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Pawan Singh: वाम दलों का गढ़ रही आसनसोल सीट भाजपा के लिए कैसे बनी नाक का सवाल, पवन सिंह ने क्यों नाम वापस लिया?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 04 Mar 2024 05:41 PM IST

सार

Pawan Singh And Asansol Loksabha Seat: पश्चिम बंगाल में आसनसोल लोकसभा क्षेत्र में लगभग आधे मतदाता पड़ोसी राज्य झारखंड और बिहार मूल के हैं। यह सीट वामपंथियों का गढ़ रही है। तृणमूल कांग्रेस केवल एक चुनाव ही जीती है जबकि भाजपा ने 2014 और 2019 में आसनसोल में जीत दर्ज की थी। 
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आसनसोल लोकसभा क्षेत्र - फोटो : amar ujala
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची जारी हुई तो उसमें चार भोजपुरी सितारों के नाम भी सामने आए। इसी में एक नाम आया 'पावर स्टार' कहे जाने वाले पवन सिंह का। उन्हें पश्चिम बंगाल में आसनसोल सीट से टिकट दिया गया है। यहां से 'बिहारी बाबू' शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के मौजूदा सांसद हैं। महज 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि पवन ने बतौर प्रत्याशी अपना नाम वापस ले लिया। हालांकि, इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने पवन सिंह की कुछ पुरानी फिल्मों के दृश्य साझा किए और इन्हें बंगाली अस्मिता के खिलाफ बताया। 

आइये जानते हैं कि पवन सिंह को आसनसोल से क्यों प्रत्याशी बनाया गया था? उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने पर विवाद क्या हुआ? पवन सिंह ने अपनी उम्मीदवारी क्यों वापस ली? 

 
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आसनसोल लोकसभा क्षेत्र - फोटो : amar ujala
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची जारी हुई तो उसमें चार भोजपुरी सितारों के नाम भी सामने आए। इसी में एक नाम आया 'पावर स्टार' कहे जाने वाले पवन सिंह का। उन्हें पश्चिम बंगाल में आसनसोल सीट से टिकट दिया गया है। यहां से 'बिहारी बाबू' शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के मौजूदा सांसद हैं। महज 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि पवन ने बतौर प्रत्याशी अपना नाम वापस ले लिया। हालांकि, इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने पवन सिंह की कुछ पुरानी फिल्मों के दृश्य साझा किए और इन्हें बंगाली अस्मिता के खिलाफ बताया। 

आइये जानते हैं कि पवन सिंह को आसनसोल से क्यों प्रत्याशी बनाया गया था? उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने पर विवाद क्या हुआ? पवन सिंह ने अपनी उम्मीदवारी क्यों वापस ली? 
 

भोजपुरी स्टार पवन सिंह - फोटो : अमर उजाला
टीएमसी के पास है आसनसोल सीट

भाजपा ने 2 मार्च को 195 उम्मीदवारों वाली पहली सूची जारी कर दी। जहां भाजपा की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से फिर से उम्मीदवार बनाए गए हैं। इस सूची में भोजपुरी सिनेमा से भी चार सितारों को मौका मिला। पहली सूची में पश्चिम बंगाल की 26 सीटों के उम्मीदवारों की भी घोषणा की गई। राज्य की आसनसोल सीट से भोजपुरी स्टार पवन सिंह को टिकट दिया गया था। यहां से अभिनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के सांसद हैं। 2019 में यहां से गायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो भाजपा के टिकट पर जीते थे। सुप्रियो ने बाद में सांसदी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह टीएमसी में शामिल हो गए। ममता बनर्जी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारा जबकि, आसनसोल से भाजपा के ही पूर्व नेता शत्रुघ्न सिन्हा को उतारा था। 



जब पार्टी ने पवन के नाम का एलान किया था तो उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पार्टी नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि पार्टी ने उन पर भरोसा किया है तो वे पूरी ईमानदारी से आसनसोल की धरती पर जनता की सेवा करेंगे। 

