़ा भारी, कांग्रेस की भी है तैयारी पूरी सोनितपुर: पहले इस सीट को तेजपुर सीट कहा जाता था, इस बार (2024) इसका नाम बदल कर सोनितपुर कर दिया गया है। यह सीट कांग्रेस की 1952 से 2009 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही है। केवल 1977 में जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा किया था। उससे पहले और उसके बाद 2009 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही है। तीन बार मणिकुमार सुब्बा यहां से सांसद रहे। तीन बार बिजोय चंद्र भगवती सांसद रहे। लेकिन 2009 में पहली बार इस सीट पर असम गण परिषद ने कब्जा किया। अगप के जेसेफ टोप्पो 2009 में यहां से सांसद बने। उन्होंने पहली बार कांग्रेस को टक्कर दी और मात भी दी। उसके बाद 2014 भाजपा ने यहां से राम प्रसाद शर्मा को टिकट दिया। यह नेपाली बाहुल इलाका होने के नाते यहां से शर्मा ने जीत हासिल की और सांसद पहुंचे। लेकिन 2019 में भाजपा ने यहां से पल्लव लोचन दास को मैदान में उतारा। इस बार पल्लब लोचन ने जीत दर्ज की और कांग्रेस के एमजीवीके भानु को हराया। 2024 में भाजपा ने एक बार फिर यहां से नए उम्मीदवार रंजित दत्ता को उतारा है। यहां से कांग्रेस ने प्रेम लाल गंजु को अपना प्रत्याशी बनाया है। यहां पर भी भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है लेकिन भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई देता है। क्योंकि पिछली दो बार से भाजपा ने तेजपुर


चुनाव 2019     पल्लव लोचन दास    भाजपा    684,166   57.48 प्रतिशत     एमजीवीके भानू    कांग्रेस    441,325    37.03 प्रतिशत

चुनाव 2014     राम प्रसाद शर्मा    भाजपा        446,511   45.52 प्रतिशत    भूपेन कुमार बरा     कांग्रेस    360,491   36.75 प्रतिशत 


नई सीट, नई उम्मीद: किसके सिर बंधेगा सेहरा काजीरंगा :

कलियाबोर लोकसभा क्षेत्र, जो कांग्रेस माना जाता था। 1967 के बाद अगर दो बार छोड़ दें तो अब तक यहां पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। गोगोई परिवार का वर्चस्व रहा। यहां से असम के पूर्व मुख्यमंत्री सांसद रहे। उसके बाद उनके भाई दीप गोगोई सांसद रहे और फिर 2014 से गौरव गोगोई इस सीट से सांसद रहे। लेकिन परिसीमन प्रक्रिया के बाद यह सीट अस्तित्व में नहीं रहा। उसकी जगह जगह काजीरंगा ने ले ली है। काजीरंगा निर्वाचन क्षेत्र असम के 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह लोकसभा परिसीमन प्रक्रिया के बाद अस्तित्व में आया है। कलियाबोर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, पिछले साल अगस्त में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा की गई परिसीमन प्रक्रिया के बाद अस्तित्व में नहीं रहा और एक नया निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आया काजीरंगा। इसमें कलियाबोर, बरहामपुर, बिन्नाकांडी, होजाई, लुमडिंग, गोलाघाट, डेरगांव और खुमताई, बोकाखट और सरूपथार काजीरंगा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं, हालांकि, 4 सीटें जो कलियाबोर ढिंग, बाताद्रबा, रूपोहीहाट और समागुरी में हुआ करती थीं, को नागांव निर्वाचन क्षेत्र में शामिल कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस की रही है। गौरव गोगोई ने 2014 और 2019 में दो बार कलियाबोर सीट जीती। 2019 में, गौरव गोगोई ने एजीपी के मोनी माधब महंत को हराकर कलियाबोर जीती थी। इस सीट पर समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। यह एक तरह से चाय बागान और आदिवासी सीट बन गया है। इसी समीकरण को देखते हुए दोनों प्रमुख पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इस बार यहां से भाजपा ने कामाख्या प्रसाद तासा को उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस ने रोसलीना तिर्की को मैदान में उतारा है। देखना यह है कि परिसीमन के बाद बने इस नए लोकसभा सीट पर जीत किसकी होती है।


