लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। साथ ही आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आ चुके हैं। राज्य में टीडीपी ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं। 135 सीटें जीत कर टीडीपी ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। वहीं, जनसेना ने 21 सीटें जीती हैं। भाजपा आठ सीटों पर जीतने में सफल रही। वर्तमान सत्तारूढ़ दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी मात्र 11 सीटों पर सिमट गई है। वहीं, लोकसभा की अधिकांश सीटें भी एनडीए की झोली में गई हैं।
यहां देखें जीत के आंकड़े
| पार्टी |
जीत |
| टीडीपी |
135 |
| जेएनपी |
21 |
| भाजपा |
8 |
| वाईएसआरपीसी |
11 |
| कांग्रेस |
00 |
| अन्य |
00 |
चुनाव से पहले एनडीए में दोबारा शामिल हुई थी टीडीपी
चुनाव से पहले भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता चंद्रबाबू नायडू ने वापसी की थी। साल 1996 में टीडीपी पहली बार एनडीए का हिस्सा बनी थी। चंद्रबाबू नायडू ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम किया था। इतना ही नहीं, आंध्र प्रदेश में 2014 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी टीडीपी ने भाजपा के साथ लड़ा था, लेकिन 2019 में टीडीपी, एनडीए से अलग हो गई थी।
2019 में था यह आंकड़ा
साल 2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 175 सीटों में से 151 सीटें जीतकर भारी बहुमत से चुनाव जीता था, जबकि मौजूदा तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने 23 सीटें जीती थीं। जन सेना पार्टी (जेएसपी) ने एक सीट के साथ विधानसभा में प्रवेश किया था, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोई भी सीट जीतने में असफल रही थी।
तब जगन मोहन रेड्डी को आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। इस बार चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में तेलुगू देशम, भाजपा और पवन कल्याण की जन सेना पार्टी का गठबंधन हुआ है। वाईएस शर्मिला के नेतृत्व में फिर से उभरती कांग्रेस का इस बार लेफ्ट पार्टियों के साथ ने चुनाव को त्रिशंकु बना दिया है।
आंध्र प्रदेश की सियासत
175 विधायकों को चुनने के लिए आंध्र प्रदेश के लोगों ने 13 मई को अपना वोट दिया था। एक जमाने में कांग्रेस और तेलुगू देशम के हाथ में इस राज्य की बागडोर रहती थी, लेकिन 2009 में वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत के बाद उनके बेटे वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने खुद को आंध्र प्रदेश की राजनीति में स्थापित किया। 2019 में सत्ता में आने के बाद से ही कई सामाजिक योजनाओं के चलते उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।