पवन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
आसनसोल से पवन सिंह ही उम्मीदवार क्यों?
पवन सिंह की उम्मीदवारी को समझने से पहले हमें आसनसोल को समझना होगा। दरअसल, आसनसोल पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में स्थित एक शहर है। यह कोलकाता के बाद राज्य का सबसे बड़ा शहर है। 2011 की जनगणना के अनुसार, शहर में 12 लाख से अधिक लोग रहते हैं। झारखण्ड से सटी पश्चिमी सीमा पर स्थित यह शहर खनिज संपदा से संपन्न है। इसके अलावा आसनसोल पश्चिम बंगाल की सीमा के करीब बहुत पुराना रेलवे जंक्शन है। 

आसनसोल लोकसभा सीट में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिसमें करीब 15 लाख पात्र मतदाता हैं। ये मतदाता कोयला खदान श्रमिक, कारखाने के श्रमिक, स्क्रैप डीलर और अल्पसंख्यक हैं। लगभग आधे मतदाता हिंदी भाषी हैं, जो मूलतः पड़ोसी राज्य झारखंड और बिहार के हैं।

श्रमिक मतदाताओं की बहुलता वाली यह सीट वामपंथियों का गढ़ रही है। यहां हुए 16 में से नौ चुनाव माकपा को जीत मिली है। 2022 में हुए उप-चुनाव में यहां से तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। 2014 के लोकसभा चुनावों में दार्जिलिंग के साथ आसनसोल उन दो सीटों में से एक थी जो भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जीती थी। 2019 में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन को बेहतर किया और आसनसोल सहित राज्य की 18 सीटें जीतने में सफल रही। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को आसनसोल में सात विधानसभा क्षेत्रों में से दो में जीत मिली।

बाबुल सुप्रियो के भाजपा छोड़ने के बाद आसनसोल भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है। यही कारण है कि बिहार और झारखंड के प्रवासियों के प्रभाव वाली सीट पर पार्टी ने इस बार पवन सिंह को उतारा। पवन सिंह बिहार के आरा के रहने वाले हैं और बीते कई दिनों से चर्चा थी कि पवन सिंह को पार्टी आसनसोल से टिकट दे सकती है। 

उम्मीदवारी मिलने के बाद क्या हुआ?
टिकट मिलने के अगले ही दिन भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को दिल से आभार प्रकट करता हूं। पार्टी ने मुझ पर विश्वास करके आसनसोल से उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन किसी कारणवश में आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ पाऊंगा।'

...तो क्या पवन सिंह की फिल्में बनी नाम वापस लेने की वजह?
भाजपा ने पवन सिंह को आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाने का जैसे ही एलान किया, वैसे ही विपक्षी नेताओं ने पवन सिंह के कुछ पुराने गानों को लेकर आपत्ति जताई। पवन के एक गाने के बोल को लेकर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, 'भाजपा ने आसनसोल लोकसभा सीट पर जिस उम्मीदवार को उतारा है, उसके द्वारा बनाए गए कंटेंट को देखकर मेरा सिर शर्म से झुक गया। लोकतंत्र का अंत नजदीक ही है।' 

राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी ने भी पवन सिंह के अपने गानों में बंगाल की महिलाओं के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई। पार्टी के नेता साकेत गोखले ने लिखा कि पवन सिंह महिलाओं को लेकर अश्लील वीडियो बनाते हैं। टीएमसी ने महिला अस्मिता को मुद्दा बनाने की कोशिश की। ऐसे में माना जा रहा है कि पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव न लड़ने का एलान किया।

पवन सिंह ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
सोमवार को भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर उनसे मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि आगे जो भी होगा अच्छा होगा। जब पवन से पूछा गया कि वह चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने जवाब दिया, 'अब ये समय बताएगा। जो भी होगा वो आप से (मीडिया) साझा करेंगे।' 
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