2019 लोकसभा चुनाव परिणाम (कलियाबोर)    गौरव गोगोई     कांग्रेस    786,092 55.18 प्रतिशत            मनि माधव महांत    एजीपी    576,098 40.44 प्रतिशत

2014 लोकसभा चुनाव परिणाम (कलियाबोर)     गौरव गोगोई    कांग्रेस    443.315 37.97 प्रतिशत             मृणाल कुमार सैकिया    भाजपा    349,441 19.93 प्रतिशत


सांसद बदलने की परंपरा को लगा ब्रेक, 2014 से भाजपा लखीमपुर सीट:

असम की लखीमपुर लोकसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। यह सीट कांग्रेस के दबदबे वाली सीट रही है लेकिन 2014 से इस सीट पर लगातार भाजपा विजय होती आई है। फिलहाल इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है और प्रदान बरुआ यहां के सांसद हैं। इस बार भी भाजपा ने प्रदान बरुआ पर ही भरोसा किया है जबकि कांग्रेस ने यहां से उदय शंकर हजारिका को मैदान में उताार है। जबकि तृणमूल कांग्रेस ने घनकांत सूतिया को मौका दिया है। इस सीट पर भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी सांसद रहे हैं। 2016 में जब वे असम के मुख्यमंत्री बने तब यहां पर उप निर्वाचन हुआ, जिसमें भाजपा के प्रत्याशी प्रधान प्रदान बरुआ सांसद हैं। इस बार भी भाजपा ने उन पर विश्वास जताया है। परिसीमन के बाद इस लोकसभा क्षेत्र से दो विधानसभा क्षेत्रों माजुली और चबुआ को हटाकर रोंगोनांदी और सिसिबोरगांव को जोड़ा गया है। लखीमपुर जिले में स्थित में स्थित लखीमपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र असम के प्रशासनिक जिले का हिस्सा है। उत्तरी लखीमपुर शहर न केवल जिले की प्रशासनिक सीट है, बल्कि लखीमपुर जिले में नगरपालिका बोर्ड भी है। असम के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में स्थित यह संसदीय क्षेत्र उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, दक्षिण में जोरहाट जिले के माजुली डिवीजन, पश्चिम में सोनितपुर जिले और पूर्व में धेमजी जिले से घिरा है। यह संसदीय क्षेत्र चाय, चावल, गन्ना और सरसों जैसी अन्य फसलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। इस सीट पर पहला चुनाव 1967 में हुआ। उस चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। इसके बाद अगले दो चुनावों में भी कांग्रेस की जीत हुई। 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी। अगले चुनाव यानी 1991 में कांग्रेस ने वापसी की लेकिन अगले चुनाव में फिर उसकी हार हो गई। इस सीट पर किसी एक पार्टी का लंबे समय तक राज नहीं रहा है। हालांकि 2014 से यहां पर भाजपा काबिज है। पिछले दो चुनावों की बात करें तो उसमें बीजेपी जीतती आई है.


2019 लोकसभा चुनाव के नतीजे

प्रदान बरुआ    भाजपा    776,406    60.49 प्रतिशत              अनिल बोरगोगाईं            कांग्रेस    425,855        31.18 प्रतिशत


2016 में उप चुनाव (यह सीट सर्बानंद सोनावाल के छोड़ने से खाली हो गई थी।)

प्रदान बरुआ    भाजपा    551,663    54.87 प्रतिशत              डॉ. हेमा हरी प्रसन्ना पेगु    कांग्रेस    361,444        35.95 प्रतिशत


2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे

सर्बानंद सोनोवाल    भाजपा    612,543  55.05 प्रतिशत                  रानी नराह    कांग्रेस    320,405                28.80 प्रतिशत
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